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वेतन कटौती के विरोध में जंक्शन पर हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मी
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बरेली जंक्शन पर प्रदर्शन करते सफाई कर्मी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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वेतन न मिला तो भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएगा सफाई कर्मियों का परिवार
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बरेली। वेतन न मिलने पर जंक्शन के सफाई कर्मचारी धरने पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि मार्च में पूरे महीने काम करने के बाद भी आधा वेतन दिया। अप्रैल में लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन वेतन मिलने के आसार नहीं। उनका कहना है कि वेतन न मिलने पर वह धरने पर बैठे रहेंगे।
जंक्शन पर सफाई व्यवस्था का ठेका लखनऊ की किंग सिक्योरिटी का है। तीन शिफ्टों में करीब डेढ़ सौ कर्मचारी काम करते हैं। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद कुछ ट्रेनें चलती रहीं। रेलवे कर्मचारी काम कर रहे थे। इसके बाद भी ठेकेदार ने अप्रैल में मार्च का वेतन काटकर दिया। अब अप्रैल के पहले सप्ताह में ही जंक्शन को सील कर दिया गया। इसके बाद भी पार्सल स्पेशल ट्रेनों के रुकने और गुजरने से प्लेटफार्म और पटरियों की सफाई लगातार होती रही। अब वेतन मिलने के आसार नहीं हैं। सफाई कर्मी रिंकू, महेश वाल्मीकि, वंशी वाल्मीकि, सुरेंद्र वाल्मीकि, सुनील वाल्मीकि आदि ने बताया कि उन्हें पांच सौ रुपये रोजाना के हिसाब से भुगतान होता है, लेकिन ठेकेदार और मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक की मिलीभगत से वेतन काटकर मिलता है। सफाई कर्मियों का कहना है कि वेतन न मिलने से वह भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे। महानगर युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राकेश सक्सेना ने कहा कि वेतन कटौती का पुरजोर विरोध किया जाएगा। इस मामले को प्रधानमंत्री और रेलमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। इस संबंध में मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक राजीव श्रीवास्तव से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
जंक्शन पर सफाई व्यवस्था का ठेका लखनऊ की किंग सिक्योरिटी का है। तीन शिफ्टों में करीब डेढ़ सौ कर्मचारी काम करते हैं। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद कुछ ट्रेनें चलती रहीं। रेलवे कर्मचारी काम कर रहे थे। इसके बाद भी ठेकेदार ने अप्रैल में मार्च का वेतन काटकर दिया। अब अप्रैल के पहले सप्ताह में ही जंक्शन को सील कर दिया गया। इसके बाद भी पार्सल स्पेशल ट्रेनों के रुकने और गुजरने से प्लेटफार्म और पटरियों की सफाई लगातार होती रही। अब वेतन मिलने के आसार नहीं हैं। सफाई कर्मी रिंकू, महेश वाल्मीकि, वंशी वाल्मीकि, सुरेंद्र वाल्मीकि, सुनील वाल्मीकि आदि ने बताया कि उन्हें पांच सौ रुपये रोजाना के हिसाब से भुगतान होता है, लेकिन ठेकेदार और मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक की मिलीभगत से वेतन काटकर मिलता है। सफाई कर्मियों का कहना है कि वेतन न मिलने से वह भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे। महानगर युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राकेश सक्सेना ने कहा कि वेतन कटौती का पुरजोर विरोध किया जाएगा। इस मामले को प्रधानमंत्री और रेलमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। इस संबंध में मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक राजीव श्रीवास्तव से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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