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स्कूल खुले: मात्र दो फीसदी बच्चे पहुंचे स्कूल
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सनातन धर्म उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मे लम्बे समय बाद लौटे बच्चो में ख़ुशी देखने लायक थी।
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बरेली। मंगलवार को करीब चार माह बाद स्कूल खुलने से बड़ी तादाद में बच्चों की कक्षा में उपस्थिति की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकारी स्कूलों में सन्नाटा पसरा रहा। शिक्षक बच्चों का इंतजार करते दिखे। निजी स्कूलों में करीब दो फीसदी ही बच्चों की उपस्थिति दर्ज की गई। उधर, अभिभावकों ने जिले के कोरोना मुक्त होने पर ही बच्चों को स्कूल भेजने की बात कही है।
शासनादेश के तहत 16 अगस्त से कक्षा नौ से 12वीं तक के स्कूल खुले थे। स्कूलों में बड़ी तादाद में बच्चों की उपस्थिति दर्ज होने से निजी स्कूल संचालक खासा उत्साहित रहे। उम्मीद थी कि दूसरे चरण में यानी 24 अगस्त से कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं शुरू होने पर भी बच्चों की अच्छी उपस्थिति रहेगी। मगर, माहौल ठीक इसके उल्टा दिखाई दिया। शहर के सभी बड़े और छोटे निजी स्कूलों में कुछ ही कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति दर्ज हुई। वह भी एक कक्षा के छात्रों के सापेक्ष महज दो से पांच फीसदी तक ही रही। सरकारी स्कूलों में शिक्षक समय से पहुंचकर दोपहर तक बच्चों का इंतजार करते रहे।
भरतौल जूनियर हाईस्कूल में सुबह सात बजे ही इंचार्ज शोभा कटियार और अन्य शिक्षिकाएं पहुंच र्गइं थीं। कक्षा सात में सिर्फ चार ही विद्यार्थी पहुंचे थे। वह भी करीब 11 बजे घर चले गए। शोभा ने बताया कि बच्चों को मिड-डे मील देने के लिए राशन आदि लेकर आईं थीं, पर जब बच्चे ही नहीं पहुंचे तो भोजन नहीं बनवाया। परिसर में साफ सफाई समेत कोविड प्रोटोकॉल की व्यवस्था रही।
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बच्चे स्कूलों में मित्रों से घुलेंगे-मिलेंगे तो खतरा होगा
अभिभावकों के मुताबिक कक्षा नौ से 12 तक के बच्चे बड़े हो जाते हैं। उन्हें कोई हिदायत दी जाती है तो वह ध्यान में रखते हैं, जबकि कक्षा छह से आठ तक के बच्चों में समझ इतनी विकसित नहीं होती है। अगर उनके मित्र स्कूल में मिलेंगे तो वे उनसे घुलने मिलने लगेंगे। ऐसे में कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं होगा। वहीं, बारिश के मौसम में भीगने से बीमार होने की आशंका भी थी, लिहाजा बच्चों को स्कूल नहीं भेजा।
दो तीन दिन बाद बढ़ जाएगी बच्चों की तादाद
स्कूल संचालकों के मुताबिक, मंगलवार सुबह से ही बारिश हो रही थी। दिन भर यही माहौल रहा। लिहाजा, तमाम अभिभावकों ने बच्चों को भीगने के डर से स्कूल नहीं भेजा। वहीं, कुछ अभिभावक अभी ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा न मिलने की वजह से भी बच्चों को स्कूल नहीं भेज सके हैं। स्कूल संचालकों ने तीन-चार दिन बाद अच्छी तादाद में बच्चों के स्कूल पहुंचने पर परिसर गुलजार होने की उम्मीद जताई है।
बच्चों की संख्या पहले दिन कम होने की कई वजह रहीं। सुबह से बारिश और ट्रांसपोर्टेशन की दिक्कत रही। लिहाजा, तीन दिन बाद ही तादाद बढ़ेगी।
- पारुष अरोरा, अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
--
पहले दिन कुछ ही छात्राएं स्कूल आईं थीं। जूनियर हाईस्कूल के सभी शिक्षक स्कूल आ गए थे। अभिभावकों को अब बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए।
- रामश्री गंगवार, प्रधानाचार्य, द्रौपदी कन्या इंटर कॉलेज
