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Bareilly News: कभी 50 गांवों की जीवनरेखा थी अरिल, अब खो रही अपना वजूद

Wed, 23 Sep 2026 02:46 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 02:46 AM IST
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The Aril was once the lifeline of 50 villages; now, it is losing its very existence.
बरेली। बरेली के आंवला क्षेत्र की अरिल नदी अब अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। कभी 50 से अधिक गांवों की जीवनरेखा रही यह नदी अब अपने बहाव क्षेत्र में सिमटकर रह गई है। सामान्य दिनों में इसकी धारा कई स्थानों पर गायब नजर आती है, जिससे ग्रामीण चिंतित हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से नदी की जमीन और उसके पुराने बहाव क्षेत्र पर कब्जे होते गए हैं। इन कब्जों के कारण नदी का प्रवाह साल-दर-साल संकुचित हो रहा है। नदी का पानी घटने से आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत और भूजल रिचार्ज भी प्रभावित हुआ है। रामनगर के मऊ चंदपुर निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि बारिश होने पर ही नदी का पुराना स्वरूप दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कब्जों ने नदी का बहाव क्षेत्र कम कर दिया है। रामनगर निवासी नन्हे सिंह के अनुसार, पहले अरिल नदी का पाट काफी चौड़ा था। इसमें पूरे साल पानी बहता था और ग्रामीण इसका उपयोग करते थे। धीरे-धीरे नदी की जमीन पर अतिक्रमण बढ़ा और बहाव क्षेत्र सिमटता चला गया। प्रशासन ने इस गंभीर समस्या पर अभी तक ध्यान नहीं दिया है।
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जलभराव और खेती का संकट

मऊ चंदपुर निवासी यादराम ने बताया कि पहले नदी की धार दूर तक दिखती थी। अब कई स्थानों पर नदी की जमीन पर खेती की जा रही है। बारिश में पानी को अपना पुराना रास्ता नहीं मिलता। इससे नदी की धारा के बजाय आसपास के इलाकों में जलभराव हो जाता है। यह जमीन, जो कभी नदी का प्राकृतिक बहाव क्षेत्र थी, अब पानी के लिए बाधा बन गई है।
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ग्रामीणों ने की पैमाइश की मांग

ग्रामीण भूप सिंह ने नदी के पुराने बहाव क्षेत्र की पैमाइश कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर नदी की जमीन चिह्नित की जाए। जहां भी अतिक्रमण मिले, वहां जांच के बाद कार्रवाई होनी चाहिए। इससे नदी का वास्तविक बहाव क्षेत्र सामने आएगा। यह भी स्पष्ट होगा कि कितनी जमीन बची है और कितनी पर कब्जे हैं। संवाद





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अरिल नदी को उसके वास्तविक स्वरूप में लाने के लिए प्रयास जारी हैं। प्रशासनिक टीमों की ओर से सरकारी अभिलेखों के आधार पर दोबारा से सर्वे कराने की योजना बनाई गई है। स्थानीय ग्रामीणों से भी वार्ता कर प्रवाह संबंधी बिंदुओं को शामिल कर निराकरण कराया जाएगा। - देवयानी, सीडीओ
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