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कैसी है पाठशाला: बरेली में सरकारी स्कूलों के भवन बदहाल, सुविधाएं गिन रहीं उल्टी गिनती

Sat, 02 Aug 2025 02:11 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Sat, 02 Aug 2025 02:11 PM IST
सार

बरेली में कैसी है पाठशाला अभियान के तहत अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को बिहारीपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय मॉडल किशोर बाजार और सूफी टोला के प्राथमिक विद्यालय प्रथम की पड़ताल की। दोनों विद्यालयों में स्थिति डराने वाली है। 

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School building is in bad shape... facilities are counting down
सूफी टोला प्राथमिक विद्यालय में जर्जर भवन से बना हुआ खतरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली के बिहारीपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय मॉडल किशोर बाजार में अव्यवस्थाएं हावी हैं। चार में से तीन की दीवारें दरक चुकी हैं। लिंटर से सरिया झांक रही है। खंडहर भवन के पास ही बच्चों के लिए शौचालय बनाया है, जिससे छात्र-छात्राओं को हर समय हादसे का डर रहता है। हाल यह हैं कि बदहाल व्यवस्था के आगे सुविधाएं भी उल्टी गिनती गिन रही हैं।    

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कैसी है पाठशाला अभियान के तहत परिषदीय विद्यालयों की पड़ताल करने के लिए शुक्रवार की दोपहर करीब एक बजे टीम बिहारीपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय मॉडल किशोर बाजार पहुंची। प्रवेश करते ही सामने 2006 में बना स्कूल भवन था, लेकिन 19 वर्षों में ही इसके चार में से तीन कमरे जर्जर होने के कारण बंद थे। पता चला कि लिंटर में दरारें आ गईं थीं। हादसे की आशंका के चलते बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। बिजली न आने के कारण बच्चे हाथ में पंखा लिए नजर आए। 
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स्मार्ट क्लास वाले कमरे में जगह-जगह से लिंटर टूट कर गिर रहा है। शिक्षिका प्रतिभा सक्सेना ने बताया कि स्कूल में प्राथमिक विद्यालय चौपुला और किशोर बाजार द्वितीय दोनों का विलय किया जा चुका है। ऐसे में 151 विद्यार्थी इस विद्यालय में पंजीकृत हैं। 

प्रधानध्यापक अरुणेश कुमार शर्मा ने बताया कि बीते सोमवार को कमरे के प्लास्टर गिरा था। शुक्र था कि स्कूल में छुट्टी होने के कारण कमरा बंद था। छत और दीवारों में सीलन भी आ रही है। बारिश में कमरे में बैठना खतरे से खाली नहीं है।  

School building is in bad shape... facilities are counting down
जर्जर भवन में प्राथमिक विद्यालय मॉडल किशोर में पढ़ाई करते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
खंडहर के खतरे के बीच चल रहा है सूफी टोला प्राथमिक विद्यालय
सूफी टोला के प्राथमिक विद्यालय प्रथम में बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर हैं। स्कूल परिसर में एक पुराना और जर्जर भवन है, जो कभी भी गिर सकता है। इसी खंडहर के बगल में कक्षाएं संचालित हो रहीं हैं। जब हमारी टीम करीब 1:30 बजे स्कूल पहुंची, तो देखा कि सामने ही एक जर्जर कमरा है। पुरानी दीवार पर लगीं ईंटों पर 1931 लिखा हुआ है, जिससे पता चलता है कि यह स्कूल ब्रिटिश शासन के समय का है। स्कूल में कुल तीन कमरे हैं, इनमें से एक स्मार्ट क्लासरूम है। 

सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि पुराने खंडहर के ठीक पीछे ही कक्षाएं हैं। अगर जर्जर भवन गिरता है, तो यह कक्षाएं भी उसकी चपेट में आ सकती हैं। इससे बड़ा हादसा होने का डर हमेशा बना रहता है। इस विद्यालय में सहायक अध्यापिका सबा मिर्जा अकेली ही 51 बच्चों को पढ़ा रहीं हैं। उन्होंने बताया कि जर्जर भवन को गिराकर उसकी जगह रसोई बनाने के लिए विभाग को पत्र लिखा है। जिलाधिकारी ने भी इसकी अनुमति दे दी है और जल्द ही इसी पुरानी ईंटों का इस्तेमाल करके रसोई का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
 

बीएसए संजय सिंह ने बताया कि सभी बीईओ को पत्र जारी कर जर्जर भवनों को चिह्नित किया जा रहा है। इसके लिए लगातार हमारी टीम भी निरीक्षण कर रही है। जल्द ही ऐसे सभी विद्यालयों को ध्वस्त कराया जाएगा। 

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