Shani Vakri 2023 : कुंभ राशि में प्रवेश कर शनि की उल्टी चाल शुरू; जानिए राशियों पर क्या पड़ेगा प्रभाव
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधर ने बताया कि शनि 17 जनवरी 2023 को अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में गोचर कर चुके हैं। अब यह 17 जून 2023 को कुंभ राशि में वक्री हो गए हैं। यह सामान्य घटना नहीं होगी।
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विस्तार
रोहिणी नक्षत्र में शनिवार की रात 10:56 बजे वक्री शनि कुंभ राशि में प्रवेश कर गए हैं। अब तीन नवंबर तक उनकी चाल उल्टी रहेगी। इसके बाद मार्गी होंगे। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, ग्रह जब वक्री होते हैं तो वे नकारात्मक फल देते हैं। वक्री शनि के कारण कुछ राशियों को लाभ होगा तो कुछ को अशुभ प्रभाव देखने को मिल सकता है l
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधर ने बताया कि शनि 17 जनवरी 2023 को अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में गोचर कर चुके हैं। अब यह 17 जून 2023 को कुंभ राशि में वक्री हो गए हैं। यह सामान्य घटना नहीं होगी। षडाष्टक योग के साथ व मंगल शनि का योग, गुरु राहु का चांडाल योग काफी अनिष्टकारक होता है। शनि का वक्री होना मौसम में परिवर्तन लाता है।
राशियों पर प्रभाव
शनि के कुंभ राशि में वक्री होने के कारण सिंह, वृश्चिक और मीन राशि को अत्यधिक नुकसान उठाने के योग बनेंगे। अन्य राशियों पर इसका प्रभाव कुछ सामान्य रहेगा l इस समय पर शनि की साढ़ेसाती मकर राशि से उतरती हुई, कुंभ राशि पर मध्य में और मीन राशि पर प्रारंभिक स्तर पर है। कुंभ राशि के जातकों पर जब षडाष्टक योग एक जुलाई को समाप्त होगा उसके बाद काफी राहत महसूस होगी।
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उपाय
किसी की राशि के जातक को शनि के प्रकोप से बचने के लिए मां भगवती की साधना करने का विधान है। 19 जून से गुप्त नवरात्र प्रांरभ हो रहे हैं। यदि साधक इन दिनों में साधना करे तो परिणाम शुभ होंगे। 27 जून को भड्डली नवमी है जो अबूझ मुहूर्त है। इस दिन पूर्णाहुति करने से अनेक बाधाओं से बचा जा सकता है।19 जून से गुप्त नवरात्र
19 जून से गुप्त नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। यह 28 जून तक रहेंगे। चैत्र और शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मगर गुप्त नवरात्र में देवी की 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। इससे आपके काम में आ रही किसी भी प्रकार की बाधा दूर होती है।ये भी पढ़ें- Ayushman Card : आयुष्मान कार्ड नहीं है तो बनवा लीजिए... इसके बिना अगली बार राशन नहीं मिलेगा
इन 10 महाविद्याओं में देवी काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी देवी, देवी भुवनेश्वरी, देवी छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी देवी, धूमावती माता, बगलामुखी माता, मातंगी माता और देवी कमला हैं। इनकी पूजा करने से कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है। गृहस्थ लोगों को गुप्त नवरात्र में रोजाना कम से कम 11 बार कुंजिकास्त्रोत का पाठ करना चाहिए। इससे नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।