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जिलाध्यक्ष विहीन सपा में तेज हो गई हलचल
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Wed, 14 Sep 2016 12:49 AM IST
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समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं में चल रहे सत्ता संघर्ष से जिलाध्यक्ष विहीन बरेली सपा में भी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटते ही युवा लॉबी को जहां झटका लगा वहीं दूसरा गुट शिवपाल के अध्यक्ष बनने पर जश्न के मूड में आ गया। कुछ लोगों ने तुरंत फेसबुक पर उनका हंसता हुआ फोटो डाल कर खुशी का इजहार किया लेकिन उनके विभाग छिनने और इस्तीफे की घोषणा के बाद सब वेट एंड वाच कहते हुए सन्नाटे में आ गए। रात होते ही कुछ सपा नेताओं ने फोन बंद कर दिए।
पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल सिंह यादव को अचानक पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाने के फैसले से जिलाध्यक्ष विहीन चल रही सपा में गुटबाजी बढ़ने के आसार दिखने लगे हैं। जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव ने कुछ दिन पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था जिसे अभी स्वीकार नहीं किया गया है। वीरपाल गुट के लोगों को जहां शिवपाल से उम्मीदें हैं वहीं यह भी सच है कि वीरपाल असहज भी शिवपाल के एक फैसले की वजह से ही हुए हैं। बदले समीकरणों में ये गुट मान रहा है कि वीरपाल को फिर से ठीक से नवाजा जा सकता है। संगठन अब बजरिए बदायूं की बजाए सीधे लखनऊ से चलेगा।
संगठन में वीरपाल विरोधी गुट ने इस बीच मुख्यमंत्री से करीबी बना ली थी और स्वयं और यहां तैनात रहे अफसरों की मदद से मुख्यमंत्री तक उनके बारे में कई ऐसी जानकारियां पहुंचाई जिससे अखिलेश उनसे बहुत खुश नहीं थे और वीरपाल पर अध्यक्षी छोड़ने के लिए परोक्ष दबाव बन रहा था। इस्तीफे की घोषणा कर वीरपाल ने अपना दांव चल दिया तो उन्हें जश्न मनाने का मौका नहीं मिल पाया। बहरहाल इस गुट का मानना है कि प्रत्यक्षत: पिता- पुत्र की जंग लग रही इस सियासत में आखिर पिता अपने पुत्र के संग ही होंगे। अखिलेश का चेहरा और निखरेगा। वहीं दूसरा गुट इसे मुलायम की मजबूरी बता कर शिवपाल के अध्यक्ष बनने पर जश्न मनाने की तैयारी करने लगा था लेकिन कुछ नेताओं ने उन्हें रोक लिया। बहरहाल ये लोग शिवपाल के निवास से खबरें जुटाते रहे। अब सबकी नजर बुधवार को सीएम और शिवपाल की राज्यपाल से मुलाकात पर टिकी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ऊंट किसी भी करवट बैठे बरेली में संगठन में बड़ा बदलाव होना ही है।
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पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल सिंह यादव को अचानक पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाने के फैसले से जिलाध्यक्ष विहीन चल रही सपा में गुटबाजी बढ़ने के आसार दिखने लगे हैं। जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव ने कुछ दिन पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था जिसे अभी स्वीकार नहीं किया गया है। वीरपाल गुट के लोगों को जहां शिवपाल से उम्मीदें हैं वहीं यह भी सच है कि वीरपाल असहज भी शिवपाल के एक फैसले की वजह से ही हुए हैं। बदले समीकरणों में ये गुट मान रहा है कि वीरपाल को फिर से ठीक से नवाजा जा सकता है। संगठन अब बजरिए बदायूं की बजाए सीधे लखनऊ से चलेगा।
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संगठन में वीरपाल विरोधी गुट ने इस बीच मुख्यमंत्री से करीबी बना ली थी और स्वयं और यहां तैनात रहे अफसरों की मदद से मुख्यमंत्री तक उनके बारे में कई ऐसी जानकारियां पहुंचाई जिससे अखिलेश उनसे बहुत खुश नहीं थे और वीरपाल पर अध्यक्षी छोड़ने के लिए परोक्ष दबाव बन रहा था। इस्तीफे की घोषणा कर वीरपाल ने अपना दांव चल दिया तो उन्हें जश्न मनाने का मौका नहीं मिल पाया। बहरहाल इस गुट का मानना है कि प्रत्यक्षत: पिता- पुत्र की जंग लग रही इस सियासत में आखिर पिता अपने पुत्र के संग ही होंगे। अखिलेश का चेहरा और निखरेगा। वहीं दूसरा गुट इसे मुलायम की मजबूरी बता कर शिवपाल के अध्यक्ष बनने पर जश्न मनाने की तैयारी करने लगा था लेकिन कुछ नेताओं ने उन्हें रोक लिया। बहरहाल ये लोग शिवपाल के निवास से खबरें जुटाते रहे। अब सबकी नजर बुधवार को सीएम और शिवपाल की राज्यपाल से मुलाकात पर टिकी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ऊंट किसी भी करवट बैठे बरेली में संगठन में बड़ा बदलाव होना ही है।
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