पर्यटन दिवस: पांचाल नगरी... सैलानियों को लुभा रही अध्यात्म और विरासत, यहां है भगवान पार्श्वनाथ की तपोस्थली
बरेली क्षेत्र प्राचीनकाल में पांचाल राज्य का हिस्सा था। जिले के रामनगर में महाभारतकालीन पांचाल नगरी और राजा द्रुपद के किले के अवशेष हैं। इसके अलावा बरेली धार्मिक और संस्कृति रूप से काफी समृद्धि है। शहर में सप्तनाथ मंदिर हैं। रामनगर में जैन समाज के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की तपोस्थली भी है।
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विस्तार
पांचाल नगरी की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और विभिन्न धर्मों से जुड़ी अध्यात्म की थाती सैलानियों को लुभा रही है। यही कारण है कि साल दर साल पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वर्ष 2023 में बरेली जिले में 81 लाख से ज्यादा सैलानी आए। इस साल यह संख्या एक करोड़ के पार पहुंच सकती है। बगल के जिले पीलीभीत में टाइगर रिजर्व होने के बावजूद वहां पर्यटकों की संख्या बरेली के सापेक्ष एक तिहाई ही है।
नाथ नगरी के नाम से पहचान रखने वाले शहर में सावन में भक्तों का तांता लगा रहता है। नाथ कॉरिडोर का निर्माण पूरा हो जाने पर यहां धार्मिक पर्यटन को और विस्तार मिलेगा। यह सुन्नी बरेलवी मुसलमानों का प्रमुख केंद्र है। आला हजरत दरगाह पर प्रतिवर्ष लाखों मुसलमान हाजिरी देने आते हैं। भगवान पार्श्वनाथ की तपोस्थली रामनगर में जैन धर्मावलंबियों का तांता लगा रहता है।
अहिच्छत्र का किला और रामनगर स्थित जैन मंदिर
रामनगर में जैन समाज के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की तपोस्थली है। यहां बने श्वेतांबर व दिगंबर मंदिर जैन धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र हैं। यहां से दो किमी दूर महाभारतकालीन पांचाल नगरी और राजा द्रुपद के किले के अवशेष हैं। रामनगर से पांच किलोमीटर की दूरी पर गुलड़िया में गौरी शंकर मंदिर भी लोक आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहीं से कुछ दूरी पर ही महाभारतकालीन लीलौर झील (यक्ष सरोवर) भी है।
सप्त नाथ मंदिर
यहां नाथ संप्रदाय से जुड़े सात शिव मंदिर आकर्षण का केंद्र हैं। त्रिवटीनाथ मंदिर महाभारतकालीन है। धोपेश्वरनाथ मंदिर पर देश के विभिन्न हिस्सों के लोग आते हैं। त्रिवटीनाथ, धोपेश्वरनाथ, अलखनाथ, मणिनाथ, पशुपतिनाथ, वनखंडीनाथ व तपेश्वरनाथ मंदिरों को जोड़कर नाथ कॉरिडोर बन रहा है। मंदिर परिसर में 75 करोड़ रुपये की लागत से पर्यटन सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है।
दरगाह आला हजरत
आला हजरत के नाम से विख्यात इमाम अहमद रजा खां ने बरेली के सौदागरान मोहल्ले में दारुल उलूम मंजर-ए-इस्लाम की स्थापना की थी। देश-विदेश के लोग दीनी तालीम के लिए यहां आते हैं। यहीं खानकाह-ए-रजविया के नाम से विख्यात इमाम अहमद रजा खां की मजार है। इस्लामिक कैलेंडर के सफर मास की 23, 24, 25 तारीख को यहां उर्स होता है।
खानकाह नियाजिया
विख्यात सूफी संत हजरत शाह नियाज अहमद साहब का जन्म सरहिंद में हुआ था। बरेली के कुतुबखाना में उन्होंने अपनी रिहाइश बनाई और सिलसिला-ए-नियाजिया चल पड़ा। इसी स्थान पर सफेद संगमरमर से बनी खानकाह है। यहां देश- विदेश के अकीदतमंद आते हैं। यहां भी सालाना जलसे में बड़ी तादाद में लोग आते हैं।
ये हैं प्रमुख चुनौतियां
रामनगर के किले तक जाने वाले मार्ग का 900 मीटर हिस्सा खराब था। इसमें 450 मीटर हिस्से पर ईंटों का खड़ंजा बना दिया गया, लेकिन बाकी हिस्सा ऊबड़ खाबड़ है और किले तक पहुंच पाना आसान नहीं है। बारिश के दिनों में तो आवागमन ठप ही हो जाता है। दिनभर में सौ पर्यटक भी नहीं पहुंच पाते। जो लोग आते हैं, वे जैन मंदिर से ही लौट जाते हैं। बरेली से रामनगर के जैन मंदिर तक के लिए सिटी बस सर्विस नहीं है। सिर्फ आंवला तक बस जाती है। उसके बाद निजी साधन या डग्गामार बसों का ही सहारा है। बरेली से पीलीभीत टाइगर रिजर्व तक का मार्ग फोरलेन नहीं है।
अगर बरेली से टाइम टेबल बनाकर वातानुकूलित मिनी बसें चलाई जाएं तो जैन तीर्थ रामनगर और अहिच्छत्र किले तक पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। रामनगर किले तक के मार्ग के अधूरे हिस्से को पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग बनवाए। बरेली से जम्मू, जयपुर और दिल्ली के लिए नियमित तौर पर हवाई सेवाएं मिलें।
चूका बीच और पीलीभीत टाइगर रिजर्व
पीलीभीत टाइगर रिजर्व और चूका बीच सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। शारदा नदी पर बने चूका बीच और पीटीआर में 15 नवंबर से 15 जून तक घूम सकते हैं। यह स्थान दिल्ली से 350 और बरेली से 70 किलोमीटर दूर है। बीच के किनारे ठहरने के लिए वाटर, ट्री और बंबू हट पर बनी हैं, जिसे ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। इसी क्षेत्र में पौराणिक महत्व का गोमती उद्गम स्थल है।