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Bareilly News: निजी बसों में सुरक्षा से खिलवाड़, इमरजेंसी गेट जाम, अग्निशामक यंत्र नदारद, विशेष अभियान के दौरान 19 बसें सीज, 54 का चालान
Sun, 18 Oct 2026 12:08 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sun, 18 Oct 2026 12:08 AM IST
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बरेली। एक माह पहले नोएडा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर निजी स्लीपर बस में आग से 19 लोगों की मौत के बाद भी निजी बस संचालकों ने यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ बंद नहीं किया है। परिवहन विभाग के ऑपरेशन कवच-3.0 के तहत चलाए गए विशेष अभियान के दौरान एक बार फिर निजी बसों की हकीकत सामने आ गई है। जांच में ज्यादातर बसों के इमरजेंसी गेट जाम मिले। अग्निशामक यंत्र भी नदारद हैं। मानकों की अनदेखी पर 19 बसों को सीज करने के साथ ही 54 का चालान किया गया है।
मंडल के चारों जिलों में अभियान के दौरान छोटे रूटों की निजी बसों के अलावा ऑल इंडिया परमिट पर चलने वाली बसों में सुरक्षा इंतजामों को परखा गया। इस दौरान बॉडी कोड, आपातकालीन द्वार, अग्निशामक यंत्रों की उपलब्धता और क्रियाशीलता, क्षमता से अधिक सीटें, छत पर अत्यधिक ऊंचाई तक माल लदान, ओवरलोडिंग और परमिट शर्तों की जांच की गई। क्षमता से ज्यादा सवारियां लेकर दौड़ रहीं कई बसों ने स्याह तस्वीर पेश की। इनमें सुरक्षा मामलों को पूरी तरह नजरअंदाज पाया गया। इतना ही नहीं बसों की बॉडी से भी छेड़खानी सामने आई।
आरटीओ प्रवर्तन प्रणव झा ने बताया कि ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट के नियमों का उल्लंघन और बसों में यात्रियों का रिकॉर्ड भी नहीं पाया गया। बसों के इमरजेंसी दरवाजे तो काफी कोशिश और तीन-चार लोगों के जोर लगाने पर भी नहीं खुले। मानकों और सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
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वाहनों के ढांचे में बदलाव, फिर भी जारी हो जाते हैं फिटनेस प्रमाणपत्र
नियमानुसार किसी वाहन के रंग-रोगन, सीटों की संख्या, भार क्षमता या मॉडल में बिना परिवहन विभाग की अनुमति के कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। वाहन सुरक्षित है इसके लिए समय-समय पर परिवहन विभाग से फिटनेस प्रमाणपत्र लेना होता है। निजी यात्री वाहनों में वाहन संचालक सुविधा के अनुसार ढांचे में भी बदलाव कर देते हैं। इसके बाद भी वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी हो जाता है।
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मंडल के चारों जिलों में अभियान के दौरान छोटे रूटों की निजी बसों के अलावा ऑल इंडिया परमिट पर चलने वाली बसों में सुरक्षा इंतजामों को परखा गया। इस दौरान बॉडी कोड, आपातकालीन द्वार, अग्निशामक यंत्रों की उपलब्धता और क्रियाशीलता, क्षमता से अधिक सीटें, छत पर अत्यधिक ऊंचाई तक माल लदान, ओवरलोडिंग और परमिट शर्तों की जांच की गई। क्षमता से ज्यादा सवारियां लेकर दौड़ रहीं कई बसों ने स्याह तस्वीर पेश की। इनमें सुरक्षा मामलों को पूरी तरह नजरअंदाज पाया गया। इतना ही नहीं बसों की बॉडी से भी छेड़खानी सामने आई।
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आरटीओ प्रवर्तन प्रणव झा ने बताया कि ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट के नियमों का उल्लंघन और बसों में यात्रियों का रिकॉर्ड भी नहीं पाया गया। बसों के इमरजेंसी दरवाजे तो काफी कोशिश और तीन-चार लोगों के जोर लगाने पर भी नहीं खुले। मानकों और सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
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वाहनों के ढांचे में बदलाव, फिर भी जारी हो जाते हैं फिटनेस प्रमाणपत्र
नियमानुसार किसी वाहन के रंग-रोगन, सीटों की संख्या, भार क्षमता या मॉडल में बिना परिवहन विभाग की अनुमति के कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। वाहन सुरक्षित है इसके लिए समय-समय पर परिवहन विभाग से फिटनेस प्रमाणपत्र लेना होता है। निजी यात्री वाहनों में वाहन संचालक सुविधा के अनुसार ढांचे में भी बदलाव कर देते हैं। इसके बाद भी वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी हो जाता है।