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जश्न-ए-चिरागां दे गया सौहार्द का पैगाम
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बरेली। सूफी मरकज खानकाह नियाजिया में जश्न-ए-चिरागां की रुहानी तकरीब पूरी अकीदत के साथ मनाई गई। इस रिवायती जश्न में देखने लायक मंजर यह था कि हर छोटा बड़ा, अमीर गरीब, औरत मर्द, बच्चे बुजुर्ग मजहबों मिल्लत का फर्क मिटाकर शामिल हुए। सभी एक साथ कतारबद्ध होकर बारी-बारी से देर रात तक चिराग रोशन कर मन्नतें मांगते रहे। कई लोग मन्नत मांगते हुए इतने भावुक हो गए कि लब थरथरा उठे, तो किसी की आंखों से आंसु छलकते नजर आए।
रविवार की शाम ढलने को थी, खानकाह का पूरा सहन (परिसर) खाली था, बाहर मन्नती कतार बनाए खड़े थे। इसी बीच साहिबे सज्जादा शाह मोहम्मद हसनैन नियाजी उर्फ हसनी मियां, प्रबंधक सिबतैन नियाजी उर्फ हसनी मियां, नायब सज्जादा अल्हाज शाह मेहंदी मियां सहित तमाम खानवादों के साथ खानकाह में दाखिल हुए। उन्होंने सोने का खानकाही चिराग रोशन कर जश्न-ए-चिरागां की रस्म का आगाज किया। इसके बाद विदेशों और दूर दराज प्रांतों से आए जायरीन देर रात तक चिराग रोशन करते रहे। इसी बीच तमाम औरत मर्द मजारात की दरों दीवार से चिपटें दुआएं मांगते भी दिखे।
इससे पूर्व सुबह में कुरान ख्वानी के बाद दिन भर तमाम जायरीन ने मजारों पर चादरपोशी व गुलपोशी कर अकीदत का इजहार किया। इस बीच दोपहर में फातेहा के बाद लंगर जारी किया गया। इस मौके पर तमाम लोगों ने जायरीन के लिए खानकाह के बाहर चाय शरबत व पानी की सबीलें भी लगाईं। जश्न में शिरकत करने के लिए केंद्रीय मंत्री संतोष कुमार गंगवार, भाजपा नेता गुलशन आनंद, नवाबगंज की चेयरमैन शहला ताहिर, सपा नेता जफर बेग आदि पहुंचे।
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अदा की गई महबूबीन के कुल की रस्म
बरेली। खानकाह में जश्न-ए-चिरागां के मौके पर महफिले समा भी सजाई गई। खासतौर से शाम को छह बजे महफिल के बीच महबूबे इलाही हजरत निजामउद्दीन औलिया और शाम सात बजे महबूबे सुब्हानी हजरत गौसुल आजम के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसके बाद खानकाही चौकी शकील नियाजी कव्वाल ने चिश्तिया रंग व कड़क पढ़ा। हल्का-ए-जिक्र के बाद साहिबे सज्जादा ने तमामी अवाम व मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ की। देर रात हसनी मियां अपने काफिले के साथ महबूबे इलाही के उर्स में शिरकत करने दिल्ली रवाना हो गए।
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रविवार की शाम ढलने को थी, खानकाह का पूरा सहन (परिसर) खाली था, बाहर मन्नती कतार बनाए खड़े थे। इसी बीच साहिबे सज्जादा शाह मोहम्मद हसनैन नियाजी उर्फ हसनी मियां, प्रबंधक सिबतैन नियाजी उर्फ हसनी मियां, नायब सज्जादा अल्हाज शाह मेहंदी मियां सहित तमाम खानवादों के साथ खानकाह में दाखिल हुए। उन्होंने सोने का खानकाही चिराग रोशन कर जश्न-ए-चिरागां की रस्म का आगाज किया। इसके बाद विदेशों और दूर दराज प्रांतों से आए जायरीन देर रात तक चिराग रोशन करते रहे। इसी बीच तमाम औरत मर्द मजारात की दरों दीवार से चिपटें दुआएं मांगते भी दिखे।
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इससे पूर्व सुबह में कुरान ख्वानी के बाद दिन भर तमाम जायरीन ने मजारों पर चादरपोशी व गुलपोशी कर अकीदत का इजहार किया। इस बीच दोपहर में फातेहा के बाद लंगर जारी किया गया। इस मौके पर तमाम लोगों ने जायरीन के लिए खानकाह के बाहर चाय शरबत व पानी की सबीलें भी लगाईं। जश्न में शिरकत करने के लिए केंद्रीय मंत्री संतोष कुमार गंगवार, भाजपा नेता गुलशन आनंद, नवाबगंज की चेयरमैन शहला ताहिर, सपा नेता जफर बेग आदि पहुंचे।
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अदा की गई महबूबीन के कुल की रस्म
बरेली। खानकाह में जश्न-ए-चिरागां के मौके पर महफिले समा भी सजाई गई। खासतौर से शाम को छह बजे महफिल के बीच महबूबे इलाही हजरत निजामउद्दीन औलिया और शाम सात बजे महबूबे सुब्हानी हजरत गौसुल आजम के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसके बाद खानकाही चौकी शकील नियाजी कव्वाल ने चिश्तिया रंग व कड़क पढ़ा। हल्का-ए-जिक्र के बाद साहिबे सज्जादा ने तमामी अवाम व मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ की। देर रात हसनी मियां अपने काफिले के साथ महबूबे इलाही के उर्स में शिरकत करने दिल्ली रवाना हो गए।