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Bareilly News: आत्मनिर्भर कारागार... जैविक सब्जियां उगा कैदी कर रहे कमाई, आठ जेलों के बंदियों का भर रहे पेट
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- बरेली मंडल की पांच जेलों के साथ ही रामपुर, बिजनौर और मुरादाबाद के कारागारों को भी की जाती है सब्जियों की आपूर्ति
बरेली। बरेली की सेंट्रल जेल खाद्यान्न और सब्जियों के मामले में आत्मनिर्भर है। साथ ही, आठ अन्य कारागारों के बंदियों का भी पेट भर रही है। यहां बने 68 एकड़ के फार्म हाउस में कैदी अनाज और सब्जियां उगाते हैं। यहां से बरेली मंडल की पांच जेलों के साथ ही रामपुर, बिजनौर व मुरादाबाद की जेलों को भी सब्जियों की आपूर्ति की जाती है।
जेल परिसर में गोशाला भी है। इसमें 150 पशु हैं। इनके दूध का इस्तेमाल कैदी ही करते हैं। गोबर से परिसर में ही जैविक खाद तैयार की जाती है। इसी खाद का प्रयोग खेती में किया जाता है। फार्म हाउस में पसीना बहाने वाले कैदियों को दक्षता के मुताबिक रोज 50, 65 व 81 रुपये मेहनताना भी दिया जाता है।
ब्रिटिश शासनकाल में ईस्ट इंडिया कंपनी के अफसरों ने लंबी अवधि के कैदियों को रखने के लिए वर्ष 1848 में इस जेल का निर्माण कराया था। अब भी इसमें ज्यादातर सजायाफ्ता बंदी रखे जाते हैं। जेल के फार्म हाउस में इन दिनों बैंगन, बंदगोभी, गांठ गोभी, फूल गोभी, शलजम, मूली, पालक, सरसों का साग और टमाटर जैसी मौसमी सब्जियों की बहार है।
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फार्म हाउस के 29 एकड़ हिस्से में आलू की पौध तैयार खड़ी है। जेलर नीरज कुमार के मुताबिक, दो कर्मचारियों की निगरानी में पुराने व विश्वासपात्र कैदियों से खेती में सहयोग लिया जाता है। इसके लिए कैदियों को जेल मैनुअल के मुताबिक भत्ता दिया जाता है।
बीज विकास निगम भी करता है अनुसंधान
जेल के फार्म हाउस में 10 एकड़ जमीन बीज विकास निगम को शोध कार्य के लिए दे दी गई है। निगम के अधिकारी नए व उन्नतिशील बीजों की पैदावार के लिहाज से इस जमीन पर फसलें बोते हैं और उन पर प्रयोग करते रहते हैं। इसमें भी कैदियों का सहयोग लिया जाता है।
जेल के फार्म हाउस से सब्जियां बरेली मंडल की जेलों में भेजी जाती हैं। मुरादाबाद, रामपुर व बिजनौर की जेलों को भी मांग के आधार सब्जियों की आपूर्ति की जाती है। जैविक तरीके से ही सब्जियां उगाई जाती हैं। इन दिनों काफी मात्रा में सब्जियां तैयार हो रही हैं। हर तीसरे दिन संबंधित जेलों के वाहनों में उन्हें लदवाकर भेजा जाता है। - अविनाश गौतम, वरिष्ठ अधीक्षक, सेंट्रल जेल
अमर उजाला ब्यूरो
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बरेली। बरेली की सेंट्रल जेल खाद्यान्न और सब्जियों के मामले में आत्मनिर्भर है। साथ ही, आठ अन्य कारागारों के बंदियों का भी पेट भर रही है। यहां बने 68 एकड़ के फार्म हाउस में कैदी अनाज और सब्जियां उगाते हैं। यहां से बरेली मंडल की पांच जेलों के साथ ही रामपुर, बिजनौर व मुरादाबाद की जेलों को भी सब्जियों की आपूर्ति की जाती है।
जेल परिसर में गोशाला भी है। इसमें 150 पशु हैं। इनके दूध का इस्तेमाल कैदी ही करते हैं। गोबर से परिसर में ही जैविक खाद तैयार की जाती है। इसी खाद का प्रयोग खेती में किया जाता है। फार्म हाउस में पसीना बहाने वाले कैदियों को दक्षता के मुताबिक रोज 50, 65 व 81 रुपये मेहनताना भी दिया जाता है।
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ब्रिटिश शासनकाल में ईस्ट इंडिया कंपनी के अफसरों ने लंबी अवधि के कैदियों को रखने के लिए वर्ष 1848 में इस जेल का निर्माण कराया था। अब भी इसमें ज्यादातर सजायाफ्ता बंदी रखे जाते हैं। जेल के फार्म हाउस में इन दिनों बैंगन, बंदगोभी, गांठ गोभी, फूल गोभी, शलजम, मूली, पालक, सरसों का साग और टमाटर जैसी मौसमी सब्जियों की बहार है।
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फार्म हाउस के 29 एकड़ हिस्से में आलू की पौध तैयार खड़ी है। जेलर नीरज कुमार के मुताबिक, दो कर्मचारियों की निगरानी में पुराने व विश्वासपात्र कैदियों से खेती में सहयोग लिया जाता है। इसके लिए कैदियों को जेल मैनुअल के मुताबिक भत्ता दिया जाता है।
बीज विकास निगम भी करता है अनुसंधान
जेल के फार्म हाउस में 10 एकड़ जमीन बीज विकास निगम को शोध कार्य के लिए दे दी गई है। निगम के अधिकारी नए व उन्नतिशील बीजों की पैदावार के लिहाज से इस जमीन पर फसलें बोते हैं और उन पर प्रयोग करते रहते हैं। इसमें भी कैदियों का सहयोग लिया जाता है।
जेल के फार्म हाउस से सब्जियां बरेली मंडल की जेलों में भेजी जाती हैं। मुरादाबाद, रामपुर व बिजनौर की जेलों को भी मांग के आधार सब्जियों की आपूर्ति की जाती है। जैविक तरीके से ही सब्जियां उगाई जाती हैं। इन दिनों काफी मात्रा में सब्जियां तैयार हो रही हैं। हर तीसरे दिन संबंधित जेलों के वाहनों में उन्हें लदवाकर भेजा जाता है। - अविनाश गौतम, वरिष्ठ अधीक्षक, सेंट्रल जेल
अमर उजाला ब्यूरो