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रबर फैक्टरी में वन्य जीवों के लिए उपयुक्त वातावरण

Sat, 27 Jun 2020 01:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jun 2020 01:41 AM IST
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Suitable environment for wildlife in rubber factory
demo pics - फोटो : demo pics

बाघिन को रेस्क्यू करने आए विशेषज्ञों ने कहा- जानवरों की जरूरत के मुताबिक यहां सबकुछ

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बरेली। जंगल में तब्दील हो चुकी रबर फैक्टरी जंगली जानवरों के प्राकृतिक वास के लिए उपयुक्त है, यह दावा अब बाघिन को रेस्क्यू करने पहुंचे विशेषज्ञों ने भी किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक यहां पानी के स्रोत, नर्म घास और छिपने की जगह के साथ वह सबकुछ है जिसकी जरूरत वन्य प्राणियों को होती है। बाघ और तेंदुओं जैसे जीवों को भी इसीलिए यह जगह रास आ रही है। हालांकि फैक्टरी का क्षेत्रफल इतना पर्याप्त नहीं है कि यहां एक से ज्यादा बाघ ठिकाना बना सके।
तमाम वन्य जीवों को रेस्क्यू कर चुके कानपुर चिड़ियाघर के डॉ. आरके सिंह और बाघिन को रेस्क्यू करने के लिए आए कई और विशेषज्ञ पिछले दो दिनों में रबर फैक्टरी का चप्पा-चप्पा छान चुके हैं। डॉ. सिंह के मुताबिक इस दौरान यहां मौजूद विशेषज्ञों की कई बार फैक्टरी के वातावरण के संबंध में चर्चा हो चुकी है। लगभग सभी का आकलन है कि यह फैक्टरी वन्य जीवों के संरक्षण के लिए बेहतर जगह हो सकती है। हालांकि यहां बाघों को नहीं रखा जा सकता क्योंकि फैक्टरी का जितना एरिया है, वह सिर्फ एक बाघ के लिए ही पर्याप्त हो पाएगा। बाघों की संख्या बढ़ते ही उनमें संघर्ष शुरू हो जाएगा। ऐसे में बाघ यहां से आबादी की ओर भी निकल सकते हैं। हालांकि एक बाघ के साथ तृणभोजी और सरीसृप प्रजाति के जीव-जंतु और पक्षियों के इस फैक्टरी का जंगल आरक्षित किया जा है।
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जंगल सफारी के लिए फैक्टरी अभी विकसित नहीं

फैक्टरी को जंगल सफारी बनाने के सवाल पर डॉ. आरके सिंह ने कहा कि फैक्टरी में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए उपयुक्त माहौल है मगर जंगल सफारी या सेंक्चुरी बनाने के लिए जो गाइडलाइन होती है, उसके हिसाब से रबर फैक्टरी विकसित नहीं है। इसके लिए व्यापक स्तर पर जन जागरुकता की जरूरत पड़ेगी, साथ ही प्रशासन के साथ दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति भी जरूरी है। बजट के साथ जमीन पर आगे कोई विवाद न खड़ा हो, इसका भी ध्यान रखना पड़ेगा।
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किशनपुर सेंक्चुरी से पीलीभीत होते हुए बरेली पहुंची बाघिन

रबर फैक्टरी तक बाघिन कहां से पहुंची, यह सवाल चार महीनों से उठ रहा है। बाघिन के रेस्क्यू के लिए यहां पहुंचे विशेषज्ञों ने यह पता लगाने के लिए आसपास की सेंक्चुरी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व में मौजूद प्रजतियों से मिलान करने के बाद बताया कि बाघिन किशनपुर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी से आई है जो किन्हीं परिस्थितियों में वहां से बाहर निकली और पीलीभीत होते हुए रबर फैक्टरी तक पहुंच गई। इतनी लंबी दूरी तय कर बाघिन फैक्टरी तक कैसे पहुंची, इस सवाल पर विशेषज्ञों का कहना है कि वह किसी ऐसी नदी या नहर के किनारे-किनारे चलकर यहां पहुंची होगी जो किशनपुर से पीलीभीत होते हुए बरेली तक आती हो। यही बाघिन कुछ समय पहले पीलीभीत में भी ट्रेस हुई थी।

बाघिन को रेस्क्यू करने की तैयारी पूरी है लेकिन अब तक वह इसके लिए बनाए गए दायरे में नहीं आई है। बाघिन के इस दायरे में आते ही वहां लगे कैमरे से कनेक्ट अलार्म बज जाएग जिसके बाद टीम रेस्क्यू शुरू करेगी। इसमें एक या दो दिन लग सकते हैं। - ललित वर्मा, मुख्य वन संरक्षक

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