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चीनी मिलें होंगी मालामाल, गन्ना किसान रहेंगे फटेहाल

Sun, 08 Dec 2019 09:37 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 08 Dec 2019 09:37 PM IST
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sugar cane
शाहजहांपुर। खेती में लागत बढ़ने और मिलों को चीनी परता गत वर्ष की तुलना में ज्यादा मिलने के बावजूद प्रदेश सरकार ने गन्ने के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी नहीं की। इससे गन्ना किसानों में जबरदस्त आक्रोश है। उन्होंने सरकार के फैसले को सरासर गलत बताया। उनका कहना है कि सरकार के इस फैसले से चीनी मिलें तो मालामाल होंगी मगर किसान हमेशा की तरह फटेहाल रहेंगे। उधर, सरकार के फैसले के खिलाफ जिले के किसान नेताओं ने आंदोलन का मन बना लिया है।
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इस वर्ष 1.51 लाख किसानों ने सिर्फ 98322 हेक्टेयर में गन्ना की फसल बोई है। यह रकबा गत वर्ष की तुलना में करीब दस फीसदी कम है क्योंकि चीनी मिलों से भुगतान की लचर व्यवस्था को देखते हुए किसान पहले से गन्ना खेती को घाटे का सौदा मान रहे थे। इस बार मौसम गन्ना के अनुकूल रहने पर मिलों मेें चीनी परता बढ़ने से माना जा रहा था कि इसका लाभ किसी न किसी रूप में सरकार किसानों को जरूर देगी। गंगानगर (कांट) के उन्नतशील किसान कौशल मिश्रा ने गत 22 नवंबर को लखनऊ के गन्ना भवन में हुई राज्य गन्ना मूल्य परामर्शित समिति की बैठक में गत तीन वर्ष से स्थिर गन्ना समर्थन मूल्य बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने मांग प्रमुखता से उठाई थी।
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यही नहीं, बीती 27 नवंबर को नई दिल्ली में हुई नीति आयोग की बैठक में भी कौशल मिश्रा ने मंडल के किसानों का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा था कि चीनी की बढ़ी हुई रिकवरी का लाभ किसानों को गन्ना का समर्थन मूल्य बढ़ाकर दिया जाना चाहिए। मुख्य सचिव और नीति योग के उपाध्यक्ष ने उन्हें आश्वस्त भी किया था कि किसानों के हित में जल्द उचित निर्णय किया जाएगा, लेकिन प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव (गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग) संजय आर भूसरेड्डी ने वर्तमान पेराई सत्र 2019-20 के लिए गन्ना के समर्थन मूल्य की पुरानी दरें लागू करने का शासनादेश जारी कर किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
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पुवायां में आज सड़क पर उतरेंगे गन्ना किसान
शाहजहांपुर। किसानों ने गन्ना का समर्थन मूल्य नहीं बढ़ाए जाने पर सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह सरकार के फैसलेे पर बेहद खफा हैं। बोले: खेती से आय दोगुनी करने का झांसा देने वाली सरकारों ने किसानों की मिट्टी पलीद कर दी है। खाद, बीज, कीटनाशकों आदि सभी चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन गन्ना सस्ते मेें खरीदकर मिलों की झोली भरी जा रही है। क्रेशर वाले 150 रुपये के भाव गन्ना खरीदकर चीनी पूरे रेट पर बेच रहे। अगली रणनीति के बारे मेें पूछने पर भाकियू नेता मंजीत सिंह ने कहा कि सोमवार को पुवायां में तहसील के किसान सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे और अगले चरण में 21 दिसंबर को जिला मुख्यालय पर विभिन्न तहसीलों के किसान सामूहिक प्रदर्शन करेंगे।
गन्ना की बुवाई और सिंचाई पर लागत बढ़ गई है। लग रहा था कि इस बार गन्ना रेट बढ़कर मिलेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं हुआ। मजबूरी में अब अन्य फसलों की खेती करनी पड़ेगी।
- राहुल गंगवार, कसरक (तिलहर)
किसानों की आय दोगुनी करने की बात करने वाली प्रदेश सरकार की करनी उसकी कथनी के विपरीत साबित हुई। सरकार को किसानों से ज्यादा चीनी मिलों की फिक्र है और इसलिए रेट नहीं बढ़ाए।
-रामपाल, नगरिया (तिलहर)
केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारें सिर्फ बातें बनाना जानती हैं, किसानों की उन्हेें कोई परवाह नहीं। भाजपा के राज में किसानों की सबसे ज्यादा बेकद्री हो रही है और सत्ता में बैठे लोगों को चुनाव में इसके नतीजे भुगतने होंगे।

-अजीत सिंह, मंडल अध्यक्ष, भाकियू
हर फसल पर खाद, बीज, बिजली, ट्रैक्टर आदि कृषि यंत्रों के रेट बढ़ रहे हैं। सरकार किसानों को बताए कि चीनी रिकवरी से मिलों को हो रहे लाभ का पैसा कहां जा रहा है और गन्ना रेट नहीं बढ़ाने का कारण क्या है।
- कौशल मिश्रा, गंगानगर (कांट)
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