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Bareilly News: संघर्षों की पगडंडी से अंतरराष्ट्रीय पिच तक पहुंचे रिहान
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बरेली। पीलीभीत के 30 वर्षीय दिव्यांग क्रिकेटर रिहान अहमद की कहानी संघर्ष, जज्बे और उम्मीद की एक ऐसी मिसाल है, जिससे हर युवा प्रेरित हो सकता है। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया, आर्थिक स्थिति कमजोर रही और शारीरिक चुनौती ने उन्हें घेर लिया। लेकिन रिहान ने कभी अपने सपने से समझौता नहीं किया।
बचपन में ही क्रिकेट को ही अपना जीवन मान चुके रिहान ने कठिन हालातों को पीछे छोड़ते हुए इंटरनेशनल क्लब क्रिकेट चैंपियनशिप 2025 तक का सफर तय किया। यह प्रतियोगिता 13 से 17 नवंबर तक कोलंबो, श्रीलंका में आयोजित हुई। पैरा क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया की टीम प्रतियोगिता में उपविजेता रही।
तीन मैचों की सीरीज में रिहान को दो मैचों में खेलने का मौका मिला। दाहिने हाथ के मीडियम फास्ट बॉलर रिहान ने पहले मैच में चार ओवर में 32 रन देकर एक विकेट लिया। दूसरे मैच में उन्होंने तीन ओवर में 29 रन देकर एक विकेट हासिल किया।
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बड़े भाई रिजवान ने किया सहयोग
अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का उनका यह सफर आसान नहीं था। वर्ष 2010 में पिता की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी बड़े भाई रिजवान पर आ गई। मजदूरी करके उन्होंने रिहान को पढ़ाया-लिखाया और अब उनके क्रिकेट करियर में हर संभव सहयोग दे रहे हैं। खेल में आगे बढ़ने के लिए वह बरेली में अपने मामा के घर रहकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में अभ्यास कर रहे हैं। कोच नितेश भारद्वाज के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी गेंदबाजी में सुधार किया और नियंत्रण व स्पीड को बेहतर बनाया। संवाद
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बचपन में ही क्रिकेट को ही अपना जीवन मान चुके रिहान ने कठिन हालातों को पीछे छोड़ते हुए इंटरनेशनल क्लब क्रिकेट चैंपियनशिप 2025 तक का सफर तय किया। यह प्रतियोगिता 13 से 17 नवंबर तक कोलंबो, श्रीलंका में आयोजित हुई। पैरा क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया की टीम प्रतियोगिता में उपविजेता रही।
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तीन मैचों की सीरीज में रिहान को दो मैचों में खेलने का मौका मिला। दाहिने हाथ के मीडियम फास्ट बॉलर रिहान ने पहले मैच में चार ओवर में 32 रन देकर एक विकेट लिया। दूसरे मैच में उन्होंने तीन ओवर में 29 रन देकर एक विकेट हासिल किया।
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बड़े भाई रिजवान ने किया सहयोग
अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का उनका यह सफर आसान नहीं था। वर्ष 2010 में पिता की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी बड़े भाई रिजवान पर आ गई। मजदूरी करके उन्होंने रिहान को पढ़ाया-लिखाया और अब उनके क्रिकेट करियर में हर संभव सहयोग दे रहे हैं। खेल में आगे बढ़ने के लिए वह बरेली में अपने मामा के घर रहकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में अभ्यास कर रहे हैं। कोच नितेश भारद्वाज के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी गेंदबाजी में सुधार किया और नियंत्रण व स्पीड को बेहतर बनाया। संवाद