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BAREILLY : पुलिस ने मूंद लीं आंखें, स्मैक तस्कर नन्हें लंगड़ा की फ्रीज संपत्ति का हो गया बैनामा
Mon, 01 Aug 2022 01:29 PM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 01 Aug 2022 01:29 PM IST
सार
मामला फतेहगंज पश्चिमी थाने का है। यहां पिछले साल स्मैक तस्कर नन्हे लंगड़ा की आठ करोड़ की संपत्ति सीज की गई थी। फिर, इस साल नन्हे लंगड़ा ने फ्रीज की गई संपत्तियों को बेचना शुरू कर दिया। यही नहीं संपत्ति की रजिस्ट्री भी हो गई है।
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स्मैक तस्कर नन्हे लंगड़ा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
स्मैक तस्करों पर पुलिस का रवैया एक बार फिर नरम हो गया है। हालत यह है कि फतेहगंज पश्चिमी के कुख्यात स्मैक तस्कर नन्हे लंगड़ा ने सफेमा के तहत फ्रीज की गई अपनी संपत्ति को बेचना शुरू कर दिया है। लंगड़ा की आठ करोड़ की संपत्ति फ्रीज की गई थी जिसमें से दो बार में करीब एक करोड़ की संपत्ति की रजिस्ट्री हो गई है, लेकिन पुलिस ने अब तक आंखें मूंद रखी हैं।
फतेहगंज पश्चिमी की पहचान तमाम सालों से स्मैक सिटी के तौर पर होती है। पुलिस पर स्मैक तस्करों को संरक्षण देने के भी आरोप लगते रहे हैं। शासन की सख्ती के बाद पिछले साल पुलिस ने यहां स्मैक तस्करों के खिलाफ अभियान शुरू किया था। स्मैक तस्करों की कई संपत्तियों बीडीए की मदद से बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया और करोड़ों की संपत्ति फ्रीज कर दी गई। अब पिछले कुछ समय से पुलिस का यह अभियान ठंडा पड़ गया है। इसके बाद स्मैक तस्कर एक बार फिर सक्रिय होने लगे हैं।
इसी अभियान के दौरान फतेहगंज के कुख्यात स्मैक तस्कर रियासत उर्फ नन्हें लंगड़ा को पुलिस ने माफिया घोषित किया था। नन्हे और उसके बेटे यूसुफ उर्फ बब्बू ने स्मैक की तस्करी से करोड़ाें की संपत्ति अर्जित की जो उसकी पत्नी शकीना, बेटे मोहम्मद यूनुस, यूसुफ और परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम पर है। पिछले दिनों पुलिस ने हाईवे किनारे बने उसके बरातघर समेत तमाम संपत्ति पर बुलडोजर चलाने के साथ सफेमा के तहत 7.84 करोड़ रुपये कीमत की आवासीय और कृषि भूमि, आलीशान कोठी और कस्बे के मुख्य बाजार में स्थित दोमंजिला दुकान समेत तमाम प्रापर्टी को फ्रीज किया था। अब यह संपत्ति धीरे-धीरे बिकनी शुरू हो गई है। पुलिस अब तक इससे बेखबर बनी हुई है।
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सफेमा का नोटिस हटाकर कर दिया सौदा
पिछले साल सितंबर में नन्हे लंगड़ा और फिर उसके बेटे यूसुफ उर्फ बब्बू को जेल भेजा गया था। उसके बाद पुलिस ने उनकी संपत्ति को फ्रीज किया था। इस पूरी संपत्ति पर सफेमा का नोटिस भी चस्पा किया गया था। 15 जुलाई को कस्बे में फ्रीज की गई हाईवे स्थित उसकी दुकान बेच दी गई। इस दुकान का बैनामा उसके बेटे यूसुफ, यूनुस, पत्नी शकीना आदि ने रिछा में रहने वाले तनजीम अहमद के नाम पर किया है। कहा जा रहा है कि तनजीम ने करीब 45 लाख की संपत्ति 13.80 लाख रुपये में खरीदी है। रजिस्ट्री के लिए फोटो खिंचाने के दौरान दुकान पर लगा सफेमा का नोटिस भी हटाया गया लेकिन पुलिस अनजान बनी रही। इसके अलावा काफी कृषि भूमि का भी बैनामा कर दिए जाने की खबर है।
