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साहब.. पूरा परिवार खत्म कर लेंगे मगर वापस फैक्टरी नहीं जाएंगे

Tue, 19 May 2020 01:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 19 May 2020 01:45 AM IST
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Sir .. the whole family will finish but will not go back to the factory
श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आए यात्री। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

फतेहगंज पूर्वी में बॉर्डर पिकेट के निरीक्षण को पहुंचे डीआईजी से मिला बिहार का परिवार, सुनाई व्यथा

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बरेली। कोरना संकट ने श्रमिकों को ऐसे दुर्दिन दिखाए हैं जिन्हें सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए। सोमवार को फतेहगंज पूर्वी में बॉर्डर पिकेट का निरीक्षण करने पहुंचे डीआईजी रेंज को एक मजदूर परिवार अपनी व्यथा सुनाते सुनाते रो पड़ा। कहा- साहब अब चाहें परिवार ही क्यों न खत्म करना पड़े मगर अपना गांव छोड़कर वापस फैक्टरी में काम करने नहीं जाएंगे। डीआईजी ने मजदूर परिवार के खाने और वाहन का इंतजाम कराकर उसे बिहार के लिए रवाना कर दिया।

बिहार के छिबरामऊ के रहने वाले विक्र ने बताया कि 12 साल पहले अंबाला में दो कमरों में शुरू हुई एक इंस्युलेटर फैक्टरी में वह पहले दिन से ही काम कर रहा था। उसकी जिंदगी एकदम पटरी पर चल रही थी। मजदूरी से परिवार पल जा रहा था। विक्रम और उसके जैसे अन्य मजदूरों की हाड़ तोड़ मेहनत की वजह से फैक्टरी ने काफी मुनाफा भी कमाया। फैक्टरी मालिक ने पांच बंगले और 14 गाड़ियां भी खरीद ली मगर कोरोना सकंट ने ये अहसास दिला दिया की फैक्टरी मालिक के लिए वो एक मजदूर से ज्यादा कुछ नहीं था। लॉकडाउन में फैक्टर बंद हुई तो फैक्टरी मालिक को यही मजदूर बोझ लगने लगे। मालिक ने मजदूरी देनी बंद कर दी। बचत की कुछ रकम से जैसे तैसे विक्रम ने कुछ दिन काटे मगर जब सारे पैसे खत्म हो गए तो फैक्टरी मालिक ने किराया न दे पाने की वजह से घर चले जाने का फरमान सुना दिया। किराए के मकान से घर निकलने के लिए सामान बांधना शुरू किया तो मकान मालिक ने सामान रोक लिया और किराया मांगा। रुपये न होने की बात कही तो बोला, सामान छोड़ जाओ, जब रुपये हो तब ले जाना। परेशान होकर विक्रम तीन बच्चों और पत्नी के साथ कपड़े लेकर ही पैदल घर को निकल पड़ा। सोमवार को जैसे तैसे ये परिवार फेतहगंज पूर्वी पहुंचा। इत्तेफाक से बार्डर का निरीक्षण करने पहुंचे डीआईजी रेंज राजेश कुमार पांडेय को ये परिवार मिला तो मजदूर ने अपनी व्यथा सुनाई। बोला- साहब !अब चाहें परिवार को मिट्टी का तेल डालकर मारना ही क्यों न पड़े मगर फैक्टरी वापस नहीं जाएगा। मजदूर के इन शब्दों ने डीआईजी को भी झंझोर कर रख दिया। यहां डीआईजी ने उनके खाने और वाहन का इंतजाम कर उन्हें रवाना कर दिया। अन्य कई और मजदूर भी उन्हें वहां ऐसे मिले, जिनकी परेशानियों अंदर तक हिला देने वाली थीं।
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