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कई भट्ठों की चिमनियां इस साल नहीं उगलेंगी धुआं

Sat, 23 May 2020 02:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 23 May 2020 02:01 AM IST
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Smoke chimneys of many kilns will not smoke this year
सड़कों पर बैठे श्रमिक पैदल ही जा रहे अपने घर - फोटो : पीटीआई

मंदी का हवाला देकर भट्ठा मालिकों ने खनन विभाग को दी कारोबार न करने की सूचना

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बरेली। लॉकडाउन की पाबंदियों में रियायत होने के बाद तमाम उद्योग-कारोबार धीरे-धीरे फिर शुरू होने लगे हैं, लेकिन ईंट उद्योग का कोरोना ने भट्ठा बिठा दिया है। करीब 15 भट्ठा मालिकों ने खनन विभाग को इस साल भट्ठे न चलाने की सूचना दी है। भट्ठों के बंद होने से खनन विभाग को उनसे विनियम शुल्क के तौर पर मिलने वाले लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।
जिले में करीब 318 ईंट-भट्ठे हैं, इनसे खनन विभाग को हर साल करीब 15 करोड़ का राजस्व मिलता है। भट्ठों पर हजारों मजदूर परिवारों को भी काम मिलता है। मार्च में लॉकडाउन शुरू होने के बाद मजदूरों का पलायन हुआ तो शासन ने इसे रोकने के लिए अप्रैल में ही ईंट भट्ठों को चलाने की अनुमति दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद तमाम भट्ठों की चिमनियों ने धुआं उगलना शुरू नहीं किया।
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अब 15 भट्ठा मालिकों ने खनन विभाग को सूचना दी है कि वे वर्ष 2020-21 में भट्ठा चलाने की स्थिति में नहीं हैं। इनमें फरीदपुर के मानसी ब्रिक्स, बहेड़ी में तनमन ब्रिक्स, शहर में रहमान और शंकर ब्रिक्स, फरीदपुर में गंगाधर ब्रिक्स सहित करीब 15 भट्ठा मालिक शामिल है। चूंकि हर साल अक्तूबर से विनियम शुल्क जमा करना होता है, इसलिए एक-दो महीने में इस तरह की और भी सूचनाएं आने की संभावना हैं।
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एक भट्ठा देता है डेढ़ लाख का सालाना राजस्व

खनन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ईंट भट्ठों से उनकी उत्पादन क्षमता के आधार पर शुल्क लिया जाता है। सबसे कम शुल्क 1.35 लाख रुपये हैं, लेकिन जिले में ज्यादातर भट्ठों की क्षमतानुसार 1.50 से 1.70 लाख रुपये तक सालाना राजस्व मिलता है।

कई भट्ठों वालों ने सूचना दी है कि वे इस साल कारोबार शुरू कर पाने की स्थिति में नहीं हैं। भट्ठे बंद रहने से राजस्व का नुकसान होगा। - कमल कश्यप, जिला खनन अधिकारी

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