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जुलाई में कहर ढाने के बाद थमी कोरोना की रफ्तार मगर खतरा अब भी बरकरार
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कोरोना वायरसः जांच के नमूने लेती टीम
- फोटो : अमर उजाला
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स्वास्थ्य विभाग ने शासन को भेजी मार्च से सितंबर तक के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट
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अफसरों में राहत का माहौल, चिकित्सकों ने कहा- अलर्ट न रहे तो फिर बिगड़ेंगे हालात
बरेली। धीमी गति से ही सही लेकिन कोरोना संक्रमण फैलने की दर जिले में अब कम हो रही है। हाल ही में शासन को भेजी गई मार्च से सितंबर तक की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में कोरोना का जिले में पीक था। इस महीने में संक्रमण करीब नौ फीसदी की दर से फैला लेकिन इसके बाद अगस्त और फिर सितंबर में भी यह दर कम हुई है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों में इस रिपोर्ट के बाद कुछ हद तक राहत का माहौल है लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि कोविड प्रोटोकॉल के पालन में लापरवाही हुई तो स्थिति फिर बिगड़ सकती है।
शासन को भेजी गई पिछले सात महीनों की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई बरेली के लिए काफी घातक रहा। इस महीने में कोरोना संक्रमण की दर प्रतिदिन 8.84 प्रतिशत तक रही। इस महीने में सर्वाधिक 1927 संक्रमित मिलने के साथ 55 संक्रमितों की मौत भी हुई। कोरोना की इस आक्रामकता से शासन तक खलबली मच गई थी। 20 जुलाई के बाद शासन ने संक्रमण पर काबू करने के लिए विशेष चिकित्सा दल का गठन कर उसे बरेली भेजा था। सात दिनों तक इस टीम के बरेली में रहने के बाद सचिव स्तर के दो अफसरों को भी जांच के लिए भेजा गया। हालांकि इसके बाद भी हालात काबू में नहीं आए।
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अगस्त के पहले हफ्ते में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेली का दौरा किया और कोरोना पर काबू न कर पाने पर अफसरों को चेतावनी दी थी। पेच कसे जाने के बाद सैंपलिंग बढ़ी, संक्रमितों को आइसोलेट किया गया। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग भी बढ़ी और करीब डेढ़ महीने बाद कोरोना के मामले घटने लगे।
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अगस्त में छह फीसद पर ठहरी संक्रमण की दर
रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में सर्वाधिक मामले सामने आने के बाद अगस्त में भी इसका असर दिखाई दिया था। दरसल, संक्रमित और उनके संपर्क में आने वालों में करीब पांच से दस दिन बाद लक्षण उभरते हैं। तब तक वह अन्य लोगों को संक्रमित कर देते हैं। इसी वजह से अगस्त में कोरोना के 4325 मामले सामने आए। 28 संक्रमितों की मौत हुई। कोरोना के प्रतिदिन 5.9 फीसद की दर से संक्रमित मिले।
सावधान न रहे तो फिर बिगड़ सकते हैं हालात
माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक 17 जुलाई के बाद तेजी से संक्रमण और मौतों का ग्राफ बढ़ा था। जो 20 अगस्त तक जारी रहा। ऐसे में कोरोना के पीक पर पहुंचने की आशंका थी। मगर, संक्रमण के मामलों में क्रमिक 15 से 20 दिनों तक स्थिरता न होने पर उसे पीक नहीं माना जा सका। पीक संबंधी स्पष्ट कोई व्याख्या नहीं है। अब मामले घट रहे हैं लेकिन लोगों को बचाव के प्रयास करने चाहिए।
बढ़ती-घटती कोरोना की रफ्तार
माह सैंपल केस मौत
- मार्च 36 0 0
- अप्रैल 596 10 0
- मई 1724 36 2
- जून 4739 208 10
- जुलाई 23534 2081 55
- अगस्त 75298 4325 48
- सितंबर 75086 3442 18
