फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   religion

चार माह बाद जागेंगे देव.. बजने लगेंगी शहनाइयां

Tue, 05 Nov 2019 02:37 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 05 Nov 2019 02:37 AM IST
विज्ञापन
religion

हरि प्रबोधिनी एकादशी तुलसी विवाह आठ नवंबर को

विज्ञापन
बरेली। चार माह पहले 12 जुलाई को देवशयनी एकादशी पर सोए देव अब देवोत्थान एकादशी आठ नवंबर को जागेंगे। इसी के साथ मुंडन, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह आदि मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। विवाह वाले घरों में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी दिन तुलसी-शालिग्राम का विवाह भी होगा।
दरअसल, आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी को श्री हरि विष्णु निद्रालीन हो जाते हैं। उस दिन को हरिशयनी एकादशी कहते हैं। कार्तिक शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु निद्रा का त्याग करते हैं तो इस दिन को देव प्रबोधिनी देवोत्थान एकादशी कहते हैं। 12 जुलाई से रुके हुए सभी मांगलिक कार्य अब आठ नवंबर से शुरू हो जाएंगे। वैसे तो एकादशी का मान इस बार सात नवंबर को सुबह 9:54 से शुरू होकर आठ नवंबर को 12:24 मध्यान तक रहेगा, लेकिन उदया तिथि की मान्यता के अनुसार देवोत्थान एकादशी का महत्व तुलसी-शालिग्राम के विवाह आठ नवंबर से ही माना जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु के पूजन का महत्व सबसे अधिक माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से विष्णु लोक की प्राप्ति सहजता से हो जाती है। अथाह ज्ञान की प्राप्ति भी होती है। इस तिथि को अबूझ मुहूर्त भी कहते हैं। तुलसी-शालिगराम विवाह को साक्षी मानकर इस दिन सर्वाधिक विवाह भी किए जाते हैं। अगर विवाह मुहूर्त नहीं भी है, तब भी इस दिन विवाह किया जा सकता है। वैसे विवाह मुहूर्त 19 नवंबर से प्रारंभ हो रहे हैं। दिसंबर में छह विवाह के मुहूर्त हैं, इसके बाद 15 दिसंबर को धनु राशि की संक्रांति लग जाएगी और खरमास भी प्रारंभ हो जाएगा। इससे महीने भर के लिए विवाह आदि मांगलिक कार्यों पर फिर से ब्रेक लग जाएगा। मकर संक्रांति यानी 14 जनवरी के बाद ही मांगलिक कार्य शुरू हो पाएंगे।
विज्ञापन

ऐसे करें आठ नवंबर को पूजन
भागवताचार्य पंडित राजेंद्र तिवारी के अनुसार एकादशी वाले दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर धूप दीप दिखाकर संत घंटा बजाकर भगवान को जलाना चाहिए। इसके बाद गंगाजल पंचामृत आदिश सुगंधित द्रव्यों से स्नान कराकर रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प से पूजा अर्चना करनी चाहिए। गन्ना सिंघाड़ा शकरकंद आदि से पूजन करें और भगवान विष्णु की आरती करें अंत में चरणामृत अवस्थी ग्रहण करें, क्योंकि भगवान विष्णु का चरणामृत अकाल मृत्यु और विघ्न बाधाओं से छुटकारा दिलाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed