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रिपोर्ट आने से पहले ही संदिग्ध संक्रमितों को भेज दिया घर
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Corona
- फोटो : Twitter
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शेल्टर होम के गार्ड के मुताबिक गुरुवार की सुबह बिना वजह बताए सभी को भेज दिया गया घर
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बरेली। प्रवासियों की वापसी से बढ़ रहे कोरोना के मामले पर विराम लगाने के लिए शासन लगातार कड़ाई से क्वारंटीन नियमों का पालन कराने को कह रहा है मगर हकीकत इसके उलट है। गुरुवार को एक शेल्टर होम में उन प्रवासियों को घर भेज दिया गया, जिनके सैंपल लिए गए थे। सवाल उठता है कि इनमें से अगर कोई पॉजिटिव आ गया तो क्या होगा।
गुरुवार को अमर उजाला की टीम ने हरुनगला शेल्टर होम, जिला अस्पताल और क्वारंटीन सेंटर बने तीन सौ बेड अस्पताल में व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान अस्पताल में सफाईकर्मी सफाई कार्य में जुटे थे। इसके बाद टीम दोपहर करीब साढ़े तीन बजे हरुनगला शेल्टर होम पहुंची तो वहां पर क्वारंटीन किए हुए तमाम लोग घर भेजे जाने की जानकारी मिली। शेल्टर होम के अंदर मौजूद गार्ड ने बताया कि सुबह ही सभी लोगों को घर भेज दिया गया है। कहा, सभी के सैंपल स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लिए थे। हालांकि, वह रिपोर्ट आने की जानकारी नहीं दे सका। बता दें कि प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम शेल्टर होम में क्वारंटीन किए हुए प्रवासियों के सैंपल ले रही है। प्रशासन से प्रवासियों की आने की सूचना के बाद मेडिकल मोबाइल यूनिट ने बुधवार को शेल्टर होम में क्वारंटीन 18 लोगों के सैंपल लिए थे।
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गुरुवार को अमर उजाला की टीम ने हरुनगला शेल्टर होम, जिला अस्पताल और क्वारंटीन सेंटर बने तीन सौ बेड अस्पताल में व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान अस्पताल में सफाईकर्मी सफाई कार्य में जुटे थे। इसके बाद टीम दोपहर करीब साढ़े तीन बजे हरुनगला शेल्टर होम पहुंची तो वहां पर क्वारंटीन किए हुए तमाम लोग घर भेजे जाने की जानकारी मिली। शेल्टर होम के अंदर मौजूद गार्ड ने बताया कि सुबह ही सभी लोगों को घर भेज दिया गया है। कहा, सभी के सैंपल स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लिए थे। हालांकि, वह रिपोर्ट आने की जानकारी नहीं दे सका। बता दें कि प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम शेल्टर होम में क्वारंटीन किए हुए प्रवासियों के सैंपल ले रही है। प्रशासन से प्रवासियों की आने की सूचना के बाद मेडिकल मोबाइल यूनिट ने बुधवार को शेल्टर होम में क्वारंटीन 18 लोगों के सैंपल लिए थे।
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अनदेखी बन सकती है संक्रमण की वजह
शासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रवासियों की निगरानी के बाबत अफसरों को अलर्ट कर रहा है। बावजूद इसके सैंपलिंग के बाद भी संदिग्ध संक्रमितों केे घर भेजे जाने से प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। नियमानुसार प्रवासी हो या कोई ऐसा व्यक्ति जिसमें कोरोना के लक्षण हो उनकी सैंपलिंग के बाद उन्हें क्वारंटीन सेंटर से घर भेजे जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। पूर्व में कई ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं जब प्रवासियों के सैंपल लेकर उन्हेें घर भेज दिया गया और फिर रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर हायतौबा मची। इसके बाद भी बगैर रिपोर्ट का इंतजार किए घर भेजनेे पर लोगों ने प्रशासन की मुस्तैदी पर सावल उठाए हैं। ये अनदेखी तमाम लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
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जिला अस्पताल में बगैर मास्क पहुंच रहे तीमारदार
टीम शाम करीब चार बजे जिला अस्पताल पहुंची। वहां पर साफ सफाई की व्यवस्था बेहतर दिखी लेकिन इमरजेंसी में भर्ती हो रहे मरीज या उनके तीमारदार कोई भी मास्क लगाए हुए नहीं दिखा। जिससे संक्रमण रोकने की जिम्मेदारी संभाल रहे अफसरों पर भी सवालिया निशान लग रहा है। यहां फरीदपुर सीएचसी से रेफर एक महिला मरीज परिजनों के साथ पहुंची थी। किसी ने भी मास्क नहीं लगाया था और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ही कर रहे थे। उन्होंने अस्पताल की ओर से भी मास्क, सैनिटाइजर न मिलने की बात कही। मामले पर सीएमएस डॉ. टीएस आर्या से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन लगातार मरीज और तीमारदारों को संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूक कर रहा है। समझाने पर लोग नोंकझोंक करते हैं।‘एमएमयू की टीम ने हरुनगला शेल्टर होम में बुधवार को सैंपल लिए थे। जिन्हें जांच के लिए गुरुवार की सुबह आईवीआरआई भेजा गया। शेल्टर होम में लोग क्वेारंटीन हैं या उन्हें घर भेज दिया गया इस मामले की जानकारी मुझे नहीं है।’ - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