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खुशियों से भरपूर रही ईद-ए-जहरा
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बरेली। अजादारी खत्म होने के साथ ही ईद-ए-जहरा जोशोखरोश के साथ मनाया गया। इसे लेकर पूरे शिया हल्के में जश्न का माहौल था। वहीं दिन भर लोगों का एक दूसरे के घरों पर आने-जाने का सिलसिला भी चलता रहा।
शिया समुदाय में दो महीने आठ दिन की अजादारी गमे कर्बला के बाद खुशियों का सिलसिला शुरू हुआ। इस कड़ी में अल्पसंख्यक वेलफेयर सोसाइटी की प्रदेश अध्यक्ष माहिरा नकवी की ओर से गढै़या के इमामबाड़ा आगा साहब में जनानी महफिल सजाई गई। महफिल की शुरूआत महिरा ने ‘ईद-ए-जहरा मनाने आई हूं। अपना ईमान सजाने आई हूं।। जिसने जहरा का घर जलाया था, उसका मैं पुतला जलाने आई ह्रूं। शेर पढ़कर की। महफिल में बीबी जहरा की शान में फिशा जैदी, मरियम जैदी, हिना काजमी, फरहत नकवी, शाभी नकवी, रेशमा नकवी आदि ने भी कसीदे पढ़े।
इस मौके पर लखनऊ से आए सोसाइटी के संस्थापक तनवीर रिजवी ने कहा कि संस्था का उद्देश्य है कि अल्पसंख्यक समाज में एका कायम रखने का कार्य करना। समाज को तरक्की की जरूरत है। आखिर में कदीसा पढ़ने वाली महिलाओं को माहिरा की ओर से तोहफे बांटे गए और नजरें इमाम पेश किया गया। इस मौके पर लखनऊ से पहुंचे सोसाइटी के लवली रिजवी के अलावा शानू काजमी आदि मौजूद रहे।
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शिया समुदाय में दो महीने आठ दिन की अजादारी गमे कर्बला के बाद खुशियों का सिलसिला शुरू हुआ। इस कड़ी में अल्पसंख्यक वेलफेयर सोसाइटी की प्रदेश अध्यक्ष माहिरा नकवी की ओर से गढै़या के इमामबाड़ा आगा साहब में जनानी महफिल सजाई गई। महफिल की शुरूआत महिरा ने ‘ईद-ए-जहरा मनाने आई हूं। अपना ईमान सजाने आई हूं।। जिसने जहरा का घर जलाया था, उसका मैं पुतला जलाने आई ह्रूं। शेर पढ़कर की। महफिल में बीबी जहरा की शान में फिशा जैदी, मरियम जैदी, हिना काजमी, फरहत नकवी, शाभी नकवी, रेशमा नकवी आदि ने भी कसीदे पढ़े।
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इस मौके पर लखनऊ से आए सोसाइटी के संस्थापक तनवीर रिजवी ने कहा कि संस्था का उद्देश्य है कि अल्पसंख्यक समाज में एका कायम रखने का कार्य करना। समाज को तरक्की की जरूरत है। आखिर में कदीसा पढ़ने वाली महिलाओं को माहिरा की ओर से तोहफे बांटे गए और नजरें इमाम पेश किया गया। इस मौके पर लखनऊ से पहुंचे सोसाइटी के लवली रिजवी के अलावा शानू काजमी आदि मौजूद रहे।
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