{"_id":"6493665c8f6b2cbebe095c55","slug":"survey-even-condition-like-flood-could-not-quench-the-thirst-of-the-earth-bareilly-news-c-4-bly1005-188626-2023-06-22","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सर्वे: बरेली मंडल में बाढ़ जैसे हालात बने, फिर भी नहीं बुझा सके धरा की प्यास, भूगर्भ जलस्तर गिरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सर्वे: बरेली मंडल में बाढ़ जैसे हालात बने, फिर भी नहीं बुझा सके धरा की प्यास, भूगर्भ जलस्तर गिरा
Thu, 22 Jun 2023 01:28 PM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jun 2023 01:28 PM IST
सार
बरेली मंडल के तीन जिलों के ज्यादातर ब्लॉकों में जलस्तर सुधरने के बजाय और नीचे जाने की पुष्टि हुई। भूगर्भ जल विभाग अब भूजल दोहन पर अंकुश लगाने की तैयारी में है।
विज्ञापन
भूगर्भ जलस्तर में गिरावट (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बरेली मंडल में पिछले दो साल में बेमौसम बारिश से बाढ़ जैसे हालात बने। उम्मीद थी कि साल दर साल रसातल की ओर बढ़ रहा भूमिगत जलस्तर झमाझम बारिश से थमेगा पर प्री-मानसून की रिपोर्ट ने संभावनाओं पर पानी फेर दिया। मंडल के तीन जिलों के ज्यादातर ब्लॉकों में जलस्तर सुधरने के बजाय और नीचे जाने की पुष्टि हुई। भूगर्भ जल विभाग अब भूजल दोहन पर अंकुश लगाने की तैयारी में है।
2022 के बाद जनवरी, फरवरी और मार्च 2023 में भी बेमौसम बारिश से गेहूं समेत अन्य फसलें बर्बाद हुई थीं। ऐसे में भूगर्भ जल विभाग को उम्मीद थी कि गिरते भू-जलस्तर में सुधार होगा। सीनियर हाइड्रोलॉजिस्ट अतुल कुमार के मुताबिक चार साल पहले जो हालात थे, उसमें बदलाव हुआ है। कई इलाके जो डार्क जोन की ओर बढ़ रहे थे, वे अब सेमी क्रिटिकल में दर्ज होने लगे हैं। मगर इस साल तैयार प्री-मानसून की रिपोर्ट के मुताबिक फिर कई इलाकों में भू-जलस्तर रसातल की ओर जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
2022 के बाद जनवरी, फरवरी और मार्च 2023 में भी बेमौसम बारिश से गेहूं समेत अन्य फसलें बर्बाद हुई थीं। ऐसे में भूगर्भ जल विभाग को उम्मीद थी कि गिरते भू-जलस्तर में सुधार होगा। सीनियर हाइड्रोलॉजिस्ट अतुल कुमार के मुताबिक चार साल पहले जो हालात थे, उसमें बदलाव हुआ है। कई इलाके जो डार्क जोन की ओर बढ़ रहे थे, वे अब सेमी क्रिटिकल में दर्ज होने लगे हैं। मगर इस साल तैयार प्री-मानसून की रिपोर्ट के मुताबिक फिर कई इलाकों में भू-जलस्तर रसातल की ओर जा रहा है।
विज्ञापन
कागजों में बुझ रही धरा की प्यास
ग्राउंड वाटर रिचार्ज के लिए शासन की ओर से साल दर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अमृत सरोवर व खेत तालाब योजना से किसानों को जल संचय के प्रति प्रेरित करने, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के दावे तो किए जाते हैं पर गिरता जलस्तर इन दावों की पोल खोल रहा है। बताते हैं कि अगर बारिश का पानी संचय होता तो जलस्तर सुधरता।
विज्ञापन
बरेली के 15 में से 13 ब्लॉकों में गिरा जलस्तर
बिथरी चैनपुर में भू-जलस्तर 4.68 मीटर से बढ़कर 5.84, क्यारा में 4.22 से 4.99, भुता में 3.88 से 5.15, फतेहगंज पश्चिमी में 5.53 से 6.06, फरीदपुर में 8.33 से 9.43, आलमपुर जाफराबाद में 12.12 से 14.33, नवाबगंज में 3.36 से 4.10, भदपुरा में 4.64 से 5.05, भोजीपुरा में 3.28 से 5.52, मझगवां 8.03 से 9.70, मीरगंज में 5.98 से 7.0, शेरगढ़ में 5.06 से 6.04 मीटर जा पहुंचा है। जलस्तर पांच मीटर या इससे कम सामान्य, छह से 10 मीटर तक जलस्तर सतर्कता, 11 से 17 मीटर सेमी क्रिटिकल, 18 से 25 क्रिटिकल, इसके पार डार्क जोन माना जाता है।