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ऐसे ही उड़ते रहे धूल के गुबार तो एक्यूआई पहुंचेगा तीन सौ के पार

Tue, 23 Feb 2021 01:16 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2021 01:16 AM IST
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The dust escapes like this, AQI will reach beyond three hundred
सिटी मालगोदाम रोड पर उड़ती धूल और लगा जाम। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

शहर में सीवर लाइन बिछाने के लिए हर तरफ खुदी पड़ी हैं सड़कें
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फ्लाईओवर, ओवरब्रिज के निर्माण कार्यों से भी बढ़ रहा है प्रदूषण

बरेली। शहर की सभी मुख्य सड़कें खुदी पड़ी हैं। सर्दी में मौसम में नमी रही तब तक तो वायु प्रदूषण नियंत्रित रहा, लेकिन अब गर्मी बढ़ते ही धूल के गुबार उड़ने लगे हैं। इससे एक्यूआई 280 तक पहुंच गया है। जानकारों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो अगले महीने प्रदूषण का स्तर तीन सौ के पार पहुंच जाएगा।
दो साल से शहरवासी सड़कों पर धूल-धक्कड़ से परेशान हैं। इस समय दामोदर पार्क से चौकी चौराहा होते हुए बियाबानी कोठी तक सड़कें खुदी पड़ी हैं। इन सड़कों पर न तो रोजाना पानी का छिड़काव होता है और न ही मिट्टी का भराव करने के बाद पत्थर बिछाया जा रहा है। इससे पूरे दिन धून के गुबार उड़ते रहते हैं। जल निगम ने सीवर लाइन बिछाने के बाद मिट्टी से पाटकर सड़क को ऐसे ही छोड़ दिया है। यही हाल सिटी स्टेशन से किला पुल तक की सड़क का है। धूल उड़ने से सड़क पर गुजरने वाले ही नहीं, आसपास के लोग भी परेशान हैं। अब खुर्रम गौंटिया रोड पर भी खोदाई शुरू कर दी गई है। यहां भी धूल उड़ रही है। धूल के गुबार तीन सौ बेड अस्पताल तक पहुंच रहे हैं। इससे मरीजों को खासी दिक्कत हो रही है।
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बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग के प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना का कहना है कि यदि इसी तरह धूल उड़ती रही तो आने वाले समय में एक्यूआई का स्तर तीन सौ के पार पहुंच जाएगा। अभी से विभागों को सुधार करने की जरूरत है। सभी सड़कों पर लगातार पानी का छिड़काव हो और जो सड़कें खुदी पड़ी हैं, उन्हें तेजी से बनाया जाए, नहीं तो शहरवासियों को इसके गंभीर दुष्परिणाम भुगतने होंगे। तेज धूप और हवाओं से वातावरण में नमी का स्तर लगातार कम हो रहा है। इससे प्रदूषण का ग्राफ बढ़ता जा रहा है।
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स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं धूल के कण

बरेली। निर्माण स्थलों के आसपास और सड़कों पर उड़ती धूल दिखने में भले ही खतरनाक न लगे, लेकिन इसके छोटे-छोटे कण स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हो रहे हैं। ये सांस के जरिए फेफ ड़ों तक पहुंचकर उन्हें नुकसान पहुंचा रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, धूल के कण दमा, अस्थमा और एलर्जी जैसी कई बीमारियों का कारण बन रहे हैं। ये उन लोगों के लिए और ज्यादा खतरनाक हैं, जो पहले से ही इन बीमारियों से पीड़ित हैं। उनके लिए ये जानलेवा भी साबित हो सकते हैं।

डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि सर्दी के मौसम में वायुमंडल में बहुत ज्यादा नमी रहती है, इस वजह से धूल के कण ज्यादा ऊपर नहीं उठ पाते हैं, लेकिन गर्मी बढ़ते ही यह हवा में उड़ने लगते हैं। यह आंखों को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। एलर्जी का भी कारण बनते हैं। धूल से दमा, अस्थमा और चर्म रोग की समस्या भी पैदा होती है। लंबे समय तक धूल के बीच रहना बेहद खतरनाक हो सकता है। रेहड़ी-पटरी दुकानदारों, यातायात पुलिस आदि को बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि धूल से होने वाली बीमारियां धीरे-धीरे शरीर पर अपना दुष्प्रभाव दिखाती हैं।

ऐसे करें बचाव

  1. मास्क का उपयोग करें।
  2. घर से बाहर निकलते समय मास्क न हो तो मुंह पर कपड़ा लपेटकर रख सकते हैं।
  3. मोटरसाइकिल चालक हेलमेट जरूर लगाएं और कार चालक शीशा बंद रखें।
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