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Bareilly News: गन्ना शोध परिषद की को.शा 17231 प्रजाति दूसरे प्रदेशों में भी उगाई जाएगी
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सन 2022 में गन्ना शोध संस्थान ने विकसित की थी प्रजाति
शाहजहांपुर। गन्ना शोध परिषद की ओर से विकसित गन्ने की प्रजाति को अब दूसरे राज्यों में भी उगाया जा सकेगा। इसे केंद्रीय स्वीकृति मिल गई है।
गन्ना शोध परिषद में गन्ना किस्म को.शा. 17231 को वर्ष 2022 में विकसित किया गया। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से संचालित अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना के तहत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुल 25 फसलों की कुल 184 नवीन किस्मों को स्वीकृति प्रदान की है। इसमें गन्ना फसल में गन्ना शोध परिषद की किस्म को.शा. 17231 को उत्तर प्रदेश के अलावा अब हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड एवं राजस्थान के किसानों के लिए भी स्वीकृति दी गई है।
इस किस्म का उपनाम बिस्मिल काकोरी एक्शन के नायक अमर शहीद पं. राम प्रसाद बिस्मिल के सम्मान में रखा गया है। निदेशक वीके शुक्ल ने बताया कि अब तक यह किस्म केवल उत्तर प्रदेश में ही खेती के लिए स्वीकृत थी, लेकिन केंद्रीय स्वीकृति पर अन्य प्रदेशों में उगाई जाएगी।
इस किस्म के ब्रीडर डाॅ. अरविंद कुमार ने बताया कि यह किस्म लाल सड़न रोग की प्रतिरोधी है। इस किस्म की औसत उत्पादन क्षमता 86.35 टन प्रति हेक्टेयर और चीनी परता (पोलः इन केन) 13.97 प्रतिशत पाई गई है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. अजय तिवारी ने बताया कि यह किस्म किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। प्रसार अधिकारी डाॅ. संजीव पाठक ने संस्थान की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए निदेशक एवं पूरी टीम को बधाई दी। संवाद
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शाहजहांपुर। गन्ना शोध परिषद की ओर से विकसित गन्ने की प्रजाति को अब दूसरे राज्यों में भी उगाया जा सकेगा। इसे केंद्रीय स्वीकृति मिल गई है।
गन्ना शोध परिषद में गन्ना किस्म को.शा. 17231 को वर्ष 2022 में विकसित किया गया। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से संचालित अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना के तहत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुल 25 फसलों की कुल 184 नवीन किस्मों को स्वीकृति प्रदान की है। इसमें गन्ना फसल में गन्ना शोध परिषद की किस्म को.शा. 17231 को उत्तर प्रदेश के अलावा अब हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड एवं राजस्थान के किसानों के लिए भी स्वीकृति दी गई है।
इस किस्म का उपनाम बिस्मिल काकोरी एक्शन के नायक अमर शहीद पं. राम प्रसाद बिस्मिल के सम्मान में रखा गया है। निदेशक वीके शुक्ल ने बताया कि अब तक यह किस्म केवल उत्तर प्रदेश में ही खेती के लिए स्वीकृत थी, लेकिन केंद्रीय स्वीकृति पर अन्य प्रदेशों में उगाई जाएगी।
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इस किस्म के ब्रीडर डाॅ. अरविंद कुमार ने बताया कि यह किस्म लाल सड़न रोग की प्रतिरोधी है। इस किस्म की औसत उत्पादन क्षमता 86.35 टन प्रति हेक्टेयर और चीनी परता (पोलः इन केन) 13.97 प्रतिशत पाई गई है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. अजय तिवारी ने बताया कि यह किस्म किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। प्रसार अधिकारी डाॅ. संजीव पाठक ने संस्थान की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए निदेशक एवं पूरी टीम को बधाई दी। संवाद
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