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Metro Rail: बरेली में लाइट मेट्रो की राह में बाधा, अब अफसर बना रहे मेट्रो चलाने की योजना

Fri, 14 Jun 2024 07:47 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 14 Jun 2024 07:47 AM IST
सार

बरेली में सर्वे के दौरान लाइट मेट्रो की राह में कई बाधाएं सामने आई हैं। अब प्रशासनिक अधिकारी लाइट मेट्रो की जगह सिर्फ मेट्रो का ही प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेजने की योजना बना रहे हैं। 

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sarvey begins for metro rail project in Bareilly
मेट्रो - फोटो : विभाग

विस्तार

बरेली में लाइट मेट्रो की जगह अब मेट्रो चलाने की कवायद शुरू हो गई है। इस प्रस्ताव पर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में बैठक बुलाकर फैसला किया जाएगा। इसके साथ ही बीडीए की ओर से अक्तूबर तक प्रोजेक्ट की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करवाकर शासन को भेजने की योजना है। प्रोजेक्ट को लेकर विशेषज्ञों की टीम सर्वे भी कर चुकी है। इसमें आने वाली बाधाओं का हल इंजीनियरों की टीम निकालने में लगी है।

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अधिकारियों के अनुसार मेट्रो तीन तरह की चलती हैं। इसमें मेट्रो, लाइट मेट्रो और मेट्रो नियो शामिल हैं। भारत के किसी भी शहर में लाइट मेट्रो की सेवाएं अभी तक नहीं हैं। इसकी वजह है इंटीरियर, ट्रैक, बोगी, इलेक्ट्रिक वॉल आदि। लाइट मेट्रो में प्रयोग होने वाला अधिकतर यह सामान विदेशों से एक्सपोर्ट करना पड़ता है। इससे प्रोजेक्ट की रकम चार गुना तक बढ़ जाएगी।
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वहीं सामान्य मेट्रो के लिए भारतीय एजेंसियों से ही अधिकतर काम लिया जा सकता है। ऐसे में अब प्रशासनिक अधिकारी लाइट मेट्रो की जगह सिर्फ मेट्रो का ही प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेजने की योजना बना रहे हैं। इस पर अंतिम फैसला मंडलायुक्त की अध्यक्षता में होने वाली दूसरी बैठक में लिया जाएगा।

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sarvey begins for metro rail project in Bareilly
मेट्रो का मैप - फोटो : अमर उजाला

जमीन को लेकर दुविधा 
बुधवार को मेट्रो के फेज-एक के रूट का टीम ने सर्वे किया था। इसके अलावा टीम ने मेट्रो यार्ड के लिए जगह को भी तलाशा है। इसमें दो जगहों पर मुहर तो लगी है, लेकिन इनमें से एक ही जगह पर यार्ड बनाया जाएगा। सर्वे टीम ने आईवीआरआई और रुहेलखंड विश्वविद्यालय की जमीन को मेट्रो यार्ड बनाने के लिए चुना है। अधिकारियों के अनुसार 80 फीसदी संभावना रुहेलखंड विश्वविद्यालय की जमीन पर यार्ड बनने की है। वजह यह है कि विवि की जमीन राज्य सरकार के अंतर्गत आती है, वहीं आईवीआरआई केंद्र सरकार के अधीन है। इस कारण से ही उसकी संभावना कम हैं।

ये रूट है प्रस्तावित 
मेट्रो संचालन की रूपरेखा के लिए डीपीआर को तैयार किया जाएगा। इसमें 12 किमी. जंक्शन वाया चौकी चौराहा वाया सेटेलाइट बस स्टैंड, बैरियर दो तिराहा तक का रूट शामिल है। इसके अलावा दूसरा चौकी चौराहा वाया कुतुबखाना, कोहाड़ापीर, आदिनाथ चौक से बैरियर दो तिराहा से एयरपोर्ट तक 9.50 किमी. का दायरा शामिल है। इसमें बीच में कई जगह खंभे, ओवरब्रिज, सड़क, स्कूल आदि भी आ रहे हैं। खंभों को हटाने, स्कूलों के ऊपर से ब्रिज निकालने या अन्य अड़चनों को दूर करने से प्रोजेक्ट का बजट बढ़ेगा। इससे बजट करीब 2 प्रतिशत बढ़ सकता है।

मेट्रो का प्रस्तावित बजट अभी पांच हजार करोड़ है। हालांकि ये बढ़-घट भी सकता है। मेट्रो कहां भूमिगत चलेगी और कहां पिलर पर संचालन होगा? इसको लेकर अभी कोई योजना नहीं बनी है। डीपीआर में इसका ब्योरा सामने आएगा।

बीडीए उपाध्यक्ष मनिकंडन ए. ने बताया कि लाइट मेट्रो किसी भी शहर में संचालित नहीं है। ऐसे में मेट्रो के संचालन का प्रस्ताव भेजा जा सकता है। टीम ने सर्वे किया है। अभी अधिकारिक रूप से बजट का अनुमान लगाना मुश्किल है। अक्तूबर तक डीपीआर तैयार कर भेजने की तैयारी चल रही है। बाकी फैसला शासन स्तर का ही होगा। 

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