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Bareilly News: हुनर को मिली उड़ान, बना लिया मुकाम
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बरेली । मन में कुछ करने की इच्छा हो और हाथों में हुनर हो तो कोई भी काम कठिन नहीं होता। कठिन परिस्थितियों में भी वो पूरा हो जाता है। ऐसे ही एक महिला ने आईवीआरआई से ट्रेनिंग लेकर हर्बल रंग बनाने की शुरुआत की। बीते चार सालों में वह हर्बल कलर बना कर बाजार में बेच रही है और अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार लाया है। होली पर उनसे बनाए रंगों की मांग रहती है।
बिथरी चैनपुर के सारीपुर गांव की रहने वाली संतोष सोनकर ने 2021 में गांव की महिलाओं को साथ लेकर स्वयं सहायता समूह बनाया। फिर उसके जरिए उन्होंने हर्बल रंग बनाने का काम शुरु किया। होली पर बाजार में अधिकतर केमिकल युक्त रंग आते है, वह त्वचा को हानिकारक हैं। आईवीआरआई से ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने घर पर ही रंग बनाने का काम शुरु किया। संतोष फूल व सब्जियों की सहायता से हर्बल रंग बना रही है। खासकर हरी पत्ते वाली सब्जी, चुकन्दर, अरारोट से रंग तैयार करती है। वह इस समय होली के लिए हरा रंग, पीला रंग, नारंगी रंग बना रही हैं। होली के लिए वह 50 किलो से अधिक रंग बना रही हैं।
बाजार मिले तो बढ़े कारोबार
संतोष बताती है कि उनका कार्य शुरुआती दौर में है। अभी खरीदार कम हैं। इस वजह से कम मात्रा में ही रंग बनाती है। शहर के लोग अभी भी केमिकल युक्त रंग खरीद रहे है। संतोष स्वयं सहायता समूह के जरिए हर्बल रंग इस्तेमाल करने के लिए जागरूक कर रही हैं। उनके समूह में सात महिलाएं हैं। संवाद
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बिथरी चैनपुर के सारीपुर गांव की रहने वाली संतोष सोनकर ने 2021 में गांव की महिलाओं को साथ लेकर स्वयं सहायता समूह बनाया। फिर उसके जरिए उन्होंने हर्बल रंग बनाने का काम शुरु किया। होली पर बाजार में अधिकतर केमिकल युक्त रंग आते है, वह त्वचा को हानिकारक हैं। आईवीआरआई से ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने घर पर ही रंग बनाने का काम शुरु किया। संतोष फूल व सब्जियों की सहायता से हर्बल रंग बना रही है। खासकर हरी पत्ते वाली सब्जी, चुकन्दर, अरारोट से रंग तैयार करती है। वह इस समय होली के लिए हरा रंग, पीला रंग, नारंगी रंग बना रही हैं। होली के लिए वह 50 किलो से अधिक रंग बना रही हैं।
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बाजार मिले तो बढ़े कारोबार
संतोष बताती है कि उनका कार्य शुरुआती दौर में है। अभी खरीदार कम हैं। इस वजह से कम मात्रा में ही रंग बनाती है। शहर के लोग अभी भी केमिकल युक्त रंग खरीद रहे है। संतोष स्वयं सहायता समूह के जरिए हर्बल रंग इस्तेमाल करने के लिए जागरूक कर रही हैं। उनके समूह में सात महिलाएं हैं। संवाद
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