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कानून से भय तो बनेगा, मगर कुछ सुधार की जरूरत

Thu, 01 Aug 2019 02:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 01 Aug 2019 02:24 AM IST
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teen talaq
बरेली। तीन तलाक पर कानून से भय तो बनेगा। यह भी उम्मीद है कि इससे तीन तलाक में कभी भी आएगी, मगर कुछ सुधार की भी जरूरत है। शौहर को सजा का प्रावधान बनाया गया समझ में आता है, मगर महिला और यदि बच्चे हुए तो उनके भरण पोषण की व्यवस्था कैसे होगी। इस पर भी सरकार को गौर करना चाहिए।
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ॎ तीन तलाक पर कानून पारित किया गया वह भी कमजोरी के साथ। इस नए कानून में महिलाओं के लिए कोई मजबूती नहीं दिखती। यह कानून तब मजबूत माना जाता जब तलाक पीड़ित महिलाओं के जीवन की खुशहाली के बारे में भी सोचा जाता। इसमें महिलाओं के भविष्य का कहीं भी ख्याल नहीं रखा गया है। आने वाले वक्त में इस कानून का महिला के हक के लिए कम और दुरुपयोग की ज्यादा संभावना है। - इमालदा परवीन, समाजिक कार्यकर्ता।
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ॎ एक जुर्म की रोक थाम के लिए मजबूत कानून बनना चाहिए मगर दुष्प्रभाव का भी ख्याल रखना जरूरी है। तीन तलाक में ऐसा ही हुआ है इसमें पीड़ित महिलाओं के कल्याण का ध्यान नहीं रखा गया। तीन तलाक का जो शरई तरीका है उसमें कोई कमी नहीं है, परंतु चंद लोग जब शरीयत से हट कर तलाक देते हैं तो नया कानून उनको तीन साल के लिए जेल की सजा देगा, लेकिन महिलाओं के मेंटीनेंस की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे पीड़िता को कोई फायदा नहीं होगा। इसके अलावा घरों में सुलह की गुंजाईश भी खत्म होगी। - रूबी खान, सामाजिक कार्यकर्ता।
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ॎ तीन तलाक के कानून में सजा तो नजर आती है मगर सहायता नजरअंदाज है। इसमें पहले तलाक का दंश झेलने वाली महिलाओं को सहायता की भी जरूरत है। मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी रख कर यह कानून बनाया गया है तो उनके हक भी बात इस कानून में होना चाहिए। मेरा मानना है कि पीड़ित महिला को सरकारी नौकरी और उसके बच्चे हैं तो उनके लिए निशुल्क की व्यवस्था भी होना चाहिए। शरई कानून की व्यवस्था में कोई कमी नहीं परंतु कुछ लोग जब शरीयत से हट जाते हैं तब उन लोगों को मुश्किल का सामना करा पड़ता है। - हाजी साकिब रजा खां, व्यवसायी।

ॎ तीन तलाक बिल पास हुआ, अच्छी बात है मुस्लिम महिलाओं के हक के बारे में सोचा गया। इससे बीवी को तलाक देेने वालों में भय भी पैदा होगा। छोटे छोटे मामले में एक साथ तीन तलाक बोल देना शरई एतबार से भी ठीक नहीं माना गया। चंद लोग गुस्से में आकर ऐसी हरकत कर जाते हैं। इससे बीवी के सामने समस्या खड़ी हो जाती है। इस पर तो रोक लगेगी मगर महिलाओं के सामने पेश आने वाली परेशानी पर गौर नहीं किया गया कि पति के जेल जाने के बाद उसका भरण पोषण कैसे होगा। दूसरी बात इस कानून का दुरुपयोग न हो इसे कैसे रोका जाएगा। - पम्मी खान वारसी, अध्यक्ष जन सेवा मंच।
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