पुलिस अफसरों ने रजिस्ट्री विभाग को बताया जिम्मेदार
पुलिस अफसरों के मुताबिक संपत्ति फ्रीज करने के दौरान रजिस्ट्री विभाग को सूचना दे दी जाती है कि ताकि दस्तावेज में उसे दर्ज कर दिया जाए और संबंधित व्यक्ति उस संपत्ति पर न लोन ले सके और न उसे ही बेच सके। कहा जा रहा है कि नन्हे लंगड़ा के मामले में रजिस्ट्री विभाग ने उसके और उसके परिवार वालों के नाम पर रजिस्टर्ड संपत्ति पर यह आदेश दर्ज नहीं किया। इसी वजह से इस जमीन की बिक्री हो गई।
लंगड़ा 15 साल से कर रहा है तस्करी
नन्हें लंगड़ा करीब 15 साल से स्मैक तस्करी के धंधे में लिप्त है। नन्हें लंगड़ा वर्ष 2007 से अब तक छह बार जेल जा चुका है। सबसे पहले उसकी गिरफ्तारी वर्ष 2007 फिर 2011, 2013 और 2014 में हुई। वर्ष 2009 में वह बलवा और जानलेवा हमले के मामले में भी जेल जा चुका है। फिर सितंबर 2021 में उसे जेल भेजा गया। उसके खिलाफ बरेली के अलावा उत्तराखंड में भी कई मामले दर्ज हैं।
पुलिस के किस साहब ने मांगे थे दस लाख... नहीं लगा पता
जिस दौरान फतेहगंज पश्चिमी में स्मैक तस्करों पर पुलिस ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही थी, उसी दौरान एक स्मैक तस्कर के परिवार ने एक सिपाही का ऑडियो वायरल किया था जिसमें वह कह रहा था कि साहब ने कह दिया है कि कार्रवाई से बचने के लिए दस लाख रुपये देने होंगे। इस ऑडियो के वायरल होने से स्मैक तस्करों के खिलाफ चल रही कार्रवाई में पुलिस के खेल करने का खुलासा हुआ था। पुलिस अफसरों ने जांच कराने के बाद आरोपी सिपाही को तो जेल भिजवा दिया था लेकिन वह कौन से साहब के कहने पर स्मैक तस्कर परिवार से लेन-देन की बात कर रहा था, इसकी जांच तक नहीं हुई। लिहाजा यह मामला दबा ही रह गया।
शाही : एसपी क्राइम कर रहे हैं जांच, फिर भी शिकायत का कर दिया फर्जी निस्तारण
हाल ही में एक स्मैक तस्कर के खिलाफ आईजीआरएस पर की गई शिकायत का फर्जी निस्तारण करने से शाही पुलिस की भी स्मैक तस्करों से साठगांठ की पोल खुली है। अब सीओ को फर्जी रिपोर्ट भेजने वाले दरोगा ने ही कबूल किया है कि इस मामले की जांच एसपी क्राइम कर रहे हैं। सीओ मीरगंज को इस बारे में दूसरी रिपोर्ट भेजी गई है।
शाही के गांव भमोरा निवासी सुरेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री को ऑनलाइन शिकायत कर गांव में स्मैक तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया था। सुरेंद्र ने इस शिकायत में कहा था कि स्मैक तस्करी की वजह से गांव का माहौल खराब हो रहा है। नई पीढ़ी नशे की शिकार बन रही है। यह प्रार्थना पत्र एसएसपी के माध्यम से थानाध्यक्ष शाही को भेजा गया उन्होंने दरोगा रविंद्र सिह को जांच सौंप दी। दरोगा रविंद्र ने शिकायतकर्ता से बिना बात किए रिपोर्ट दे दी कि शिकायतकर्ता कानपुर में नौकरी करता है और उसने स्मैक तस्कर के खिलाफ कोई शिकायत नही की है।
दरोगा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि शिकायतकर्ता का मकान बंटवारे का विवाद चल रहा था जो निपट गया है। अब किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है। जब रिपोर्ट सीओ मीरगंज के पास पहुंची उन्होंने पीड़ित से बात की और मिलान किया तो पता चला शिकायत का फर्जी निस्तारण कर दिया गया। उन्होंने रिपोर्ट वापस कर सही आख्या मांगी। अब सीओ को दूसरी रिपोर्ट भेजी गई है।
