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अमन का पैगाम लेकर निकला साबरी झंडे का पैदल काफिला
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बरेली। दरगाह नासिर मियां से साबरी झंडे का पैदल काफिला अमन का पैगाम लेकर निकला। शहर के जिस रास्ते यह जुलूस गुजरा हर मजहबो मिल्लत के लोगों ने इस पर फूल बरसाए।
कलियर शरीफ में हजरत साबिर पाक का उर्स शुरू होने से पहले हर साल यह काफिला साबरी झंडा लेकर वहां पहुंचता है। इसके बाद ही उर्स की शुरुआत होती है। इस बार यह काफिला सज्जादानशीन ख्वाजा सुल्तान अहमद नासरी ने सूफी वसीम मियां साबरी और सूफी शाने अली कमाल मियां नासरी साबरी को झंडा सौंपकर रवाना किया। इसमें फनकार रास्ते भर कलाम पेश करते चले। इससे पहले दरगाह नासिर मियां पर सुबह कुरान ख्वानी के बाद महफिल सजाई गई। शय्यान अहमद नासरी ने मजार शरीफ पर पर संदल पेश किया। सूफी वसीम मियां साबरी ने कहा कि इस काफिले के दौरान रास्ते में जगह जगह रुककर अमन और इत्तेहाद का पैगाम दिया जाएगा। साथ ही हरियाली के लिए पौधा लगाने और पानी की बचत करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। सूफी शाने अली कमाल मियां साबरी ने बताया कि यह सफर 14 दिनों में पूरा होगा। जुलूस नावल्टी, कुतुबखाना, बड़ा बाजार, किला, सीबीगंज के रास्ते अपने गनतव्य की ओर रवाना हो गया।
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कलियर शरीफ में हजरत साबिर पाक का उर्स शुरू होने से पहले हर साल यह काफिला साबरी झंडा लेकर वहां पहुंचता है। इसके बाद ही उर्स की शुरुआत होती है। इस बार यह काफिला सज्जादानशीन ख्वाजा सुल्तान अहमद नासरी ने सूफी वसीम मियां साबरी और सूफी शाने अली कमाल मियां नासरी साबरी को झंडा सौंपकर रवाना किया। इसमें फनकार रास्ते भर कलाम पेश करते चले। इससे पहले दरगाह नासिर मियां पर सुबह कुरान ख्वानी के बाद महफिल सजाई गई। शय्यान अहमद नासरी ने मजार शरीफ पर पर संदल पेश किया। सूफी वसीम मियां साबरी ने कहा कि इस काफिले के दौरान रास्ते में जगह जगह रुककर अमन और इत्तेहाद का पैगाम दिया जाएगा। साथ ही हरियाली के लिए पौधा लगाने और पानी की बचत करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। सूफी शाने अली कमाल मियां साबरी ने बताया कि यह सफर 14 दिनों में पूरा होगा। जुलूस नावल्टी, कुतुबखाना, बड़ा बाजार, किला, सीबीगंज के रास्ते अपने गनतव्य की ओर रवाना हो गया।
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