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कैंट का ड्रामा खत्म, तोमर आउट, मुजाहिद ही लड़ेंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Sun, 29 Jan 2017 01:09 AM IST
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The drama over Kent, Tomar out, the fight Mujahid
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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मेयर आईएस तोमर के कैंट सीट पर नामांकन के बाद ‘गठबंधन’ में कांग्रेस को मिली इस सीट पर हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया। तोमर ने भरोसे के साथ नामांकन कराया और नामांकन कक्ष के बाहर मुजाहिद से गुफ्तगू करते भी देखे गए। सपा के खेमे ने यह बात भी फैलाई कि कांग्रेस प्रत्याशी अपना नाम वापस ले लेंगे। तभी से इस सीट पर कौन लड़ेगा? यह सवाल गूंज रहा था। आखिर कार शनिवार की रात यह साफ हो गया कि यह सीट कांग्रेस के खाते में ही रहेगी और यहां से मुजाहिद हसन खां ही चुनाव लड़ेंगे।
नवाब ने जोर दिखाया, शकील टिकट वापस लाए
नामांकन के आखिरी दिन आईएस तोमर ने सपा के सिंबल पर पर्चा दाखिल कर खलबली मचा दी थी। लेकिन 48 घंटे भी नहीं गुजरे कि कांग्रेस के दांव में तोमर फंस गए। उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया है। दरअसल गड़बड़ी तोमर के नामांकन से शुरू हुई और इसकी पल-पल की रिपोर्ट कांग्रेसी हाईकमान तक पहुंचाते रहे। उन्हीं रिपोर्टों के आधार पर कांग्रेस के सचिव और जोन प्रभारी शकील अहमद ने अपना दांव लगाया। मुजाहिद को टिकट उन्होंने ही दिलाया था और आखिर में संकटमोचक बनते हुए उनका टिकट बरकरार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शुक्रवार को तोमर ने पर्चा भरा तभी से गठबंधन पर रार के आसार बन गए। सपाई खेमा जहां नवाब मुजाहिद को टिकट वापस लेने के लिए मना लेना का दावा करने लगा वहीं कांग्रेसी इस सीट पर पूरी तरह अड़े थे। प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर और गुलाम नबी आजाद की तरफ से इशारा मिलने पर जिलाध्यक्ष रामदेव पांडेय के माध्यम से शकील अहमद ने पूरी रिपोर्ट मंगाई और आला कमान को इससे अवगत कराया गया। उपर से ही इशारा मिल गया था कि यह सीट कांग्रेस के खाते में ही रहेगी इसलिए अपना प्रचार जारी रखें। दोपहर में शकील अहमत पहुंचे और मुजाहिद हसन खां के बारादरी स्थित आवास पर कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग हुई जिसमें पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन भी थे। इस मीटिंग में ही सभी को पूरी ताकत से चुनाव लड़ाने की बात कही गई और साफ कह दिया गया कि यह सीट कांग्रेस के पास ही रहेगी। उसके बाद हाईकमान से लगातार संपर्क कर सीट वापसी के लिए दबाव बनाया जाने लगा। इधर रात में अचानक मेयर आईएस तोमर की ओर से रात नौ बजे पत्रकार वार्ता बुलाई गई तो तय हो गया कि कुछ न कुछ होना है। डा. तोमर ने आखिर अपना नाम वापस लेने की घोषणा की और कांग्रेसी खेमा खुशी से झूम उठा।
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अंत भला तो सब भला
कांग्रेस के जोन प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव शकील अहमद ने कहा कि गठबंधन में यही सीट कांग्रेस के खाते में थी। बीस को आईएस तोमर को सिंबल दिया गया था। उन्होंने ऊहापोह की स्थिति में नामांकन करा दिया था। हाई कमान को इसकी जानकारी दी गई थी। गठबंधन के नेता अखिलेश यादव जी को इसकी जानकारी दी गई तो उन्होंने स्थिति साफ कर दी और कांग्रेस के प्रत्याशी को लड़ने को कह दिया है। अंत भला तो सब भला।
डा. तोमर के नामांकन कराने के साथ ही सभी जानकारी से आला कमान को अवगत करा दिया गया था। वहां से साफ कह दिया गया था कि पूरी ताकत से चुनाव लड़ाएं यह सीट कांग्रेस के खाते में ही रहेगी। अब गंठबंधन के प्रत्याशी मुजाहिद हसन खां को मजबूती से सभी मिलकर चुनाव लड़ाएंगे-रामदेव पांडेय, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
मेयर बोले, आला कमान के आदेश से मैं हट गया
बरेली। मेयर डा. आईएस तोमर ने रात नौ बजे अपने आवास पर प्रेस वार्ता बुलाकर कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आदेश पर वह चुनाव लड़ने आए थे। अब उन्होंने नामांकन वापस लेने का आदेश दिया तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगे और अपना नामांकन वापस ले लेंगे। दो पार्टियों के गठबंधन में नुकसान और फायदा तो होता ही है लेकिन वह सीएम के निर्णय की सराहना करते हैं। मेयर ने कहा कि नामांकन वापस लेने से उनके समर्थक और जनता को आघात तो पहुंचेगा लेकिन जब सिद्धांत की बात होती है तो ऐसे निर्णय माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऊपर से ही सिंबल दिया गया था और नामांकन का आदेश था और अब जब वापस लेने के लिए कहा जा रहा है तो मुख्यमंत्री के कहने से मैं अपना नाम वापस लूंगा। पत्रकार वार्ता में सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव, प्रमोद विष्ट, सत्येंद्र यादव समेत अन्य लोग भी मौजूद थे।
