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टीबी मरीजों को नहीं भागना पड़ेगा लखनऊ
बरेली
Updated Mon, 10 Aug 2015 01:57 AM IST
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बरेली। टीबी के मरीजों को अब इलाज के लिए लखनऊ या दिल्ली की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। यहां मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) वार्ड बनकर तैयार हो गया है। मंगलवार को इसका उद्घाटन लघु उद्योग राज्य मंत्री भगवत सरन गंगवार करेंगे।
एमडीआर वार्ड 18 लाख रुपये की लागत से बना है। 18 बेड के वार्ड को आइसोलेशन वार्ड के बगल में बनाया गया है। महिला और पुरुष वार्ड अलग-अलग बने हैं। वार्ड में एक डॉक्टर और दो स्टाफ की अलग से तैनाती की गई है। बरेली जिला अस्पताल में 80 लाख रुपये की लागत से सीबी नॉड मशीन आई है जो एमडीआर मरीजाें की जांच करती है। बरेली में टीबी मरीजाें की संख्या 5890 है। इनमें एमडीआर मरीज 185 है, जबकि 15 मरीजों की जान जा चुकी है।
एमडीआर मरीजाें का हर दिन का खर्च है 600 रुपये
एमडीआर टीबी का घातक रूप है। यह बीमारी तब होती है जब मरीज टीबी के इलाज को बीच में छोड़ देता है। इसके बाद टीबी की दवाइयां असर नहीं करती। एमडीआर मरीज का इलाज दो साल तक चलता है। इसमें 90 दिन इंजेक्शन लगते हैं। रोजाना इलाज में 600 रुपये खर्च होते हैं। सरकारी अस्पताल में इसका इलाज मुफ्त होता है।
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कोट
मंगलवार को एमडीआर वार्ड का उद्घाटन मंत्री भगवत सरन गंगवार करेंगे। मंडल और आसपास के मरीज अब यहां भर्ती हो सकते हैं।
डॉ. डीपी शर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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एमडीआर वार्ड 18 लाख रुपये की लागत से बना है। 18 बेड के वार्ड को आइसोलेशन वार्ड के बगल में बनाया गया है। महिला और पुरुष वार्ड अलग-अलग बने हैं। वार्ड में एक डॉक्टर और दो स्टाफ की अलग से तैनाती की गई है। बरेली जिला अस्पताल में 80 लाख रुपये की लागत से सीबी नॉड मशीन आई है जो एमडीआर मरीजाें की जांच करती है। बरेली में टीबी मरीजाें की संख्या 5890 है। इनमें एमडीआर मरीज 185 है, जबकि 15 मरीजों की जान जा चुकी है।
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एमडीआर मरीजाें का हर दिन का खर्च है 600 रुपये
एमडीआर टीबी का घातक रूप है। यह बीमारी तब होती है जब मरीज टीबी के इलाज को बीच में छोड़ देता है। इसके बाद टीबी की दवाइयां असर नहीं करती। एमडीआर मरीज का इलाज दो साल तक चलता है। इसमें 90 दिन इंजेक्शन लगते हैं। रोजाना इलाज में 600 रुपये खर्च होते हैं। सरकारी अस्पताल में इसका इलाज मुफ्त होता है।
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मंगलवार को एमडीआर वार्ड का उद्घाटन मंत्री भगवत सरन गंगवार करेंगे। मंडल और आसपास के मरीज अब यहां भर्ती हो सकते हैं।
डॉ. डीपी शर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल