सपना था दुश्मनों से लड़ने का, अब है मौत से लड़ाई

बरेली। Updated Wed, 15 Nov 2017 01:50 AM IST
The dream was to fight the enemies, now is the fight with death
ममता

भोजीपुरा स्टेशन पर फोन पर बात करते हुए ट्रेन में चढ़ने की जल्दबाजी दिखाने की गलती ने एक मेधावी छात्रा और एनसीसी कैडेट 20 वर्षीय ममता मौर्य की जिंदगी ही एकाएक बदल दी। फिसलकर ट्रेन की चपेट में आई ममता का दायां पैर तो सोमवार को हादसे में ही जांघ से कटकर अलग हो गया था। मंगलवार को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद डॉक्टर उनके घायल हुए दाहिने हाथ को बचाने की कोशिश में जुटे रहे। आईसीयू में भर्ती ममता की देर शाम तक हालत गंभीर बनी हुई थी। 
आईसीयू के बाहर खड़े बड़े भाई अजय पाल के मुताबिक, ममता चंद महीने की थीं, जब उनके पिता सीताराम मौर्य की टीबी की बीमारी से मौत हो गई थी। उन्होंने पिता की तरह ममता को पाला। वह खुद सेना में भर्ती होना चाहते थे, लेकिन जाट रेजिमेंट की भर्ती परीक्षा में दो बार असफल होने के बाद वह बहन को सेना में भेजने का सपना जी रहे थे। इस एक हादसे से परिवार के सारे ख्वाब बिखर गए। मां श्यामा मुरारी ने नम आंखों के साथ बताया कि शाहजहांपुर में प्री टीएससी कैंप में शामिल होने ममता 30 सितंबर को गईं थीं। दिल्ली में थल सैनिक कैंप में चयनित होने के लिए राज्यस्तर की परीक्षा थी, लेकिन मुफलिसी के चलते वह दिल्ली नहीं जा सकीं। 
पढ़ाई और एनसीसी में हमेशा बेहतर रहा प्रदर्शन 
अवंती बाई महिला महाविद्यालय में बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा ममता को फरवरी में एनसीसी के बी सर्टिफिकेट के लिए परीक्षा देनी थी। बरेली कॉलेज में एनसीसी लेफ्टिनेंट बीना सक्सेना के मुताबिक, ममता पढ़ाई के साथ ही एनसीसी में हमेशा बेहतर रहीं। सी सर्टिफिकेट परीक्षा पास करने के बाद वह सीधे एसएसबी में सेलेक्ट हो सकती थीं। उनका ख्वाब सेना में जाना था ताकि देश के दुश्मनों से लड़ सकें। प्रो. बीना के मुताबिक, एनसीसी कैडेट्स ने 20 हजार रुपये सिद्धि विनायक अस्पताल प्रशासन को दिए हैं।  
नादानी ने ख्वाब किए ढेर 
ममता मोबाइल पर बात करती हुईं भोजीपुरा प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर सरक रही ट्रेन पर चढ़ना चाहती थीं। प्लेटफॉर्म के दूसरी तरफ से चढ़ने की कोशिश में उनका पैर पायदान पर फिसल गया था, जिसकी वजह से वह गिर पड़ी थीं। थोड़ी सावधानी बरती जाती तो हादसा बच सकता था। डॉ. ब्रजेश्वर सिंह ने बताया कि दायां पैर नहीं बचाया जा सका है, अब पूरी कोशिश हाथ बचाने के लिए की जा रही है। 
फोन आते ही पैसेंजर ट्रेन की तरफ भागी थीं ममता 
देवरनिया थाना क्षेत्र के गांव शरीफनगर की 22 वर्षीय ममता मौर्य अवंतीबाई महाविद्यालय हर ट्रेन से आती थीं और वापस चली जाती थीं। मंगलवार को पैसेंजर ट्रेन से भोजीपुरा तक पहुंचने के बाद सिटी स्टेशन के पास रहने वाली उनकी मौसी का फोन आया कि वापस आ जाओ। इसके बाद पीलीभीत से बरेली आ रही गाड़ी संख्या 55351 के महिला कोच में चढ़ने के दौरान उनका पैर फिसल गया। ट्रेन के पहिये के नीचे शरीर का दायां हिस्सा आने से वह गंभीर रूप से जख्मी हो गईं। छात्रा का दायां पैर जांघ से कट गया। दाएं हाथ में गंभीर चोट आई है। जीआरपी चौकी इंचार्ज सत्य विजय ने छात्रा को ट्रेन के नीचे से निकाला था। 

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