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Bareilly News: जिला अस्पताल में फैक्टर की किल्लत, पीड़ित लगा रहे लखनऊ की दौड़
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बरेली। जिला अस्पताल में सप्ताहभर से फैक्टर आठ और नौ की किल्लत बनी हुई है। नतीजा, हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मासूमों को लखनऊ की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसी साल फरवरी-मार्च में समय पर फैक्टर नहीं मिलने से शहर के मुरावपुरा निवासी तीन वर्षीय बच्ची, पीलीभीत के पूरनपुर निवासी 12 वर्षीय बालक समेत तीन मरीजों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, फैक्टर की सप्लाई प्रदेश में एसजी पीजीआई की ओर से होती है। अगर निजी अस्पतालों में इनकी उपलब्धता है भी तो इसका शुल्क छह से आठ हजार के बीच आता है। हीमोफीलिया खून के थक्के बनने की प्रक्रिया से जुड़ी बीमारी है। थक्का जमाने वाले जरूरी प्रोटीन की कमी से चोट लगने पर रक्तस्राव देर तक जारी रह सकता है। कई बार शरीर के भीतर, जोड़ों और मांसपेशियों में बिना चोट के खून बहने लगता है। मस्तिष्क में रक्तस्राव जानलेवा हो सकता है।
जीवन रेखा हीमोफिलिया जनकल्याण सोसाइटी की अध्यक्ष रेखा रानी ने बताया कि सोसाइटी में पंजीकृत मंडलभर के 300 मरीज जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवा रहे हैं। इस वर्ष फरवरी से अब तक हर माह इंजेक्शन की कमी होती रही है। फरवरी-मार्च में समय पर फैक्टर नहीं मिलने से तीन बच्चों की मौत भी हो चुकी है। उच्चाधिकारियों को पत्र देकर फैक्टर उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
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वर्जन
फैक्टर की उपलब्धता कम होने से पूर्व ही मांग पत्र भेज दिया गया था। दो बार रिमाइंडर भी भेजा गया है। जल्द इंजेक्शन उपलब्ध हो जाएंगे। - डॉ. आरसी दीक्षित, एडीएसआईसी, जिला अस्पताल
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विभागीय अधिकारियों के अनुसार, फैक्टर की सप्लाई प्रदेश में एसजी पीजीआई की ओर से होती है। अगर निजी अस्पतालों में इनकी उपलब्धता है भी तो इसका शुल्क छह से आठ हजार के बीच आता है। हीमोफीलिया खून के थक्के बनने की प्रक्रिया से जुड़ी बीमारी है। थक्का जमाने वाले जरूरी प्रोटीन की कमी से चोट लगने पर रक्तस्राव देर तक जारी रह सकता है। कई बार शरीर के भीतर, जोड़ों और मांसपेशियों में बिना चोट के खून बहने लगता है। मस्तिष्क में रक्तस्राव जानलेवा हो सकता है।
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जीवन रेखा हीमोफिलिया जनकल्याण सोसाइटी की अध्यक्ष रेखा रानी ने बताया कि सोसाइटी में पंजीकृत मंडलभर के 300 मरीज जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवा रहे हैं। इस वर्ष फरवरी से अब तक हर माह इंजेक्शन की कमी होती रही है। फरवरी-मार्च में समय पर फैक्टर नहीं मिलने से तीन बच्चों की मौत भी हो चुकी है। उच्चाधिकारियों को पत्र देकर फैक्टर उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
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फैक्टर की उपलब्धता कम होने से पूर्व ही मांग पत्र भेज दिया गया था। दो बार रिमाइंडर भी भेजा गया है। जल्द इंजेक्शन उपलब्ध हो जाएंगे। - डॉ. आरसी दीक्षित, एडीएसआईसी, जिला अस्पताल