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Bareilly News: लेखपाल सिर्फ मोहरा... फाइनेंसर ही असली सरगना

Thu, 16 Jan 2025 02:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jan 2025 02:08 AM IST
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The accountant is just a pawn...the financier is the real kingpin.
बरेली। निलंबित चकबंदी लेखपाल सावन कुमार जायसवाल के गिरोह में रसूखदारों की फौज शामिल है। इसमें बड़े ट्रांसपोर्टरों से लेकर प्रॉपर्टी डीलर तक शामिल हैं। नई रिपोर्ट दर्ज होने से भूमाफिया गिरोह की हकीकत लगातार सामने आ रही है। पता लग रहा है कि सावन भी रसूखदारों का सिर्फ एक मोहरा ही था। असली सरगना तो फाइनेंसर ही हैं।
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सावन कुमार को फाइनेंसरों का साथ मिला तो उसने जमीन पर कब्जे के लिए पैंतरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। सावन का दिमाग और फाइनेंसरों का रुपया लगा तो शहर में बेशकीमती जमीन पर कब्जे शुरू हो गए। सावन के गिरोह में फाइनेंसर के तौर पर अंकिश त्रिपाठी, अक्षित सिंह और विजय अग्रवाल जैसे लोग शामिल हैं। रजिस्ट्री दफ्तर से लेकर न्यायालय तक को गुमराह कर आदेश लेने का काम सावन करवाता था। ऐसे कामों में फाइनेंसर रुपये लगाते थे।
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जैसे ही जमीन पर कब्जा हो जाता था, यह गिरोह अपने दूसरे साथियों के नाम उसका बैनामा कर देते थे। इसके बाद कानूनी पेंच फंस जाता और जमीन के असली मालिक को ये लोग फुटबॉल बना देते थे। इलयास की जमीन को कब्जाने के लिए पांच बैनामे कराए गए थे। कुछ दिनों में दूसरे साथियों के नाम बैनामा कराने की तैयारी थी। हालांकि, इसमें बड़ी रकम खर्च होनी थी। इसमें समय लगा और इससे पहले पुलिस ने सावन गैंग पर शिकंजा कस दिया। गिरोह के सदस्य शाहजहांपुर, पीलीभीत और मुरादाबाद जिले में भी हैं। वहां के धनी लोग भी सावन कुमार के कहने पर रुपये लगाते थे। एसआइटी उन पर भी शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।
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ट्रांसपोर्टर विजय के पंप का कर्मचारी अंकिश भी सरगना
ट्रांसपोर्टर व पेट्रोल पंप समेत कई प्रतिष्ठानों का मालिक बताया जा रहा विजय अग्रवाल भी लेखपाल गिरोह के मुकदमों में नामजद होने के बाद से लापता हो गया है। सूत्रों के मुताबिक विजय अग्रवाल ही गिरोह का सरगना है। लेखपाल के साथ अधिकतर मुकदमों में नामजद अंकिश त्रिपाठी विजय का मोहरा बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक वह काफी समय तक विजय के पेट्रोल पंप पर कर्मचारी रहा था। इस नाते उसके जमीन विवाद संबंधी मामलों को विजय अग्रवाल फाइनेंस करता था।
शहर छोड़कर भागे सावन पर रुपया लगाने वाले
एसआईटी गठित होते ही सावन के इशारे पर लाखों-करोड़ों रुपये लगाने वाले फाइनेंसर शहर छोड़कर भाग गए हैं। पुलिस विजय अग्रवाल, अंकिश त्रिपाठी और अक्षित सिंह समेत उन 21 लोगों की लोकेशन तलाश रही है जो कैंट थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे में नामजद हैं। सूत्रों के मुताबिक सावन के करीबियों में से कुछ लखनऊ के सफेदपोशों की शरण में पहुंच गए हैं। एसआईटी नामजद लोगों की संपत्तियाें की पड़ताल कर रही है। पुलिस की कार्रवाई देखकर ऐसे लोग भी गायब हो गए हैं, जिनका नाम अभी मुकदमों में नहीं जुड़ा है लेकिन वह सावन के करीबी हैं। इसमें से एक किला क्षेत्र का कारोबारी भी हैं, उसका नाम अक्सर जमीन संबंधी विवादों में आता रहता है।


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लेखपाल मामले में नए मुकदमे दर्ज होने के साथ आरोपियों की संख्या बढ़ रही है। कुछ लोग काफी रसूखदार भी बताए जा रहे हैं। आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। उनकी संपत्ति की भी जांच की जाएगी। - मानुष पारीक, एसपी सिटी
अमर उजाला ब्यूरो
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