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Bareilly News: ऑर्डर... ऑर्डर... ऑर्डर... मुर्दा नहीं जिंदा हैं शिवचंद्र, मिला न्याय; जानिए पूरा मामला

Thu, 02 Oct 2025 02:50 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 02 Oct 2025 02:50 PM IST
सार

बरेली में अपर नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय ने पूर्व में जारी आदेश को निरस्त कर नया आदेश पारित किया है। कोर्ट के पीठासीन अधिकारी विजय सिंह ने भूल सुधार करते हुए शिवचंद्र को जिंदा मान लिया। इससे उनको न्याय मिल गया।

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Shivchandra is alive the court gave new order in bareilly
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

बरेली में अपर नगर मजिस्ट्रेट (एसीएम)-द्वितीय कोर्ट ने पहले पारित आदेश में जिस शिवचंद्र को मृतक दिखाया था, अब उसे निरस्त कर संशोधित आदेश जारी कर दिया। कोर्ट के पीठासीन अधिकारी विजय सिंह ने भूल सुधार करते हुए जिंदा को जिंदा मान लिया। इससे माहभर से दौड़ रहे शिवचंद्र को न्याय मिल गया। पूर्व में पारित आदेश में शिवचंद्र को मृतक दर्शाकर दूसरे गांव हरूनगला के राममूर्ति को उनका वारिस घोषित कर दिया था।

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सदर तहसील के गांव मेहतरपुर करोड़ निवासी शिवचंद्र सिंह के इस मामले को अमर उजाला ने 24 सितंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस पर एसीएम-द्वितीय विजय सिंह ने 30 अगस्त को पारित आदेश को निरस्त कर 25 सितंबर को संशोधित आदेश जारी किया है। संशोधित आदेश में सदर तहसील के उदयपुर जसरथपुर गांव स्थित खाता संख्या 00487, गाटा-109, रकबा 1.9940 हेक्टेयर में वरासत के बजाय बैनामे के जरिये वादी राममूर्ति लाल का एक तिहाई अंश निर्धारित किया गया है।
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यह है पूरा मामला
कोर्ट ने शिवचंद्र सिंह बनाम कृपाल सिंह आदि के मुकदमे में पारित आदेश में शिवचंद्र को मृतक दिखाकर राममूर्ति को उनका वारिस घोषित किया था। यह मामला उदयपुर जसरथपुर गांव के गाटा-109 से जुड़ा है। फैसला आने के बाद से शिवचंद्र ने राममूर्ति पर जालसाजी कर वारिस बनने का आरोप लगाया था। कार्रवाई कराने के लिए वह आठ सितंबर को सदर तहसील में आयोजित समाधान दिवस में एसडीएम सदर के सामने पेश हुआ था। एसडीएम ने जांच कराई तो शिवचंद्र के आरोप सही साबित हुए थे।
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पूर्व के आदेश में शिवचंद्र को मृतक दिखाने का कारण है कि अधिवक्ता ने मुकदमे में वादी का नाम हटाने के लिए शिवचंद्र के नाम पर लाल रंग से गोला बनाया था, लेकिन उसमें मृतक या विक्रेता नहीं लिखा। इसलिए न्यायालय से भी चूक हुई। - विजय सिंह, पीठासीन अधिकारी (अपर नगर मजिस्ट्रेट-द्वितीय कोर्ट)

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