{"_id":"57d850bb4f1c1ba73dd4817a","slug":"the-books-do-not-raise-additional-burden-of-bags","type":"story","status":"publish","title_hn":"एडिशनल किताबों से न बढ़ाएं बस्तों का बोझ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एडिशनल किताबों से न बढ़ाएं बस्तों का बोझ
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Wed, 14 Sep 2016 12:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्तों का बोझ बच्चों के कंधों पर बढ़ गया है। सीबीएसई ने सभी स्कूलों को सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि भारी बस्तों से बच्चाें के हड्डियाें और मांसपेशियों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। जिन स्कूलों ने एडिशनल और सप्लीमेंट्री किताबें लगाई हैं उसे भी बंद करें। बोर्ड ने शिक्षकों और अभिभावकाें को भी हिदायत दी है।
12 सितंबर को जारी सर्कुलर में बोर्ड के निदेशक केके चौधरी ने प्रधानाचार्यों को भेजे पत्र में कहा है कि बच्चों में स्पाइन की दिक्कत बढ़ रही है। कमर दर्द, मांसपेशियों का दर्द, कंधों का दर्द और थकान की शिकायत बच्चे कर रहे हैं। रीढ़ की हड्डी और कंधाें की विकृ ति का जिम्मेदार भी कई मामले में भारी बैग है। इसलिए स्कूल इस मामले में छात्र, शिक्षक और अभिभावकाें के साथ मिलकर पहल करें।
स्कूलों को सुझाव
भारी बैग से नुकसान बच्चों को बताएं
इसके लिए स्कूल में कार्यक्रम करा सकते हैं
टाइम टेबिल से किताबें लाने को कहें
छात्र रोजाना अपने बस्ते को दोबारा पैक करें
अतिरिक्त किताबें वर्कबुक न खरीदवाएं
स्कूल रोजाना बच्चाें के बस्ते का भार चेक करें
बच्चे स्पोर्ट्स वियर पहनकर स्कूल आएं, बैग में न लाएं
कुछ प्रोजेक्ट टीचर बच्चाें से स्कूल में ही कराएं
खास हिदायत
पीने के पानी की भारी बोतल बच्चाें को न लाने दें। पानी का प्रबंध स्कूल में ही करें। यह साफ हो साथ ही इसका उपयोग प्रधानाचार्य और शिक्षक भी करें। पानी की नियमित जांच कराते रहें। कक्षा एक से आठ तक बच्चों को अतिरिक्त व पूरक किताबें न खरीदवाएं। टेक्सटबुक और वर्कबुक बहुत जरूरी नहीं हैं। कक्षा एक और दो के बच्चों को स्कूल बैग जरूरी नहीं। शिक्षक भी टेक्सटबुक की जगह कुछ अलग तरीके से पढ़ाएं। अभिभावक बच्चाें को दो स्ट्रिक वाला बैग दें। यह कंधे से चिपका हो, ढीला न हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
12 सितंबर को जारी सर्कुलर में बोर्ड के निदेशक केके चौधरी ने प्रधानाचार्यों को भेजे पत्र में कहा है कि बच्चों में स्पाइन की दिक्कत बढ़ रही है। कमर दर्द, मांसपेशियों का दर्द, कंधों का दर्द और थकान की शिकायत बच्चे कर रहे हैं। रीढ़ की हड्डी और कंधाें की विकृ ति का जिम्मेदार भी कई मामले में भारी बैग है। इसलिए स्कूल इस मामले में छात्र, शिक्षक और अभिभावकाें के साथ मिलकर पहल करें।
विज्ञापन
स्कूलों को सुझाव
भारी बैग से नुकसान बच्चों को बताएं
इसके लिए स्कूल में कार्यक्रम करा सकते हैं
टाइम टेबिल से किताबें लाने को कहें
छात्र रोजाना अपने बस्ते को दोबारा पैक करें
अतिरिक्त किताबें वर्कबुक न खरीदवाएं
स्कूल रोजाना बच्चाें के बस्ते का भार चेक करें
बच्चे स्पोर्ट्स वियर पहनकर स्कूल आएं, बैग में न लाएं
कुछ प्रोजेक्ट टीचर बच्चाें से स्कूल में ही कराएं
खास हिदायत
पीने के पानी की भारी बोतल बच्चाें को न लाने दें। पानी का प्रबंध स्कूल में ही करें। यह साफ हो साथ ही इसका उपयोग प्रधानाचार्य और शिक्षक भी करें। पानी की नियमित जांच कराते रहें। कक्षा एक से आठ तक बच्चों को अतिरिक्त व पूरक किताबें न खरीदवाएं। टेक्सटबुक और वर्कबुक बहुत जरूरी नहीं हैं। कक्षा एक और दो के बच्चों को स्कूल बैग जरूरी नहीं। शिक्षक भी टेक्सटबुक की जगह कुछ अलग तरीके से पढ़ाएं। अभिभावक बच्चाें को दो स्ट्रिक वाला बैग दें। यह कंधे से चिपका हो, ढीला न हो।
विज्ञापन