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समाधान योजना की अनदेखी में चार बिल्डर फंसे
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sun, 19 Jun 2016 12:32 AM IST
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वाणिज्य कर बकाया में शहर के चार बिल्डर फंस गए हैं। वाणिज्य कर विभाग ने इन बिल्डरों के खिलाफ अभियान शुरू किया है। इसके तहत उन्हें शमन स्कीम में शामिल करना है। जोनल एडिशनल कमिश्नर सीके पटेल के निर्देशन में चले अभियान के दौरान छह बिल्डरों के खाते और कागजात आदि चेक किए गए। दो बिल्डराें ने मामला कंपाउंड करा लिया। जबकि चार बिल्डराें के कागजातों की छानबीन हो रही है।
वाणिज्य कर विभाग ने बिल्डरों की बैठक बुलाकर समाधान योजना में शामिल होने का सुझाव दिया था। जोनल एडिशनल कमिश्नर ने बिल्डरों को समाधान स्कीम के फायदे समझाते हुए बिल्डरों से इसमें शामिल होने का अनुरोध किया। मेगा इन्फासिटी प्राइवेट लिमिटेड और क्वालिटी एसोसिएशन ने अधिकारियों के समझाने पर समाधान योजना का प्रार्थना पत्र वाणिज्य कर विभाग के दफ्तर में देकर मामला कंपाउंड करा लिया जबकि कुबेर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, रियल इमेज डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, डीए इंजीनियर्स एंड डेवलपर्स और ट्यूलिप इंफ्रा टॉवर लिमिटेड समाधान योजना में शामिल होने को तैयार नहीं हुए। इस पर इनके अभिलेखों की जांच की गई। रियल इमेज डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड तीन रूम सेट के 32 और दो रूम सेट के 64 फ्लैट्स का 60 से 70 फीसदी निर्माण ही पूरा कर पाए। इनके प्रोजेक्ट की लागत 30 से 35 करोड़ अनुमानित की गई। इनके अभिलेख सीज कर दिए गए। एडिशनल कमिश्नर सीके पटेल ने बताया कि छानबीन में गड़बड़ी मिलने पर बिल्डरों को कंपाउंडिंग स्कीम में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही बिल्डरों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
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वाणिज्य कर विभाग ने बिल्डरों की बैठक बुलाकर समाधान योजना में शामिल होने का सुझाव दिया था। जोनल एडिशनल कमिश्नर ने बिल्डरों को समाधान स्कीम के फायदे समझाते हुए बिल्डरों से इसमें शामिल होने का अनुरोध किया। मेगा इन्फासिटी प्राइवेट लिमिटेड और क्वालिटी एसोसिएशन ने अधिकारियों के समझाने पर समाधान योजना का प्रार्थना पत्र वाणिज्य कर विभाग के दफ्तर में देकर मामला कंपाउंड करा लिया जबकि कुबेर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, रियल इमेज डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, डीए इंजीनियर्स एंड डेवलपर्स और ट्यूलिप इंफ्रा टॉवर लिमिटेड समाधान योजना में शामिल होने को तैयार नहीं हुए। इस पर इनके अभिलेखों की जांच की गई। रियल इमेज डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड तीन रूम सेट के 32 और दो रूम सेट के 64 फ्लैट्स का 60 से 70 फीसदी निर्माण ही पूरा कर पाए। इनके प्रोजेक्ट की लागत 30 से 35 करोड़ अनुमानित की गई। इनके अभिलेख सीज कर दिए गए। एडिशनल कमिश्नर सीके पटेल ने बताया कि छानबीन में गड़बड़ी मिलने पर बिल्डरों को कंपाउंडिंग स्कीम में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही बिल्डरों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
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