सपा हाईकमान कैंट के बदले पूर्वांचल में एक सीट कांग्रेस को देने पर बात चल रही थी। इसी पर डा. तोमर को सशर्त सिंबल दिया गया था। सपा हाईकमान के आदेश पर ही उन्होंने नामांकन कराया। अब सपा कार्यकर्ता गठबंधन धर्म निभाते हुए कांग्रेस प्रत्याशी को लड़ाएंगे-शुभलेश यादव, जिलाध्यक्ष सपा
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नवाब ने जोर दिखाया, शकील टिकट वापस लाए
नामांकन के आखिरी दिन आईएस तोमर ने सपा के सिंबल पर पर्चा दाखिल कर खलबली मचा दी थी। लेकिन 48 घंटे भी नहीं गुजरे कि कांग्रेस के दांव में तोमर फंस गए। उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया है। दरअसल गड़बड़ी तोमर के नामांकन से शुरू हुई और इसकी पल-पल की रिपोर्ट कांग्रेसी हाईकमान तक पहुंचाते रहे। उन्हीं रिपोर्टों के आधार पर कांग्रेस के सचिव और जोन प्रभारी शकील अहमद ने अपना दांव लगाया। मुजाहिद को टिकट उन्होंने ही दिलाया था और आखिर में संकटमोचक बनते हुए उनका टिकट बरकरार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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शुक्रवार को तोमर ने पर्चा भरा तभी से गठबंधन पर रार के आसार बन गए। सपाई खेमा जहां नवाब मुजाहिद को टिकट वापस लेने के लिए मना लेना का दावा करने लगा वहीं कांग्रेसी इस सीट पर पूरी तरह अड़े थे। प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर और गुलाम नबी आजाद की तरफ से इशारा मिलने पर जिलाध्यक्ष रामदेव पांडेय के माध्यम से शकील अहमद ने पूरी रिपोर्ट मंगाई और आला कमान को इससे अवगत कराया गया। उपर से ही इशारा मिल गया था कि यह सीट कांग्रेस के खाते में ही रहेगी इसलिए अपना प्रचार जारी रखें। दोपहर में शकील अहमत पहुंचे और मुजाहिद हसन खां के बारादरी स्थित आवास पर कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग हुई जिसमें पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन भी थे। इस मीटिंग में ही सभी को पूरी ताकत से चुनाव लड़ाने की बात कही गई और साफ कह दिया गया कि यह सीट कांग्रेस के पास ही रहेगी। उसके बाद हाईकमान से लगातार संपर्क कर सीट वापसी के लिए दबाव बनाया जाने लगा। इधर रात में अचानक मेयर आईएस तोमर की ओर से रात नौ बजे पत्रकार वार्ता बुलाई गई तो तय हो गया कि कुछ न कुछ होना है। डा. तोमर ने आखिर अपना नाम वापस लेने की घोषणा की और कांग्रेसी खेमा खुशी से झूम उठा।
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अंत भला तो सब भला
कांग्रेस के जोन प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव शकील अहमद ने कहा कि गठबंधन में यही सीट कांग्रेस के खाते में थी। बीस को आईएस तोमर को सिंबल दिया गया था। उन्होंने ऊहापोह की स्थिति में नामांकन करा दिया था। हाई कमान को इसकी जानकारी दी गई थी। गठबंधन के नेता अखिलेश यादव जी को इसकी जानकारी दी गई तो उन्होंने स्थिति साफ कर दी और कांग्रेस के प्रत्याशी को लड़ने को कह दिया है। अंत भला तो सब भला।
डा. तोमर के नामांकन कराने के साथ ही सभी जानकारी से आला कमान को अवगत करा दिया गया था। वहां से साफ कह दिया गया था कि पूरी ताकत से चुनाव लड़ाएं यह सीट कांग्रेस के खाते में ही रहेगी। अब गंठबंधन के प्रत्याशी मुजाहिद हसन खां को मजबूती से सभी मिलकर चुनाव लड़ाएंगे-रामदेव पांडेय, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
मेयर बोले, आला कमान के आदेश से मैं हट गया
बरेली। मेयर डा. आईएस तोमर ने रात नौ बजे अपने आवास पर प्रेस वार्ता बुलाकर कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आदेश पर वह चुनाव लड़ने आए थे। अब उन्होंने नामांकन वापस लेने का आदेश दिया तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगे और अपना नामांकन वापस ले लेंगे। दो पार्टियों के गठबंधन में नुकसान और फायदा तो होता ही है लेकिन वह सीएम के निर्णय की सराहना करते हैं। मेयर ने कहा कि नामांकन वापस लेने से उनके समर्थक और जनता को आघात तो पहुंचेगा लेकिन जब सिद्धांत की बात होती है तो ऐसे निर्णय माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऊपर से ही सिंबल दिया गया था और नामांकन का आदेश था और अब जब वापस लेने के लिए कहा जा रहा है तो मुख्यमंत्री के कहने से मैं अपना नाम वापस लूंगा। पत्रकार वार्ता में सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव, प्रमोद विष्ट, सत्येंद्र यादव समेत अन्य लोग भी मौजूद थे।
सपा हाईकमान कैंट के बदले पूर्वांचल में एक सीट कांग्रेस को देने पर बात चल रही थी। इसी पर डा. तोमर को सशर्त सिंबल दिया गया था। सपा हाईकमान के आदेश पर ही उन्होंने नामांकन कराया। अब सपा कार्यकर्ता गठबंधन धर्म निभाते हुए कांग्रेस प्रत्याशी को लड़ाएंगे-शुभलेश यादव, जिलाध्यक्ष सपा