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श्यामगंज बवाल का कसूरवार खुद जिला प्रशासन
सार
दरगाह आला हजरत ने चार सौ जायरीन पर केस दर्ज करने और गिरफ्तारी के लिए दबिश देने पर जताई नाराजगी
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प्रतीकात्मक।
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विस्तार
सज्जादानशीन अहसन मियां ने कहा- गिरफ्तारी हुई तो तमाम अकीदतमंद भी जाएंगे जेल
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बरेली। उर्स-ए-रजवी के कुल के दौरान सोमवार को श्यामगंज में बवाल करने के बाद पुलिस की ओर से चार सौ जायरीन के खिलाफ संगीन धाराओं में केस दर्ज करने की घटना को दरगाह आला हजरत ने जिला प्रशासन को अपने कसूर की जिम्मेदारी बेगुनाहों पर मढ़ने का कारनामा करार दिया है। दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां अहसन मियां ने पूरी घटना के लिए प्रशासन को कसूरवार ठहराते हुए चेतावनी दी है कि अगर बेगुनाहों पर कार्रवाई हुई तो आला हजरत के तमाम अकीदतमंद भी जेल जाएंगे।
उर्स-ए-रजवी के कुल में सोमवार सुबह एकाएक जायरीन की भीड़ उमड़ने के बाद पुलिस ने आनन-फानन श्यामगंज चौराहे पर कालीबाड़ी की ओर से इस्लामिया ग्राउंड जाने वाला रास्ता बंद कर डायवर्जन कर दिया था जिसके बाद भड़के जायरीन ने पुलिस पर पथराव कर दिया था। इस दौरान दहशत और अफवाहें फैलने से शहर का बाजार भी बंद हो गया। मंगलवार को अहसन मियां पूरे घटनाक्रम पर बयान जारी करते हुए कहा कि उर्स में आ रहे अकीदतमंदों के साथ पुलिस ने बदसलूकी के साथ जिस तरह लाठीचार्ज किया, उन्हें उकसाया और फिर उन्हीं के खिलाफ केस दर्ज कर घरों पर दबिश देकर दहशत फैलाई, वह बर्बरता की मिसाल है। इससे मरकत अहले सुन्नत दरगाह आला हजरत के लोग काफी आहत हैं।
सज्जादानशीन ने कहा कि जिला प्रशासन ने पिछले साल की तरह इस बार भी उर्स-ए-रजवी में कम संख्या में लोगों की अनुमति दी थी। इसी कारण उर्स के पोस्टर में अपील की गई थी कि अकीदतमंद बरेली शरीफ आने के बजाय अपने घरों में ही कुल कर लें। अकीदतमंद इस पर रजामंद भी थे लेकिन उर्स से कुछ दिन दिन पहले शादी-विवाह और दूसरे सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिरकत करने वालों की संख्या पर पाबंदी हटाने का शासनादेश मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक हुआ। इससे अकीदतमंदों में संदेश चला गया कि उर्स पहले की तरह ही होगा। प्रशासन ने भी स्थिति साफ नहीं की तो कुछ लोगों ने यह बयान भी जारी कर दिया कि उर्स में आने पर कोई पाबंदी नहीं है।
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अहसन मियां ने कहा कि उर्स के पहले दो दिन हजारों जायरीन उर्स में शामिल होने आए लेकिन प्रशासन ने कोई रोकथाम नहीं की। प्रशासन के इसी ढुलमुल रवैये के कारण आखिरी दिन काफी संख्या में अकीदतमंद उर्स स्थल की ओर उमड़ पड़े। इसमें उनका कोई कुसूर नहीं था। कुसूर असल में जिला प्रशासन का था जिसने कुल के दिन तक मौन धारण किए रखा। ऊपर से गुपचुप ढंग से पूरे शहर में नाकाबंदी कर दी, तमाम जगह बैरियर लगाकर जायरीन को रोक दिया गया। अगर उन्हें उर्स स्थल तक आने दिया जाता तो ऐसे हालात न पैदा होते।
उर्स-ए-रजवी के कुल में सोमवार सुबह एकाएक जायरीन की भीड़ उमड़ने के बाद पुलिस ने आनन-फानन श्यामगंज चौराहे पर कालीबाड़ी की ओर से इस्लामिया ग्राउंड जाने वाला रास्ता बंद कर डायवर्जन कर दिया था जिसके बाद भड़के जायरीन ने पुलिस पर पथराव कर दिया था। इस दौरान दहशत और अफवाहें फैलने से शहर का बाजार भी बंद हो गया। मंगलवार को अहसन मियां पूरे घटनाक्रम पर बयान जारी करते हुए कहा कि उर्स में आ रहे अकीदतमंदों के साथ पुलिस ने बदसलूकी के साथ जिस तरह लाठीचार्ज किया, उन्हें उकसाया और फिर उन्हीं के खिलाफ केस दर्ज कर घरों पर दबिश देकर दहशत फैलाई, वह बर्बरता की मिसाल है। इससे मरकत अहले सुन्नत दरगाह आला हजरत के लोग काफी आहत हैं।
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सज्जादानशीन ने कहा कि जिला प्रशासन ने पिछले साल की तरह इस बार भी उर्स-ए-रजवी में कम संख्या में लोगों की अनुमति दी थी। इसी कारण उर्स के पोस्टर में अपील की गई थी कि अकीदतमंद बरेली शरीफ आने के बजाय अपने घरों में ही कुल कर लें। अकीदतमंद इस पर रजामंद भी थे लेकिन उर्स से कुछ दिन दिन पहले शादी-विवाह और दूसरे सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिरकत करने वालों की संख्या पर पाबंदी हटाने का शासनादेश मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक हुआ। इससे अकीदतमंदों में संदेश चला गया कि उर्स पहले की तरह ही होगा। प्रशासन ने भी स्थिति साफ नहीं की तो कुछ लोगों ने यह बयान भी जारी कर दिया कि उर्स में आने पर कोई पाबंदी नहीं है।
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अहसन मियां ने कहा कि उर्स के पहले दो दिन हजारों जायरीन उर्स में शामिल होने आए लेकिन प्रशासन ने कोई रोकथाम नहीं की। प्रशासन के इसी ढुलमुल रवैये के कारण आखिरी दिन काफी संख्या में अकीदतमंद उर्स स्थल की ओर उमड़ पड़े। इसमें उनका कोई कुसूर नहीं था। कुसूर असल में जिला प्रशासन का था जिसने कुल के दिन तक मौन धारण किए रखा। ऊपर से गुपचुप ढंग से पूरे शहर में नाकाबंदी कर दी, तमाम जगह बैरियर लगाकर जायरीन को रोक दिया गया। अगर उन्हें उर्स स्थल तक आने दिया जाता तो ऐसे हालात न पैदा होते।