विभीषण के निशाने पर राम का तीर.. हुआ रावण का अंत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विजयदशमी पर मेलों में जमकर भीड़ उमड़ी। शाम ढलते ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। जैसे-जैसे दिन ढलता गया मेले की चहल-पहल बढ़ती गई। मेले में रावण दहन से पहले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चला और कलाकारों ने पारंपरिक भजनों पर नृत्य प्रस्तुत किया। लगातार आतिशबाजी के बीच लोगों को भाईचारा, सौहार्द और शांति का संदेश दिया गया। पर्वतीय समाज रामलीला, जोगीनवादा रामलीला समिति, सुभाषनगर की रामलीला सभा, कटरा चांद खां समेत कई रामलीला समितियों ने दशहरा मेला में बुराई के प्रतीक रावण का दहन किया। हार्टमन की श्री रानी महालक्ष्मीबाई रामलीला समिति की ओर से रावण दहन के मंचन के दौरान भी केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, मेयर उमेश गौतम समेत कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।
विभीषण ने बताया रावण के अमरत्व का रहस्य
रावण दहन से पहले मेलों में राम-रावण युद्ध का भी प्रदर्शन हुआ। भगवान राम एक के बाद एक तीर चलाते रहे लेकिन रावण पर सभी बेअसर रहे। अंत में विभीषण ने राम को रावण के अमरत्व का रहस्य बताया। इसके बाद राम ने मंत्रोच्चारण करके बाण चलाया तो रावण चीत्कार करते हुए धराशायी हो गया। इसके बाद पुतला दहन होते ही लोग दर्शकदीर्घा से मैदान की ओर दौड़ पड़े। परंपरानुसार लोग प्रतीकात्मक रावण की जली हुई अस्थियों को बला भगाने के लिए उठाकर घर लेकर लौटे।