एसपी देहात बोले - रजिस्ट्री विभाग की जिम्मेदरी
सफेमा के तहत जो संपत्ति फ्रीज की गई है, उसकी सूचना रजिस्ट्री विभाग को भेज दी गई थी ताकि इस कार्रवाई को उस संपत्ति के दस्तावेज में दर्ज कर दिया जाए। इसके बावजूद अगर संपत्ति का बैनामा हो गया है तो यह रजिस्ट्री विभाग की जिम्मेदारी है।
- राजकुमार अग्रवाल, एसपी देहात
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फतेहगंज पश्चिमी की पहचान तमाम सालों से स्मैक सिटी के तौर पर होती है। पुलिस पर स्मैक तस्करों को संरक्षण देने के भी आरोप लगते रहे हैं। शासन की सख्ती के बाद पिछले साल पुलिस ने यहां स्मैक तस्करों के खिलाफ अभियान शुरू किया था। स्मैक तस्करों की कई संपत्तियों बीडीए की मदद से बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया और करोड़ों की संपत्ति फ्रीज कर दी गई। अब पिछले कुछ समय से पुलिस का यह अभियान ठंडा पड़ गया है। इसके बाद स्मैक तस्कर एक बार फिर सक्रिय होने लगे हैं।
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इसी अभियान के दौरान फतेहगंज के कुख्यात स्मैक तस्कर रियासत उर्फ नन्हें लंगड़ा को पुलिस ने माफिया घोषित किया था। नन्हे और उसके बेटे यूसुफ उर्फ बब्बू ने स्मैक की तस्करी से करोड़ाें की संपत्ति अर्जित की जो उसकी पत्नी शकीना, बेटे मोहम्मद यूनुस, यूसुफ और परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम पर है। पिछले दिनों पुलिस ने हाईवे किनारे बने उसके बरातघर समेत तमाम संपत्ति पर बुलडोजर चलाने के साथ सफेमा के तहत 7.84 करोड़ रुपये कीमत की आवासीय और कृषि भूमि, आलीशान कोठी और कस्बे के मुख्य बाजार में स्थित दोमंजिला दुकान समेत तमाम प्रापर्टी को फ्रीज किया था। अब यह संपत्ति धीरे-धीरे बिकनी शुरू हो गई है। पुलिस अब तक इससे बेखबर बनी हुई है।
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सफेमा का नोटिस हटाकर कर दिया सौदा
पिछले साल सितंबर में नन्हे लंगड़ा और फिर उसके बेटे यूसुफ उर्फ बब्बू को जेल भेजा गया था। उसके बाद पुलिस ने उनकी संपत्ति को फ्रीज किया था। इस पूरी संपत्ति पर सफेमा का नोटिस भी चस्पा किया गया था। 15 जुलाई को कस्बे में फ्रीज की गई हाईवे स्थित उसकी दुकान बेच दी गई। इस दुकान का बैनामा उसके बेटे यूसुफ, यूनुस, पत्नी शकीना आदि ने रिछा में रहने वाले तनजीम अहमद के नाम पर किया है। कहा जा रहा है कि तनजीम ने करीब 45 लाख की संपत्ति 13.80 लाख रुपये में खरीदी है। रजिस्ट्री के लिए फोटो खिंचाने के दौरान दुकान पर लगा सफेमा का नोटिस भी हटाया गया लेकिन पुलिस अनजान बनी रही। इसके अलावा काफी कृषि भूमि का भी बैनामा कर दिए जाने की खबर है।
पुलिस अफसरों ने रजिस्ट्री विभाग को बताया जिम्मेदार
पुलिस अफसरों के मुताबिक संपत्ति फ्रीज करने के दौरान रजिस्ट्री विभाग को सूचना दे दी जाती है कि ताकि दस्तावेज में उसे दर्ज कर दिया जाए और संबंधित व्यक्ति उस संपत्ति पर न लोन ले सके और न उसे ही बेच सके। कहा जा रहा है कि नन्हे लंगड़ा के मामले में रजिस्ट्री विभाग ने उसके और उसके परिवार वालों के नाम पर रजिस्टर्ड संपत्ति पर यह आदेश दर्ज नहीं किया। इसी वजह से इस जमीन की बिक्री हो गई।
