कोरोना से 17 शिक्षकों की मौत सिस्टम को कबूल नहीं
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शासनादेश में दिए मानकों के आधार पर चुनाव ड्यूटी को नहीं माना जा रहा मौत की वजह
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अनुग्रह राशि के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं परिवार के लोग
बरेली। पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने के बाद जान गंवाने वाले 17 शिक्षकों के परिवार यह साबित नहीं कर पाए हैं कि उनकी मौत कोरोना की वजह से हुई, लिहाजा उन्हें शासन से अनुग्रह राशि भी नहीं मिल पा रही है। दरअसल शासनादेश के मुताबिक चुनाव ड्यूटी के एक महीने के अंदर जिनकी मौत हुई, उन्हीं को अनुग्रह राशि के लिए पात्र माना गया है। कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जिनकी कोरोना से मौत होने के बावजूद अस्पतालों ने कोविड पोर्टल पर रिपोर्ट अपडेट नहीं की।
इन 17 शिक्षकों के परिवार काफी समय से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कोई उनकी सुनने को तैयार नहीं है। कुछ शिक्षकों के परिवारों के सदस्यों का कहना है कि एक महीने के बजाय उसके एक या दो दिन बाद मौत हुई लेकिन फिर भी उनका दावा स्वीकार नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि अगर उनके परिजन की एक महीने के अंदर मौत नहीं हुई तो इसके लिए क्या वे जिम्मेदार हैं। वे तो अपने मरीज को बचाने के लिए अस्पताल में डटे हुए थे। क्या पैसे लेने के लिए हम अपने मरीज को खुद मार देते, उनका कहना है कि सरकार के इस जियो का क्या मतलब समझा जाए।
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यूटा ने कोरोना संक्रमण से मृत शिक्षकों के परिवारों को अनुग्रह राशि देने की मांग प्रदेश स्तर तक की है। बरेली में 37 में से सिर्फ 14 शिक्षकों को अनुग्रह राशि मिली है। परिवारों के पास रिपोर्ट हैं लेकिन उनका नाम सूची में नहीं है। जिलाधिकारी से अनुरोध भी कर चुके हैं कि बाकी लोगों के नाम पर भी पुनर्विचार किया जाए। -भानु प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष यूटा
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कई शिक्षक ऐसे हैं जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव थी लेकिन कोविड पोर्टल पर अपडेट न होने से उन्हें अनुग्रह राशि नहीं मिली। यह अस्पतालों की गलती है, इसका खामियाजा मृतक शिक्षकों के परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। यह तरीका सही नहीं है। न्याय नहीं मिला तो शिक्षक संघ आंदोलन करेंगे। - केसी पटेल, ब्लॉक अध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ
ग्राम विकास अधिकारी को भी नहीं मिली अनुग्रह राशि
मझगवां ब्लॉक में तैनात रहे ग्राम विकास अधिकारी रामवीर सिंह और रामनगर में तैनात रहे भरत सिंह की मौत भी कोरोना से हुई थी। दोनों लोगों की ड्यूटी चुनाव में लगी थी। परिजन के पास उनकी रिपोर्ट भी है लेकिन कोविड पोर्टल पर इनकी मौत दर्ज नहीं कराई गई लिहाजा उनके परिजन को अनुग्रह राशि नहीं मिली है। वे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
अनुग्रह राशि के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं परिवार के लोग बरेली। पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने के बाद जान गंवाने वाले 17 शिक्षकों के परिवार यह साबित नहीं कर पाए हैं कि उनकी मौत कोरोना की वजह से हुई, लिहाजा उन्हें शासन से अनुग्रह राशि भी नहीं मिल पा रही है। दरअसल शासनादेश के मुताबिक चुनाव ड्यूटी के एक महीने के अंदर जिनकी मौत हुई, उन्हीं को अनुग्रह राशि के लिए पात्र माना गया है। कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जिनकी कोरोना से मौत होने के बावजूद अस्पतालों ने कोविड पोर्टल पर रिपोर्ट अपडेट नहीं की।
इन 17 शिक्षकों के परिवार काफी समय से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कोई उनकी सुनने को तैयार नहीं है। कुछ शिक्षकों के परिवारों के सदस्यों का कहना है कि एक महीने के बजाय उसके एक या दो दिन बाद मौत हुई लेकिन फिर भी उनका दावा स्वीकार नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि अगर उनके परिजन की एक महीने के अंदर मौत नहीं हुई तो इसके लिए क्या वे जिम्मेदार हैं। वे तो अपने मरीज को बचाने के लिए अस्पताल में डटे हुए थे। क्या पैसे लेने के लिए हम अपने मरीज को खुद मार देते, उनका कहना है कि सरकार के इस जियो का क्या मतलब समझा जाए।
यूटा ने कोरोना संक्रमण से मृत शिक्षकों के परिवारों को अनुग्रह राशि देने की मांग प्रदेश स्तर तक की है। बरेली में 37 में से सिर्फ 14 शिक्षकों को अनुग्रह राशि मिली है। परिवारों के पास रिपोर्ट हैं लेकिन उनका नाम सूची में नहीं है। जिलाधिकारी से अनुरोध भी कर चुके हैं कि बाकी लोगों के नाम पर भी पुनर्विचार किया जाए। -भानु प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष यूटा
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कई शिक्षक ऐसे हैं जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव थी लेकिन कोविड पोर्टल पर अपडेट न होने से उन्हें अनुग्रह राशि नहीं मिली। यह अस्पतालों की गलती है, इसका खामियाजा मृतक शिक्षकों के परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। यह तरीका सही नहीं है। न्याय नहीं मिला तो शिक्षक संघ आंदोलन करेंगे। - केसी पटेल, ब्लॉक अध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