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शहीद की मां बोली- चला गया मुंडा, अब मैं जी कर क्या करूंगी
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सारज सिंह की भाभी बलजिंदर कौर
- फोटो : POWAYAN
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शाहजहांपुर। सारज सिंह के शहीद होने की खबर मिलने के बाद से उनकी मां परमजीत कौर का हाल बेहाल है। परिवार के लोग और रिश्तेदार उनको संभालने में लगे हैं। वह बार-बार एक ही बात कह रही हैं कि मुंडा चला गया अब मैं जी कर क्या करूंगी। सारज सिंह भाइयों में सबसे छोटा होने के कारण मां का बेहद लाडला था। वह रोजाना मां को फोन कर हालचाल लेता रहता था। परमजीत कौर का स्वास्थ्य पहले से ही ठीक नहीं था, इस कारण उनको सोमवार को सारज सिंह के शहीद होने की जानकारी नहीं दी गई थी। संवाद
पिता को देश के लिए शहीद हुए अपने बेटे पर गर्व
सराज सिंह के पिता विचित्र सिंह बेटे की शहादत से बहुत दुखी हैं, लेकिन अपनी पत्नी परमजीत कौर की हालत देखते हुए वह खुद को सामान्य दर्शाते हुए उनको समझाते रहे। विचित्र सिंह ने कहा कि उनके तीनों बेटे सेना में थे। एक बेटा देश के दुश्मनों का मुकाबला करते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ, इसका उन्हें गर्व है। उनको गर्व है कि दुश्मनों का सामना होने पर उनके बेटे ने पैर पीछे नहीं हटाए और दुश्मनों का डटकर मुकाबला किया।
पिता विचित्र सिंह ने बताया कि सारज सिंह सबसे छोटा पुत्र था। वह बहुत ही मेहनती था। जब भी छुट्टी पर घर आता था, तो घर के सारे काम करता था। उन्होंने सारज को फौज में जाने से मना किया था, तो उसने कहा था कि देश की सेवा करनी है, इस कारण फौज में जरूर जाएगा। देश सेवा के लिए सेना से अच्छा कोई विकल्प नहीं है। विचित्र सिंह ने कहा कि पुत्र सारज सिंह की याद उनके जिंदा रहने तक सताती रहेगी।
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भाभी बोलीं- सरल स्वभाव का था देवर सारज
सारज सिंह के भाई सुखबीर सिंह की पत्नी सुखजिंदर कौर ने बताया कि उनका देवर सारज सिंह बहुत ही सरल स्वभाव का था। वह हमेशा फोन कर हालचाल पूछता रहता था। सारज के शहीद होने पर विश्वास नहीं हो रहा है, अब भी ऐसा लगता है कि देवर का फोन आता ही होगा। सारज सिंह के एक और भाई गुरप्रीत सिंह की पत्नी बलजिंदर कौर ने कहा कि देवर सारज सिंह का स्वभाव बहुत अच्छा था। वह देवर की तरह नहीं छोटे भाई की तरह व्यवहार करता था। वह जब भी फोन करता तो परिवार के सभी सदस्यों से बात करता था।
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पिता को देश के लिए शहीद हुए अपने बेटे पर गर्व
सराज सिंह के पिता विचित्र सिंह बेटे की शहादत से बहुत दुखी हैं, लेकिन अपनी पत्नी परमजीत कौर की हालत देखते हुए वह खुद को सामान्य दर्शाते हुए उनको समझाते रहे। विचित्र सिंह ने कहा कि उनके तीनों बेटे सेना में थे। एक बेटा देश के दुश्मनों का मुकाबला करते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ, इसका उन्हें गर्व है। उनको गर्व है कि दुश्मनों का सामना होने पर उनके बेटे ने पैर पीछे नहीं हटाए और दुश्मनों का डटकर मुकाबला किया।
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पिता विचित्र सिंह ने बताया कि सारज सिंह सबसे छोटा पुत्र था। वह बहुत ही मेहनती था। जब भी छुट्टी पर घर आता था, तो घर के सारे काम करता था। उन्होंने सारज को फौज में जाने से मना किया था, तो उसने कहा था कि देश की सेवा करनी है, इस कारण फौज में जरूर जाएगा। देश सेवा के लिए सेना से अच्छा कोई विकल्प नहीं है। विचित्र सिंह ने कहा कि पुत्र सारज सिंह की याद उनके जिंदा रहने तक सताती रहेगी।
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भाभी बोलीं- सरल स्वभाव का था देवर सारज
सारज सिंह के भाई सुखबीर सिंह की पत्नी सुखजिंदर कौर ने बताया कि उनका देवर सारज सिंह बहुत ही सरल स्वभाव का था। वह हमेशा फोन कर हालचाल पूछता रहता था। सारज के शहीद होने पर विश्वास नहीं हो रहा है, अब भी ऐसा लगता है कि देवर का फोन आता ही होगा। सारज सिंह के एक और भाई गुरप्रीत सिंह की पत्नी बलजिंदर कौर ने कहा कि देवर सारज सिंह का स्वभाव बहुत अच्छा था। वह देवर की तरह नहीं छोटे भाई की तरह व्यवहार करता था। वह जब भी फोन करता तो परिवार के सभी सदस्यों से बात करता था।

सारज सिंह की भाभी सुखजिंदर कौर- फोटो : POWAYAN

सारज सिंह के पिता विचित्र सिंह- फोटो : POWAYAN

सारज सिंह की मां परमजीत कौर- फोटो : POWAYAN