लंगड़ा 15 साल से कर रहा है तस्करी
नन्हें लंगड़ा करीब 15 साल से स्मैक तस्करी के धंधे में लिप्त है। नन्हें लंगड़ा वर्ष 2007 से अब तक छह बार जेल जा चुका है। सबसे पहले उसकी गिरफ्तारी वर्ष 2007 फिर 2011, 2013 और 2014 में हुई। वर्ष 2009 में वह बलवा और जानलेवा हमले के मामले में भी जेल जा चुका है। फिर सितंबर 2021 में उसे जेल भेजा गया। उसके खिलाफ बरेली के अलावा उत्तराखंड में भी कई मामले दर्ज हैं।
पुलिस के किस साहब ने मांगे थे दस लाख... नहीं लगा पता
जिस दौरान फतेहगंज पश्चिमी में स्मैक तस्करों पर पुलिस ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही थी, उसी दौरान एक स्मैक तस्कर के परिवार ने एक सिपाही का ऑडियो वायरल किया था जिसमें वह कह रहा था कि साहब ने कह दिया है कि कार्रवाई से बचने के लिए दस लाख रुपये देने होंगे। इस ऑडियो के वायरल होने से स्मैक तस्करों के खिलाफ चल रही कार्रवाई में पुलिस के खेल करने का खुलासा हुआ था। पुलिस अफसरों ने जांच कराने के बाद आरोपी सिपाही को तो जेल भिजवा दिया था लेकिन वह कौन से साहब के कहने पर स्मैक तस्कर परिवार से लेन-देन की बात कर रहा था, इसकी जांच तक नहीं हुई। लिहाजा यह मामला दबा ही रह गया।
शाही : एसपी क्राइम कर रहे हैं जांच, फिर भी शिकायत का कर दिया फर्जी निस्तारण
हाल ही में एक स्मैक तस्कर के खिलाफ आईजीआरएस पर की गई शिकायत का फर्जी निस्तारण करने से शाही पुलिस की भी स्मैक तस्करों से साठगांठ की पोल खुली है। अब सीओ को फर्जी रिपोर्ट भेजने वाले दरोगा ने ही कबूल किया है कि इस मामले की जांच एसपी क्राइम कर रहे हैं। सीओ मीरगंज को इस बारे में दूसरी रिपोर्ट भेजी गई है।
शाही के गांव भमोरा निवासी सुरेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री को ऑनलाइन शिकायत कर गांव में स्मैक तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया था। सुरेंद्र ने इस शिकायत में कहा था कि स्मैक तस्करी की वजह से गांव का माहौल खराब हो रहा है। नई पीढ़ी नशे की शिकार बन रही है। यह प्रार्थना पत्र एसएसपी के माध्यम से थानाध्यक्ष शाही को भेजा गया उन्होंने दरोगा रविंद्र सिह को जांच सौंप दी। दरोगा रविंद्र ने शिकायतकर्ता से बिना बात किए रिपोर्ट दे दी कि शिकायतकर्ता कानपुर में नौकरी करता है और उसने स्मैक तस्कर के खिलाफ कोई शिकायत नही की है।
दरोगा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि शिकायतकर्ता का मकान बंटवारे का विवाद चल रहा था जो निपट गया है। अब किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है। जब रिपोर्ट सीओ मीरगंज के पास पहुंची उन्होंने पीड़ित से बात की और मिलान किया तो पता चला शिकायत का फर्जी निस्तारण कर दिया गया। उन्होंने रिपोर्ट वापस कर सही आख्या मांगी। अब सीओ को दूसरी रिपोर्ट भेजी गई है।
एसपी देहात बोले - रजिस्ट्री विभाग की जिम्मेदरी
सफेमा के तहत जो संपत्ति फ्रीज की गई है, उसकी सूचना रजिस्ट्री विभाग को भेज दी गई थी ताकि इस कार्रवाई को उस संपत्ति के दस्तावेज में दर्ज कर दिया जाए। इसके बावजूद अगर संपत्ति का बैनामा हो गया है तो यह रजिस्ट्री विभाग की जिम्मेदारी है।
- राजकुमार अग्रवाल, एसपी देहात