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रोडवेज प्रबंधन के दावे हुए फुस्स... भैयादूज पर बे‘बस’ रहीं बहनें
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बस में सीट पाने के लिए बच्चे को खिड़की से अंदर भेजते लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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रोडवेज बसों की कमी से भाई के घर जाने के लिए दिनभर भटकती रहीं बहनें, ट्रेनों में भी रही भीड़
बरेली। रोडवेज प्रबंधन का भैयादूज पर बहनों को भाई के घर जाने के लिए भरपूर बसें उपलब्ध कराने का दावा हवाई साबित हुआ। बहनों को बसों के इंतजार में रोडवेज बस अड्डों पर घंटों भटकना पड़ा। ट्रेनों में भी भारी भीड़ के चलते सीटों के लिए मारामारी रही।
भैयादूज पर भारी भीड़ उमड़ने का अंदाजा परिवहन निगम प्रबंधन को पहले से था। इसके लिए बेड़े की सभी 665 बसें ऑनरोड रखने के निर्देश क्षेत्रीय प्रबंधक ने दिए थे। इसके बावजूद भारी भीड़ के सामने रोडवेज बसें कम पड़ र्गइं। शुक्रवार शाम से ही सेटेलाइट और पुराने रोडवेज बस अड्डे पर सवारियों का दबाव बढ़ने लगा था। रात के समय बस अड्डों पर स्थानीय डिपो की बसें ही मौजूद नहीं थी।
मजबूरन बहनों को सर्द रात में घंटों बसों का इंतजार करना पड़ा। बाहर से आने वाली दूसरी डिपो की बसें पहले से ही खचाखच भरी थीं, लिहाजा यहां से चढ़े यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। शनिवार को तो भीड़ के आगे रोडवेज प्रबंधन की सारी व्यवस्थाएं ही ध्वस्त हो गईं। सुबह से लेकर देर शाम तक बस अड्डों पर मारामारी की स्थिति रही।
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सीट पाने के लिए खिड़की से चढ़े यात्री
भारी भीड़ के चलते सेटेलाइट बस अड्डे पर दोपहर के समय तो स्थिति यह हो गई कि जैसे ही कोई बस आकर रुकती यात्रियों की भीड़ उसकी तरफ दौड़ पड़ती। सीट पाने के लिए लोग खिड़कियों से बस में घुसने की कोशिश करने लगते, लेकिन महिलाएं बेबस सी खड़ी यह सब देखती रहतीं। बसों में ज्यादातर उन बहनों को तो खड़े होकर ही सफर करना पड़ा, जो अकेली थीं।
लोकल रूटों पर नहीं मिलीं बसें
भैयादूज पर्व पर रोडवेज बसों की सबसे ज्यादा किल्लत लोकल रूटों पर रही। आंवला, नवाबगंज, बहेड़ी के लिए शहर के दोनों बस अड्डों पर बसें उपलब्ध ही नहीं थी। शाहजहांपुर मार्ग पर रवाना होने वाली बसों के परिचालकों ने भी फरीदपुर, कटरा, तिलहर की सवारियों को नहीं बैठाया। इस वजह से इन मार्गों पर सवारियों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
सवारियों की संख्या को देखते हुए बेड़े की सभी बसें शनिवार को ऑनरोड रखी गई। जिस रूट पर सवारियों की संख्या सबसे ज्यादा थी, वहां के लिए तत्काल बसें उपलब्ध कराई र्गइं। भारी भीड़ के चलते यात्रियों को कुछ परेशानियां भी हुईं। - आरके त्रिपाठी, क्षेत्रीय प्रबंधक
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बरेली। रोडवेज प्रबंधन का भैयादूज पर बहनों को भाई के घर जाने के लिए भरपूर बसें उपलब्ध कराने का दावा हवाई साबित हुआ। बहनों को बसों के इंतजार में रोडवेज बस अड्डों पर घंटों भटकना पड़ा। ट्रेनों में भी भारी भीड़ के चलते सीटों के लिए मारामारी रही।
भैयादूज पर भारी भीड़ उमड़ने का अंदाजा परिवहन निगम प्रबंधन को पहले से था। इसके लिए बेड़े की सभी 665 बसें ऑनरोड रखने के निर्देश क्षेत्रीय प्रबंधक ने दिए थे। इसके बावजूद भारी भीड़ के सामने रोडवेज बसें कम पड़ र्गइं। शुक्रवार शाम से ही सेटेलाइट और पुराने रोडवेज बस अड्डे पर सवारियों का दबाव बढ़ने लगा था। रात के समय बस अड्डों पर स्थानीय डिपो की बसें ही मौजूद नहीं थी।
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मजबूरन बहनों को सर्द रात में घंटों बसों का इंतजार करना पड़ा। बाहर से आने वाली दूसरी डिपो की बसें पहले से ही खचाखच भरी थीं, लिहाजा यहां से चढ़े यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। शनिवार को तो भीड़ के आगे रोडवेज प्रबंधन की सारी व्यवस्थाएं ही ध्वस्त हो गईं। सुबह से लेकर देर शाम तक बस अड्डों पर मारामारी की स्थिति रही।
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सीट पाने के लिए खिड़की से चढ़े यात्री
भारी भीड़ के चलते सेटेलाइट बस अड्डे पर दोपहर के समय तो स्थिति यह हो गई कि जैसे ही कोई बस आकर रुकती यात्रियों की भीड़ उसकी तरफ दौड़ पड़ती। सीट पाने के लिए लोग खिड़कियों से बस में घुसने की कोशिश करने लगते, लेकिन महिलाएं बेबस सी खड़ी यह सब देखती रहतीं। बसों में ज्यादातर उन बहनों को तो खड़े होकर ही सफर करना पड़ा, जो अकेली थीं।
लोकल रूटों पर नहीं मिलीं बसें
भैयादूज पर्व पर रोडवेज बसों की सबसे ज्यादा किल्लत लोकल रूटों पर रही। आंवला, नवाबगंज, बहेड़ी के लिए शहर के दोनों बस अड्डों पर बसें उपलब्ध ही नहीं थी। शाहजहांपुर मार्ग पर रवाना होने वाली बसों के परिचालकों ने भी फरीदपुर, कटरा, तिलहर की सवारियों को नहीं बैठाया। इस वजह से इन मार्गों पर सवारियों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
सवारियों की संख्या को देखते हुए बेड़े की सभी बसें शनिवार को ऑनरोड रखी गई। जिस रूट पर सवारियों की संख्या सबसे ज्यादा थी, वहां के लिए तत्काल बसें उपलब्ध कराई र्गइं। भारी भीड़ के चलते यात्रियों को कुछ परेशानियां भी हुईं। - आरके त्रिपाठी, क्षेत्रीय प्रबंधक