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हमारा उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा देना है। पहला दिन होने से कई बच्चे स्कूल नहीं पहुंचे। जो बच्चे नहीं आए, उनकी ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था थी। - वीके मिश्र, प्रिंसिपल, दिल्ली पब्लिक स्कूल
बच्चों की बात
कोरोना से बचने के लिए मैंने मास्क लगाया था और सैनिटाइजर भी साथ लेकर आया। बहुत दिन से घर पर ही थे, स्कूल आकर मुझे काफी अच्छा लगा। - ईशांत, छात्र, कक्षा सात
--
घर पर रहते हुए ऑनलाइन क्लास चल रही थी, लेकिन वहां सही से पढ़ाई नहीं हो रही थी। अब स्कूल खुल गए हैं तो सभी को स्कूल आकर पढ़ाई करनी चाहिए। - काजल, छात्रा, कक्षा सात
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पढ़ाई घर के बजाय स्कूल में ही बेहतर तरीके से होती है। घर हो या स्कूल कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए हमें खुद ही ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। - शबनान, छात्र, कक्षा नौ
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कोरोना के मामले अब बहुत कम हैं। अगर हम सावधानी बरतेंगे तो संक्रमित नहीं होंगे। स्कूल में पढ़ने में सहूलियत रहती है। कोई दिक्कत हो तो तुरंत पूछ सकते हैं। - अरीबा, छात्रा, क क्षा नौ
अभिभावक बोले
अगर स्कूलों में पूरी एहतियात बरती जाए और प्रबंधन बच्चों को सुरक्षित रखने का भरोसा दिलाए तो बच्चों को स्कूल भेजने से अभिभावक पीछ़ ेक्यों हटेंगे। - अनुभव गुप्ता, अभिभावक, बरेली
--
अभी कोरोना थमा नहीं है, ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजने में घबराहट होना लाजिमी है। बच्चों के संक्रमित होने और इलाज की जिम्मेदारी स्कूलों को लेनी होगी। - रामकुमार, अभिभावक, बदायूं रोड
--
बरेली अभी कोरोना मुक्त नहीं हुआ है, इसलिए बच्चों को स्कूल नहीं जाने दिया। जब संक्रमण कम होगा और बच्चों के सुरक्षित होने का भरोसा होगा तो भेजेंगे। - राशु अग्रवाल, अभिभावक, रामपुर गार्डन
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शासनादेश के तहत 16 अगस्त से कक्षा नौ से 12वीं तक के स्कूल खुले थे। स्कूलों में बड़ी तादाद में बच्चों की उपस्थिति दर्ज होने से निजी स्कूल संचालक खासा उत्साहित रहे। उम्मीद थी कि दूसरे चरण में यानी 24 अगस्त से कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं शुरू होने पर भी बच्चों की अच्छी उपस्थिति रहेगी। मगर, माहौल ठीक इसके उल्टा दिखाई दिया। शहर के सभी बड़े और छोटे निजी स्कूलों में कुछ ही कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति दर्ज हुई। वह भी एक कक्षा के छात्रों के सापेक्ष महज दो से पांच फीसदी तक ही रही। सरकारी स्कूलों में शिक्षक समय से पहुंचकर दोपहर तक बच्चों का इंतजार करते रहे।
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भरतौल जूनियर हाईस्कूल में सुबह सात बजे ही इंचार्ज शोभा कटियार और अन्य शिक्षिकाएं पहुंच र्गइं थीं। कक्षा सात में सिर्फ चार ही विद्यार्थी पहुंचे थे। वह भी करीब 11 बजे घर चले गए। शोभा ने बताया कि बच्चों को मिड-डे मील देने के लिए राशन आदि लेकर आईं थीं, पर जब बच्चे ही नहीं पहुंचे तो भोजन नहीं बनवाया। परिसर में साफ सफाई समेत कोविड प्रोटोकॉल की व्यवस्था रही।
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बच्चे स्कूलों में मित्रों से घुलेंगे-मिलेंगे तो खतरा होगा
