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गुरुपूर्णिमा पर चंद्रग्रहण की छाया दोपहर में बंद होंगे मंदिर के कपाट
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बरेली। गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर आज चंद्रग्रहण की छाया है। मंगलवार की मध्यरात्रि में खंडग्रास चंद्रग्रहण रात 1.32 बजे से शुरू होगा, इससे 9 घंटे पहले शाम 4.31 बजे से सूतक शुरू होगा। ज्योतिषाचार्यों ने दोपहर डेढ़ बजे तक सभी गुरु पूजन अर्चन समेेत अन्य शुभ कार्यों का अनुष्ठान किए जाने को कहा है। सूतक के दौरान शुभ कार्य अशुभ फलदायी माने गए हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. विकास उपाध्याय के मुताबिक चंद्रग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को धनु राशि के उत्तरा अषाढ़ा नक्षत्र में लग रहा है। जो मध्यरात्रि में 3.15 बजे चंद्रमा के मकर राशि में जाने से धनु व मकर, दोनों राशि वालों को संकट प्रदान करने वाला होगा। धनु में लगे ग्रहण के समय कर्क, तुला, कुंभ, मीन और मकर में लगे ग्रहण के समय मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि वालों को लाभ होगा। अन्य राशि वालों को श्री गणेश कथा, सुंदर कांड और श्रीमद्भागवत महापुराण का पाठ कराने का सुझाव दिया है। बताया कि अगर चंद्रमा जन्मकुंडली में वृश्चिक में है, तो चंद्र मंत्र का जाप करें। चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद घर में शुद्धता के लिए गंगाजल का छिड़काव जरूर करें। स्नान के बाद भगवान की मूर्तियों को स्नान कराएं और उनकी पूजा करें। ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं घर से बाहर न निकलें। अगर निकलना जरूरी हो तो गर्भ में पल रहे शिशु की रक्षा के लिए चंदन और तुलसी के पत्तों का लेप कर लें। सूतक लगने से पहले घर के अनाज आदि में तुलसी या कुश अवश्य डाल दें। ग्रहण काल के दौरान भगवन्नाम जप करें।
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ज्योतिषाचार्य पं. विकास उपाध्याय के मुताबिक चंद्रग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को धनु राशि के उत्तरा अषाढ़ा नक्षत्र में लग रहा है। जो मध्यरात्रि में 3.15 बजे चंद्रमा के मकर राशि में जाने से धनु व मकर, दोनों राशि वालों को संकट प्रदान करने वाला होगा। धनु में लगे ग्रहण के समय कर्क, तुला, कुंभ, मीन और मकर में लगे ग्रहण के समय मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि वालों को लाभ होगा। अन्य राशि वालों को श्री गणेश कथा, सुंदर कांड और श्रीमद्भागवत महापुराण का पाठ कराने का सुझाव दिया है। बताया कि अगर चंद्रमा जन्मकुंडली में वृश्चिक में है, तो चंद्र मंत्र का जाप करें। चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद घर में शुद्धता के लिए गंगाजल का छिड़काव जरूर करें। स्नान के बाद भगवान की मूर्तियों को स्नान कराएं और उनकी पूजा करें। ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं घर से बाहर न निकलें। अगर निकलना जरूरी हो तो गर्भ में पल रहे शिशु की रक्षा के लिए चंदन और तुलसी के पत्तों का लेप कर लें। सूतक लगने से पहले घर के अनाज आदि में तुलसी या कुश अवश्य डाल दें। ग्रहण काल के दौरान भगवन्नाम जप करें।
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