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धर्म के नाम पर कत्लेआम... राम राम राम...
बरेली
Updated Sun, 24 Jan 2016 01:03 AM IST
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कोई परवाह थी, न चाह थी, न डाह थी। न सुविधा-असुविधा की दुविधा विचार में, सोचता हूं दीन दुनिया से दूर थोड़ी देर, काश पक्षी होना होता मेरे अधिकार में। कवि उदय प्रताप सिंह की ऐसी तमाम शृंगार की कविताओं पर लोगों ने खूब तालियां बताईं। शनिवार को साहू रामस्वरूप महिला महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती वर्ष पर हुए कवि सम्मेलन में उदय प्रताप सिंह ने तमाम छंद पढ़े। प्रकृति के मानवीकरण पर उन्होंने छंद पढ़ा, जब से संभाला होश, मेरी काव्य चेतना ने, मेरी कल्पना में आती जाती रही चांदनी, आधी-आधी रात मेरी आंख से चुरा के नींद, खेत-खलिहान में बुलाती रही चांदनी... इसके बाद फिर मानवीकरण पर छंद सुनाया, कल रात कमरे में खिड़की के रास्ते उतर आई किरणों की डोरी डोरी चांदनी। इसके बाद अंत में उन्होंने फूल और कली पर छंद सुनाया- जिंदगी सिद्धांतों की सीमाओं में बंटती नहीं, ये वो पूंजी है जो व्यय से बढ़ती है, घटती नहीं, चार दिन की जिंदगी खुद को जिए तो क्या जिए, बात तो तब है जब मर जाएं औरों के लिए। ये तुम्हारी आत्मकेंद्रित गंध भी क्या गंध है, जिंदगी तो दान का और प्राप्त का अनुबंध है।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे हास्य कवि अशोक चक्रधर ने सम्मेलन के अंत में सुनाया। उन्होंने बनाया अपना-अपना ईष्ट, सभी ने दिया अपना प्रेम संदेश, मगर क्यों नहीं सुधर रहा ये देश, न जाने क्या होगा अंजाम, धर्म के नाम पर कत्लेआम राम, राम, राम। अगर प्यारा है हिंदुस्तान, शीघ्र लगाओ इस पर विराम। उन्होंने ब्रज में सुनाया कि मेट्रो में अगर एनाउंसमेंट होगा तो कैसे होगा। इसे सुनकर लोगों ने खूब टहाके लगाए। इसके बाद उन्होंने भ्रष्टाचार पर व्यंग्य करते हुए सुनाया, भ्रष्टाचार की नदी में नहाने के बाद, जिसकी भी छवि स्वच्छ है, वही तो मगरमच्छ है। इसके बाद भटके हुए बच्चों के लिए वह क्या महसूस करते हैं, इस पर कविता सुनाई, जो भी पथ से भटक गया है, जो भी रस्ता भूला है आओ प्यारे दौड़ के आओ, मेरे अंदर झूला है.... झूले की पटरी ऐसी है, जीवन पटरी पर आएगा, हवा चलेगी, केश उड़ेंगे, बलखाती मस्ती छाएगी, तुम्हें लगेगा आज वक्ता पूरा दाम वसूला है....। उन्होंने बादल और बदली के प्रेम पर लिखी कविता सुनाई। इसके बाद कवि सम्मेलन के अंत में बेटियों पर कविता सुनाई कि कैसे नन्हीं चिड़िया घोंसला छोड़कर जब पहली बार गगन में उड़ती है तो क्या महसूस करती है- चिड़िया, चिड़िया तुझ हो मगन, धरा मगन, गगन मगन, फैला ले पंख जरा, उड़ तो सही, बोली पवन...
मधु मोहिनी उपाध्याय ने कश्मीर पर कविता पढ़ी। जहां डार-डार पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा.. पर उन्होंने पढ़ा, जहां घपलों और घोटालों की भरमार ने सबको घेरा, वह भारत देश है मेरा। पवन दीक्षित ने पढ़ा- ये मंजर सियासी खतरनाक है कि सारी फिजा ही खतरनाक है, बुरे लोग दुनिया का खतरा नहीं, शरीफों की चुप्पी खतरनाक है... इसके बाद विष्णु सक्सेना और महेंद्र अजनबी ने कविताएं पढ़ीं। इस पहले साहू रामस्वस्व महिला महाविद्यालय में संगीत विभाग की ओर से भजन संकीर्तन हुए। कवि सम्मेलन के मौके पर प्रभारी डीएम शिव सहाय अवस्थी, कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन, नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव, साहू रामस्वरूप महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शशि बाला राठी समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
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कार्यक्रम का संचालन कर रहे हास्य कवि अशोक चक्रधर ने सम्मेलन के अंत में सुनाया। उन्होंने बनाया अपना-अपना ईष्ट, सभी ने दिया अपना प्रेम संदेश, मगर क्यों नहीं सुधर रहा ये देश, न जाने क्या होगा अंजाम, धर्म के नाम पर कत्लेआम राम, राम, राम। अगर प्यारा है हिंदुस्तान, शीघ्र लगाओ इस पर विराम। उन्होंने ब्रज में सुनाया कि मेट्रो में अगर एनाउंसमेंट होगा तो कैसे होगा। इसे सुनकर लोगों ने खूब टहाके लगाए। इसके बाद उन्होंने भ्रष्टाचार पर व्यंग्य करते हुए सुनाया, भ्रष्टाचार की नदी में नहाने के बाद, जिसकी भी छवि स्वच्छ है, वही तो मगरमच्छ है। इसके बाद भटके हुए बच्चों के लिए वह क्या महसूस करते हैं, इस पर कविता सुनाई, जो भी पथ से भटक गया है, जो भी रस्ता भूला है आओ प्यारे दौड़ के आओ, मेरे अंदर झूला है.... झूले की पटरी ऐसी है, जीवन पटरी पर आएगा, हवा चलेगी, केश उड़ेंगे, बलखाती मस्ती छाएगी, तुम्हें लगेगा आज वक्ता पूरा दाम वसूला है....। उन्होंने बादल और बदली के प्रेम पर लिखी कविता सुनाई। इसके बाद कवि सम्मेलन के अंत में बेटियों पर कविता सुनाई कि कैसे नन्हीं चिड़िया घोंसला छोड़कर जब पहली बार गगन में उड़ती है तो क्या महसूस करती है- चिड़िया, चिड़िया तुझ हो मगन, धरा मगन, गगन मगन, फैला ले पंख जरा, उड़ तो सही, बोली पवन...
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मधु मोहिनी उपाध्याय ने कश्मीर पर कविता पढ़ी। जहां डार-डार पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा.. पर उन्होंने पढ़ा, जहां घपलों और घोटालों की भरमार ने सबको घेरा, वह भारत देश है मेरा। पवन दीक्षित ने पढ़ा- ये मंजर सियासी खतरनाक है कि सारी फिजा ही खतरनाक है, बुरे लोग दुनिया का खतरा नहीं, शरीफों की चुप्पी खतरनाक है... इसके बाद विष्णु सक्सेना और महेंद्र अजनबी ने कविताएं पढ़ीं। इस पहले साहू रामस्वस्व महिला महाविद्यालय में संगीत विभाग की ओर से भजन संकीर्तन हुए। कवि सम्मेलन के मौके पर प्रभारी डीएम शिव सहाय अवस्थी, कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन, नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव, साहू रामस्वरूप महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शशि बाला राठी समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
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