अभिभावकों के मुताबिक कक्षा नौ से 12 तक के बच्चे बड़े हो जाते हैं। उन्हें कोई हिदायत दी जाती है तो वह ध्यान में रखते हैं, जबकि कक्षा छह से आठ तक के बच्चों में समझ इतनी विकसित नहीं होती है। अगर उनके मित्र स्कूल में मिलेंगे तो वे उनसे घुलने मिलने लगेंगे। ऐसे में कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं होगा। वहीं, बारिश के मौसम में भीगने से बीमार होने की आशंका भी थी, लिहाजा बच्चों को स्कूल नहीं भेजा।
दो तीन दिन बाद बढ़ जाएगी बच्चों की तादाद
स्कूल संचालकों के मुताबिक, मंगलवार सुबह से ही बारिश हो रही थी। दिन भर यही माहौल रहा। लिहाजा, तमाम अभिभावकों ने बच्चों को भीगने के डर से स्कूल नहीं भेजा। वहीं, कुछ अभिभावक अभी ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा न मिलने की वजह से भी बच्चों को स्कूल नहीं भेज सके हैं। स्कूल संचालकों ने तीन-चार दिन बाद अच्छी तादाद में बच्चों के स्कूल पहुंचने पर परिसर गुलजार होने की उम्मीद जताई है।
बच्चों की संख्या पहले दिन कम होने की कई वजह रहीं। सुबह से बारिश और ट्रांसपोर्टेशन की दिक्कत रही। लिहाजा, तीन दिन बाद ही तादाद बढ़ेगी।
- पारुष अरोरा, अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
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पहले दिन कुछ ही छात्राएं स्कूल आईं थीं। जूनियर हाईस्कूल के सभी शिक्षक स्कूल आ गए थे। अभिभावकों को अब बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए।
- रामश्री गंगवार, प्रधानाचार्य, द्रौपदी कन्या इंटर कॉलेज
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हमारा उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा देना है। पहला दिन होने से कई बच्चे स्कूल नहीं पहुंचे। जो बच्चे नहीं आए, उनकी ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था थी। - वीके मिश्र, प्रिंसिपल, दिल्ली पब्लिक स्कूल
बच्चों की बात
कोरोना से बचने के लिए मैंने मास्क लगाया था और सैनिटाइजर भी साथ लेकर आया। बहुत दिन से घर पर ही थे, स्कूल आकर मुझे काफी अच्छा लगा। - ईशांत, छात्र, कक्षा सात
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घर पर रहते हुए ऑनलाइन क्लास चल रही थी, लेकिन वहां सही से पढ़ाई नहीं हो रही थी। अब स्कूल खुल गए हैं तो सभी को स्कूल आकर पढ़ाई करनी चाहिए। - काजल, छात्रा, कक्षा सात
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पढ़ाई घर के बजाय स्कूल में ही बेहतर तरीके से होती है। घर हो या स्कूल कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए हमें खुद ही ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। - शबनान, छात्र, कक्षा नौ
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कोरोना के मामले अब बहुत कम हैं। अगर हम सावधानी बरतेंगे तो संक्रमित नहीं होंगे। स्कूल में पढ़ने में सहूलियत रहती है। कोई दिक्कत हो तो तुरंत पूछ सकते हैं। - अरीबा, छात्रा, क क्षा नौ
अभिभावक बोले
अगर स्कूलों में पूरी एहतियात बरती जाए और प्रबंधन बच्चों को सुरक्षित रखने का भरोसा दिलाए तो बच्चों को स्कूल भेजने से अभिभावक पीछ़ ेक्यों हटेंगे। - अनुभव गुप्ता, अभिभावक, बरेली
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अभी कोरोना थमा नहीं है, ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजने में घबराहट होना लाजिमी है। बच्चों के संक्रमित होने और इलाज की जिम्मेदारी स्कूलों को लेनी होगी। - रामकुमार, अभिभावक, बदायूं रोड
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बरेली अभी कोरोना मुक्त नहीं हुआ है, इसलिए बच्चों को स्कूल नहीं जाने दिया। जब संक्रमण कम होगा और बच्चों के सुरक्षित होने का भरोसा होगा तो भेजेंगे। - राशु अग्रवाल, अभिभावक, रामपुर गार्डन