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अब एम की फीस बढ़ाने पर भड़के छात्र
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने कई कक्षाओं की फीस में अघोषित बढ़ोतरी की है। अब एमए प्रथम व द्वितीय वर्ष की फीस में दो सौ से पांच सौ रुपये तक की बढ़ोतरी की खुलासा ऑनलाइन परीक्षा फार्म भरने के दौरान हुआ है। गुस्साए छात्रों ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों से तत्काल फीस कम करने की मांग की है।
एमए प्रथम वर्ष के छात्र सुमित कुमार, आशीष शर्मा आदि का कहना है कि पिछले साल उनकी फीस 1250 रुपये थी लेकिन इस बार ऑनलाइन परीक्षा फार्म के साथ 1750 रुपये लिए गए हैं यानी पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। विश्वविद्यालय ने इसके बारे में पहले से कोई सूचना भी जारी नहीं की। अघोषित फीस वृद्धि से हजारों छात्रों को झटका लगा है। यह बढ़ी फीस विश्वविद्यालय वापस ले।
छात्र फैज मोहम्मद, इमरान खान का कहना है कि एमए द्वितीय वर्ष की फीस पिछले साल 1550 रुपये थी लेकिन इस बार 1750 रुपये लिए जा रहे हैं। तमाम छात्रों ने विश्वविद्यालय को यह अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने इससे पहले बीए तृतीय वर्ष की फीस में भी बढ़ोतरी की थी जिसे विरोध के बाद वापस लिया।
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छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय छात्रों को पहले ही अवगत कराए कि फीस किन-किन विषयों की और कितनी बढ़ी है। छात्रों को परीक्षा फार्म भरने के समय पता लगता है। ऐसे में बढ़ी फीस देना उनकी मजबूरी बन जाती है। यही नहीं, विश्वविद्यालय ऐसे निर्णय लेते समय छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल करे। छात्रों का कहना है कि कोरोना में तमाम परिवार प्रभावित हुए हैं। विश्वविद्यालय को उन्हें राहत देने चाहिए थी लेकिन उल्टे वह समस्या बढ़ा रहा है।
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एमए प्रथम वर्ष के छात्र सुमित कुमार, आशीष शर्मा आदि का कहना है कि पिछले साल उनकी फीस 1250 रुपये थी लेकिन इस बार ऑनलाइन परीक्षा फार्म के साथ 1750 रुपये लिए गए हैं यानी पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। विश्वविद्यालय ने इसके बारे में पहले से कोई सूचना भी जारी नहीं की। अघोषित फीस वृद्धि से हजारों छात्रों को झटका लगा है। यह बढ़ी फीस विश्वविद्यालय वापस ले।
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छात्र फैज मोहम्मद, इमरान खान का कहना है कि एमए द्वितीय वर्ष की फीस पिछले साल 1550 रुपये थी लेकिन इस बार 1750 रुपये लिए जा रहे हैं। तमाम छात्रों ने विश्वविद्यालय को यह अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने इससे पहले बीए तृतीय वर्ष की फीस में भी बढ़ोतरी की थी जिसे विरोध के बाद वापस लिया।
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छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय छात्रों को पहले ही अवगत कराए कि फीस किन-किन विषयों की और कितनी बढ़ी है। छात्रों को परीक्षा फार्म भरने के समय पता लगता है। ऐसे में बढ़ी फीस देना उनकी मजबूरी बन जाती है। यही नहीं, विश्वविद्यालय ऐसे निर्णय लेते समय छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल करे। छात्रों का कहना है कि कोरोना में तमाम परिवार प्रभावित हुए हैं। विश्वविद्यालय को उन्हें राहत देने चाहिए थी लेकिन उल्टे वह समस्या बढ़ा रहा है।