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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Students viewed the film Vinod Kapdi

विद्यार्थियों ने देखी विनोद कापड़ी की फिल्म

Sun, 31 Jan 2016 01:38 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sun, 31 Jan 2016 01:38 AM IST
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बरेली। बरेली कॉलेज में पर्यावरण विज्ञान विभाग की ओर से विनोद कापड़ी की डॉक्युमेंट्री फिल्म की कॉलेज सभागार में स्क्रीनिंग की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय के अभाव पर बनी फिल्म ‘कांट टेक दिस शिट एनीमोर’ को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।
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कुशीनगर के गांव पर फिल्म में दिखा गया है कि शौचालय न होने पर छह नई बहू पिता के घर लौट जाती है। इस मुद्दे पर गांव की ही 20 वर्षीय असमा ने आंदोलन चलाया। इसके बाद सरकार की ओर से इनके घरों में शौचालय बनवाया गया और बहुएं अपनी ससुराल वापस लौट सकीं। फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद निर्देशक विनोद कापड़ी ने विद्यार्थियों से बातचीत भी की। विद्यार्थियों ने उनसे पूछा कि पत्रकारिता और फिल्म मेकिंग में अंतर क्या है? इस पर उन्होंने विस्तृत रूप से अपनी राय जाहिर की। छात्रा अनीता बिष्ट ने पूछा कि फिल्म में दिखा गया है कि असमा के आंदोलन के बाद छह परिवारों में शौचालय बन गए, लेकिन वास्तविकता में गांव में आंदोलन का कितना असर हुआ? इस जवाब देते हुए विनोद कापड़ी ने कहा कि जब यह फिल्म बनी थी, तब गांव में सिर्फ 150 घरों में शौचालय थे, लेकिन अब 850 घरों में शौचालय है। इससे पता चलता है कि ऐसे विषयों पर होने वाले आंदोलन का बड़ा असर पड़ता है। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ. आरबी सिंह ने विनोद कापड़ी को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। मंच संचालन डॉ. एसी त्रिपाठी ने किया और विभागाध्यक्ष डॉ. एपी सिंह ने आभार व्यक्त किया। इसमें बरेली कॉलेज के साथ ही केसीएमटी और उत्कर्ष कॉलेज के विद्यार्थियों ने फिल्म की स्क्रीनिंग देखी। फिल्म देखने के लिए बरेली कॉलेज सभागार विद्यार्थियों से खचाखच भरा हुआ था।
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बरेली कॉलेज से जुड़े अनुभव भी साझा किए
बरेली। फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी बरेली कॉलेज के छात्र रहे हैं। उन्हें जब अपने ही कॉलेज में अपनी फिल्म दिखाने का मौका मिला तो काफी गौरवांवित महसूस हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को कॉलेज से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि उस समय पर देश-प्रदेश में आर्थिक मुद्दों पर कोई पत्रिका नहीं निकलती थी। इसलिए उन्होंने इस पर पत्रिका निकालने की योजना बनाई, लेकिन संसाधनों की कमी होने के कारण इसमें समस्या आ रही थी। इसमें उन्हेें ज्ञान प्रेस ने काफी सहयोग किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई अच्छी पहल करना चाहे तो उसे मदद करने वाले बहुत से लोग मिल जाते हैं।
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