फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Scientists engaged in saving animals from the troubles of vaccine testing

Bareilly News: वैक्सीन परीक्षण की तकलीफ से पशुओं को निजात दिलाने में जुटे वैज्ञानिक

Wed, 04 Oct 2023 01:49 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Wed, 04 Oct 2023 01:49 AM IST
विज्ञापन
Scientists engaged in saving animals from the troubles of vaccine testing
बरेली। लैब में तैयार वैक्सीन के परीक्षण के दौरान बेजुबान पशुओं का जीवन दांव पर होता है। उनको बेहिसाब दर्द से गुजरना पड़ता है। पशुओं को इससे निजात दिलाने के लिए वैज्ञानिक अब वैकल्पिक मॉडल तैयार करने में जुटे हैं।
विज्ञापन

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर के जैविक मानकीकरण विभाग के विभागाध्यक्ष प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रणव धर के मुताबिक किसी वैक्सीन की जांच के लिए उन्हें पशुओं में चैलेंज करना पड़ता है या फिर विभाग में मौजूद वैकल्पिक मॉडल पर परीक्षण करते हैं। जिनके मॉडल नहीं हैं, उसमें अभी जांच चल रही है। जैसे कि गंबोरो डिजीज, रैबीज आदि। अब वैकल्पिक मॉडल खोजे जा रहे हैं, ताकि सीधे तौर पर पशु-पक्षियों को दर्द देने के बजाय वैकल्पिक मॉडल पर वैक्सीन के असर की जांच हो सके।
विज्ञापन


सूअर की वैक्सीन का वैकल्पिक मॉडल तैयार
क्लासिकल स्वाइन फीवर वैक्सीन के परीक्षण के लिए वैकल्पिक मॉडल तैयार करने में जैविक मानकीकरण विभाग ने सफलता हासिल कर ली है। लिहाजा, अब सूअर में चैलेंज की जरूरत नहीं। सीधे सेल कल्चर में परीक्षण हो सकता है। इस मॉडल को तैयार करने में डॉ. प्रणव धर टीम लीडर रहे। अब भविष्य में और वैक्सीन के परीक्षण के लिए वैज्ञानिक अन्य वैकल्पिक मॉडल तैयार करने में जुटे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


फोटो: परीक्षण में सफल होने पर ही बाजार में पहुंचती हैं वैक्सीन
डॉ. प्रणव धर के मुताबिक नेशनल एनिमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनएडीसीपी) ने जैविक मानकीकरण विभाग को चार बीमारियों के वैक्सीन की परीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी है। इसमें एफएमडी, ब्रूसेलोसिस, पीपीआर, क्लासिकल स्वाइन फीवर शामिल हैं। साथ ही, देश की नौ निजी कंपनियों और 20 से ज्यादा सरकारी प्रयोगशाला से तैयार वैक्सीन का भी परीक्षण हो रहा है। इन संस्थानों में जो वैक्सीन तैयार होती है, उनके प्रथम तीन बैच का परीक्षण इसी विभाग में होता है। यहां से सफल होने पर ही वैक्सीन को बाजार में पहुंचाने का लाइसेंस मिलता है। पिछले साल एफएमडी वैक्सीन के 18 बैच, ब्रूसेलोसिस के 128 बैच, पीपीआर के 33, सीएसएफ के 14 बैच का परीक्षण किया। इसके अलावा ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से भेजे गए 61 सैंपल का परीक्षण किया। इसमें सबसे ज्यादा पोल्ट्री के 20, अन्य जानवरों के 16, एंटीजन के 17, बैक्टीरियल के आठ बैच शामिल रहे।

विदेश से आने वाली वैक्सीन का भी हो रहा परीक्षण
जैविक मानकीकरण विभाग में स्वदेशी के अलावा नीदरलैंड, ब्राजील, स्पेन, इटली, इंडोनेशिया, फ्रांस, साउथ कोरिया व अन्य देशों से आयातित वैक्सीन का भी परीक्षण हो रहा है। वैक्सीन और सैंपल परीक्षण का कार्य डॉ. प्रणव धर और उनकी टीम में शामिल प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सलाउद्दीन कुरैशी, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विक्रमादित्य उपमन्यु, वैज्ञानिक डॉ. सोनालिका महाजन, वैज्ञानिक डॉ. साइमा के लतीफ संयुक्त रूप से कर रहे हैं।


फोटो : विभाग का होगा विस्तार ताकि देश
की मांग के अनुसार हो सके परीक्षण
आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के मुताबिक प्रधानमंत्री की ओर से चल रही निशुल्क टीकाकरण मुहिम तभी सफल होगी जब वैक्सीन गुणवत्तापूर्ण होगी। गुणवत्ता की जांच का कार्य आईवीआरआई कर रहा है। यह संस्थान की जिम्मेदारी है कि भविष्य में जितनी मात्रा में वैक्सीन की जरूरत होगी, उसे टेस्ट करें। लिहाजा, जैविक मानकीकरण विभाग के विस्तार की जरूरत है, ताकि देश की जरूरत के मुताबिक गुणवत्तापूर्ण वैक्सीन की जांच और उसकी पूर्ति हो सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed