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Bareilly News: आय से अधिक संपत्ति मामले में पीलीभीत के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक दोषमुक्त
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बरेली। स्पेशल जज भ्रष्टाचार उन्मूलन कमलेश्वर पांडेय ने आय से अधिक संपत्ति मामले में पीलीभीत के तत्कालीन ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक नंदलाल को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है। उत्तर प्रदेश सतर्कता अनुष्ठान ने उनके खिलाफ खुली जांच का आदेश दिया था। जांच के दौरान पाया गया कि उन्होंने नवंबर 1999 से दिसंबर 2016 के बीच कुल के अनुपात में 29.14 लाख रुपये खर्च किए।
सतर्कता अधिष्ठान के तत्कालीन निरीक्षक अमर सिंह ने नंदलाल के खिलाफ दो अगस्त 2018 को पीलीभीत के सुनगढ़ी थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई। बताया गया कि नंदलाल ने लोक सेवक के रूप में कार्यरत रहते हुए अपनी आय के समस्त ज्ञात व वैध स्रोतों से 56.74 लाख रुपये की आय अर्जित की, लेकिन इस अवधि में उन्होंने परिसम्पत्तियों के अर्जन, भरण-पोषण समेत अन्य पर कुल 85.88 रुपये व्यय किए। यह राशि आय के सापेक्ष 29.14 लाख रुपये अधिक है। इसके संबंध में नंदलाल कोई स्पष्टीकरण नहीं दे सके।
जांच के बाद सतर्कता अधिष्ठान ने सितंबर 2022 में चार्जशीट दाखिल कर दी। सुनवाई के दौरान 30 गवाह पेश किए। इनमें बैंक शाखाओं के प्रबंधक, गन्ना विभाग के अधिकारी आदि शामिल रहे। सुनवाई के दौरान आठ गवाहों ने बयान दिया कि संबंधित मामले में जांच अधिकारी ने उनका कोई बयान नहीं लिया। विवेचना में भी खामियां सामने आईं। आय-व्यय की सही राशि न जोड़ पाने के संबंध में भी विवेचक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। जो मकान 2013 में निर्माण कराया गया था उसका आकलन 2016 के बाजार मूल्य की दर से किया गया। कोर्ट ने माना कि जांच त्रुटिपूर्ण है और निष्पक्ष जांच के बिना आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।
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सतर्कता अधिष्ठान के तत्कालीन निरीक्षक अमर सिंह ने नंदलाल के खिलाफ दो अगस्त 2018 को पीलीभीत के सुनगढ़ी थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई। बताया गया कि नंदलाल ने लोक सेवक के रूप में कार्यरत रहते हुए अपनी आय के समस्त ज्ञात व वैध स्रोतों से 56.74 लाख रुपये की आय अर्जित की, लेकिन इस अवधि में उन्होंने परिसम्पत्तियों के अर्जन, भरण-पोषण समेत अन्य पर कुल 85.88 रुपये व्यय किए। यह राशि आय के सापेक्ष 29.14 लाख रुपये अधिक है। इसके संबंध में नंदलाल कोई स्पष्टीकरण नहीं दे सके।
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जांच के बाद सतर्कता अधिष्ठान ने सितंबर 2022 में चार्जशीट दाखिल कर दी। सुनवाई के दौरान 30 गवाह पेश किए। इनमें बैंक शाखाओं के प्रबंधक, गन्ना विभाग के अधिकारी आदि शामिल रहे। सुनवाई के दौरान आठ गवाहों ने बयान दिया कि संबंधित मामले में जांच अधिकारी ने उनका कोई बयान नहीं लिया। विवेचना में भी खामियां सामने आईं। आय-व्यय की सही राशि न जोड़ पाने के संबंध में भी विवेचक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। जो मकान 2013 में निर्माण कराया गया था उसका आकलन 2016 के बाजार मूल्य की दर से किया गया। कोर्ट ने माना कि जांच त्रुटिपूर्ण है और निष्पक्ष जांच के बिना आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।
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