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पब्लिक खुद बना रही अपनी सड़कें, स्मार्ट सिटी की मार्केटिंग पर खर्च होंगे एक करोड़
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बंगलूरू की पीआर एजेंसी को दी गई जिम्मेदारी, तीन साल तक करेगी काम
बरेली। नगर निगम की व्यवस्था से परेशान पुराना शहर के लोग अपनी सड़क खुद बना रहे हैं और स्मार्ट सिटी की मार्केटिंग पर नगर निगम एक करोड़ रुपये खर्च करेगा। स्मार्ट सिटी की छवि बनाने के लिए बंगलूरू की पीआर एजेंसी को तीन साल तक एक करोड़ रुपये दिए जाएंगे। साथ ही एजेंसी के लिए ऑफिस, ईवेंट, पंफलेट, होर्डिंग आदि के लिए अलग से बजट दिया जाएगा।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 22 सौ करोड़ की भारी भरकम राशि से विकास कार्य किए जाने हैं। मगर इस धनराशि से सिविल लाइंस जैसे शहर के प्रमुख इलाके को ही चमकाना है। मगर शहर के पिछड़े इलाके और बड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करने से यह प्रोजेक्ट आलोचनाओं में घिर गया है। नगर निगम में शिकायतें करके निराश हो चुके चकमहमूदनगर के लोगों ने तो पिछले दिनों अपने क्षेत्र की एक सड़क का निर्माण भी खुद ही शुरू कर दिया है। वहीं, कूड़ा निस्तारण, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, एसटीपी जैसी समस्याओं का भी नगर निगम अब तक कोई समाधान नहीं ढूंढ सका है। नगर निगम में शामिल 48 गांव के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। मगर इन सबको दरकिनार कर अफसरों का स्मार्ट सिटी और इसके प्रोजेक्ट के जरिये अपना चेहरा चमकाने पर जोर है। इसके लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि से बंगलूरू की पीआर एजेंसी को स्मार्ट सिटी की मार्केटिंग करने की जिम्मेदारी दी गई है।
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बरेली। नगर निगम की व्यवस्था से परेशान पुराना शहर के लोग अपनी सड़क खुद बना रहे हैं और स्मार्ट सिटी की मार्केटिंग पर नगर निगम एक करोड़ रुपये खर्च करेगा। स्मार्ट सिटी की छवि बनाने के लिए बंगलूरू की पीआर एजेंसी को तीन साल तक एक करोड़ रुपये दिए जाएंगे। साथ ही एजेंसी के लिए ऑफिस, ईवेंट, पंफलेट, होर्डिंग आदि के लिए अलग से बजट दिया जाएगा।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 22 सौ करोड़ की भारी भरकम राशि से विकास कार्य किए जाने हैं। मगर इस धनराशि से सिविल लाइंस जैसे शहर के प्रमुख इलाके को ही चमकाना है। मगर शहर के पिछड़े इलाके और बड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करने से यह प्रोजेक्ट आलोचनाओं में घिर गया है। नगर निगम में शिकायतें करके निराश हो चुके चकमहमूदनगर के लोगों ने तो पिछले दिनों अपने क्षेत्र की एक सड़क का निर्माण भी खुद ही शुरू कर दिया है। वहीं, कूड़ा निस्तारण, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, एसटीपी जैसी समस्याओं का भी नगर निगम अब तक कोई समाधान नहीं ढूंढ सका है। नगर निगम में शामिल 48 गांव के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। मगर इन सबको दरकिनार कर अफसरों का स्मार्ट सिटी और इसके प्रोजेक्ट के जरिये अपना चेहरा चमकाने पर जोर है। इसके लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि से बंगलूरू की पीआर एजेंसी को स्मार्ट सिटी की मार्केटिंग करने की जिम्मेदारी दी गई है।
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