चिन्मयानंद मामला: हाईकोर्ट में कल दाखिल होगी एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली एलएलएम की छात्रा फिरौती मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए पिता और भाई के साथ प्रयागराज चली गई। माना जा रहा है कि वह 23 सितंबर को कोर्ट से अग्रिम जमानत ले सकती है, वहीं एसआईटी भी 23 सितंबर को ही कोर्ट में जांच की स्टेटस रिपोर्ट सौंपेगी। माना जा रहा है कि यदि छात्रा को अग्रिम जमानत आर्डर नहीं मिला तो उसकी गिरफ्तारी भी संभव है।
एंजियोग्राफी के लिए मेडिकल कॉलेज भेजे जा सकते हैं स्वामी चिन्मयानंद
जिला कारागार के अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद का चेकअप नियमित हो रहा है और वह सामान्य हैं, पुरानी बीमारियों की दवा डॉक्टर की सलाह पर ले रहे हैं लेकिन उन्हें एंजियोग्राफी के लिए किसी भी समय मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा।
स्वामी चिन्मयानंद के साथ खड़े हैं नैमिष पीठ के सैकड़ों संत
संत समाज के अग्रणी और नैमिष पीठ में नारदा नंद सरस्वती आश्रम के ज्ञानी जी महाराज ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद को एक साजिश के तहत दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाया गया है, नैमिष पीठ के सैकड़ों संत उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा की मालिश अगर अपराध होता तो बड़े-बड़े शहरों में मसाज केंद्र खोलकर सरकार उनसे टैक्स क्यों वसूल रही है।
उन्होंने कहा कि जो संत स्वामी चिन्मयानंद का विरोध कर रहे हैं, वह उंगलियों पर गिने जाने वाले लोग हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी से फिरौती मांगने के आरोप में लड़की को भी जेल भेजा जाना चाहिए।
अब छिन सकता है चिन्मयानंद से मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता का पद
अपने ही कॉलेज की छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में जेल भेजे गए पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद अब मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता पद से हटाए जा सकते हैं, यह अटकलें संत समाज से बाहर किए जाने पर तेज हो गईं हैं।
स्वामी चिन्मयानंद ने एसआईटी की जांच के दौरान तेल मालिश वाले वीडियो में खुद को बताते हुए अपने किए पर शर्मिंदा होने की बात कही थी। इसके बाद से ही उनके प्रति संत समाज में सहानुभूति का असर कम हो गया और प्रयागराज में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने उनके इस कृत्य को संत समाज को अपमानित करने वाला अक्षम्य बताया।
उन्होंने चिन्मयानंद को संत समाज से बहिष्कृत करने की घोषणा की। हालांकि आखिरी मुहर हरिद्वार में बैठक में लगेगी लेकिन उनकी इस घोषणा से जाहिर हो गया है कि अब स्वामी चिन्मयानंद को मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता पद से भी हाथ धोना पड़ सकता है।