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पुलिस ने बदलवाया रास्ता तो आंवला-भमोरा मार्ग पर जा डटे किसान
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बरेली। पोस्टमार्टम के बाद परिजन और किसान यूनियन नेता जय सिंह का शव लेकर धरनास्थल की ओर रवाना हो गए। इस पर भमोरा पुलिस ने भारी पुलिस बल के साथ उनके हुजूम को दूसरे रास्ते से मृतक के गांव की ओर को मोड़ दिया। शव के साथ मौजूद लोगों के मोबाइल भी पुलिस ने छीन लिए। यह जानकारी मिलते ही किसानों ने आंवला-भमोरा मार्ग पर जाम लगा दिया। वहीं, गांव की महिलाएं और किसान हाजीपुर मोड़ पर एकत्र हो गए और शव ले जा रहे वाहन को वहीं रोक दिया।
रात में ही अंतिम संस्कार कराने की कोशिश
प्रशासन की कोशिश थी कि शव किसी तरह मृतक के गांव पहुंचा दिया जाए, जबकि परिजन और भाकियू नेता उसे धरनास्थल ले जाना चाहते थे। इसे लेकर किसानों और अफसरों के बीच देर रात तक नोकझोंक होती रही, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। मृतक के बेटे हरिओम ने बताया कि प्रशासन रात में ही जबरन अंतिम संस्कार करवाना चाहता है, जो कि हिंदू परंपरा के खिलाफ है। अफसर लगातार उन पर रात में ही अंतिम संस्कार करने का दबाव बना रहे हैं, जबकि अभी रिश्तेदार तक नहीं आ पाए हैं। उन्होंने पुलिस पर अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया।
बारिश में भी डटे रहे किसान
पुलिस ने इफको फैक्टरी के पास किसानों को शव लेकर नहीं जाने दिया तो वे लोग उसे गांव में भी नहीं लेकर गए। जिस एंबुलेंस में शव था, उसे नौगवां-कीरतपुर मार्ग पर खड़ा कर दिया और किसान वहीं जमीन पर बैठकर धरना देने लगे। रात में बारिश भी शुरू हो गई लेकिन 12 बजे के बाद किसान वहां पर ही डटे हुए थे।
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सुबह से आधी रात तक बवाल, अफसर नहीं भांप सके हालात
किसान की हालत सुबह करीब आठ बजे बिगड़ी थी और उसके साथ ही वहां आक्रोश बढ़ने लगा। मगर अफसर माहौल को नहीं भांप सके और शाम होने तक जाम लगा दिया गया, जो आधी रात के बाद भी लगा रहा।
किसानों के इस विरोध प्रदर्शन को प्रशासन शुरुआत से ही बहुत गंभीरता से नहीं ले रहा है। बीच में कई बार ऐसा हुआ जब प्रदर्शनकारी किसान सड़क पर उतरे या विरोध तेज करने की कोशिश की लेकिन किसी न किसी तरह मामला शांत कर दिया गया। शनिवार को भी अफसर इसी भ्रम में थे। यही वजह रही कि सुबह आठ बजे किसान की हालत बिगड़ने के बावजूद वे लोग माहौल नहीं भांप सके और शाम को किसान का शव गांव ले जाने की कोशिश में हालात ज्यादा बिगड़ गए।
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रात में ही अंतिम संस्कार कराने की कोशिश
प्रशासन की कोशिश थी कि शव किसी तरह मृतक के गांव पहुंचा दिया जाए, जबकि परिजन और भाकियू नेता उसे धरनास्थल ले जाना चाहते थे। इसे लेकर किसानों और अफसरों के बीच देर रात तक नोकझोंक होती रही, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। मृतक के बेटे हरिओम ने बताया कि प्रशासन रात में ही जबरन अंतिम संस्कार करवाना चाहता है, जो कि हिंदू परंपरा के खिलाफ है। अफसर लगातार उन पर रात में ही अंतिम संस्कार करने का दबाव बना रहे हैं, जबकि अभी रिश्तेदार तक नहीं आ पाए हैं। उन्होंने पुलिस पर अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया।
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बारिश में भी डटे रहे किसान
पुलिस ने इफको फैक्टरी के पास किसानों को शव लेकर नहीं जाने दिया तो वे लोग उसे गांव में भी नहीं लेकर गए। जिस एंबुलेंस में शव था, उसे नौगवां-कीरतपुर मार्ग पर खड़ा कर दिया और किसान वहीं जमीन पर बैठकर धरना देने लगे। रात में बारिश भी शुरू हो गई लेकिन 12 बजे के बाद किसान वहां पर ही डटे हुए थे।
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सुबह से आधी रात तक बवाल, अफसर नहीं भांप सके हालात
किसान की हालत सुबह करीब आठ बजे बिगड़ी थी और उसके साथ ही वहां आक्रोश बढ़ने लगा। मगर अफसर माहौल को नहीं भांप सके और शाम होने तक जाम लगा दिया गया, जो आधी रात के बाद भी लगा रहा।
किसानों के इस विरोध प्रदर्शन को प्रशासन शुरुआत से ही बहुत गंभीरता से नहीं ले रहा है। बीच में कई बार ऐसा हुआ जब प्रदर्शनकारी किसान सड़क पर उतरे या विरोध तेज करने की कोशिश की लेकिन किसी न किसी तरह मामला शांत कर दिया गया। शनिवार को भी अफसर इसी भ्रम में थे। यही वजह रही कि सुबह आठ बजे किसान की हालत बिगड़ने के बावजूद वे लोग माहौल नहीं भांप सके और शाम को किसान का शव गांव ले जाने की कोशिश में हालात ज्यादा बिगड़ गए।