सैंपलिंग और जांच बढ़ने से कोरोना के मामले तेजी से ट्रेस हुए। इसी वजह से संक्रमण की दर पर काफी हद तक काबू रहा। प्रशासन के सहयोग से कन्टेनमेंट जोन में भी सारी व्यवस्थाएं की गईं। इसी कारण कोरोना के मामलों में कमी आ रही है और स्वस्थ होने वालों की तादाद बढ़ रही है। - डॉ. आरएन गिरी, प्रभारी सीएमओ
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अफसरों में राहत का माहौल, चिकित्सकों ने कहा- अलर्ट न रहे तो फिर बिगड़ेंगे हालात बरेली। धीमी गति से ही सही लेकिन कोरोना संक्रमण फैलने की दर जिले में अब कम हो रही है। हाल ही में शासन को भेजी गई मार्च से सितंबर तक की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में कोरोना का जिले में पीक था। इस महीने में संक्रमण करीब नौ फीसदी की दर से फैला लेकिन इसके बाद अगस्त और फिर सितंबर में भी यह दर कम हुई है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों में इस रिपोर्ट के बाद कुछ हद तक राहत का माहौल है लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि कोविड प्रोटोकॉल के पालन में लापरवाही हुई तो स्थिति फिर बिगड़ सकती है।
शासन को भेजी गई पिछले सात महीनों की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई बरेली के लिए काफी घातक रहा। इस महीने में कोरोना संक्रमण की दर प्रतिदिन 8.84 प्रतिशत तक रही। इस महीने में सर्वाधिक 1927 संक्रमित मिलने के साथ 55 संक्रमितों की मौत भी हुई। कोरोना की इस आक्रामकता से शासन तक खलबली मच गई थी। 20 जुलाई के बाद शासन ने संक्रमण पर काबू करने के लिए विशेष चिकित्सा दल का गठन कर उसे बरेली भेजा था। सात दिनों तक इस टीम के बरेली में रहने के बाद सचिव स्तर के दो अफसरों को भी जांच के लिए भेजा गया। हालांकि इसके बाद भी हालात काबू में नहीं आए।
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अगस्त के पहले हफ्ते में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेली का दौरा किया और कोरोना पर काबू न कर पाने पर अफसरों को चेतावनी दी थी। पेच कसे जाने के बाद सैंपलिंग बढ़ी, संक्रमितों को आइसोलेट किया गया। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग भी बढ़ी और करीब डेढ़ महीने बाद कोरोना के मामले घटने लगे।
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अगस्त में छह फीसद पर ठहरी संक्रमण की दर
रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में सर्वाधिक मामले सामने आने के बाद अगस्त में भी इसका असर दिखाई दिया था। दरसल, संक्रमित और उनके संपर्क में आने वालों में करीब पांच से दस दिन बाद लक्षण उभरते हैं। तब तक वह अन्य लोगों को संक्रमित कर देते हैं। इसी वजह से अगस्त में कोरोना के 4325 मामले सामने आए। 28 संक्रमितों की मौत हुई। कोरोना के प्रतिदिन 5.9 फीसद की दर से संक्रमित मिले।सावधान न रहे तो फिर बिगड़ सकते हैं हालात
माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक 17 जुलाई के बाद तेजी से संक्रमण और मौतों का ग्राफ बढ़ा था। जो 20 अगस्त तक जारी रहा। ऐसे में कोरोना के पीक पर पहुंचने की आशंका थी। मगर, संक्रमण के मामलों में क्रमिक 15 से 20 दिनों तक स्थिरता न होने पर उसे पीक नहीं माना जा सका। पीक संबंधी स्पष्ट कोई व्याख्या नहीं है। अब मामले घट रहे हैं लेकिन लोगों को बचाव के प्रयास करने चाहिए।बढ़ती-घटती कोरोना की रफ्तार
माह सैंपल केस मौत
- मार्च 36 0 0
- अप्रैल 596 10 0
- मई 1724 36 2
- जून 4739 208 10
- जुलाई 23534 2081 55
- अगस्त 75298 4325 48
- सितंबर 75086 3442 18
सैंपलिंग और जांच बढ़ने से कोरोना के मामले तेजी से ट्रेस हुए। इसी वजह से संक्रमण की दर पर काफी हद तक काबू रहा। प्रशासन के सहयोग से कन्टेनमेंट जोन में भी सारी व्यवस्थाएं की गईं। इसी कारण कोरोना के मामलों में कमी आ रही है और स्वस्थ होने वालों की तादाद बढ़ रही है। - डॉ. आरएन गिरी, प्रभारी सीएमओ