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मोक्ष अमावस्या के संयोग से खुलेंगे सफलता और समृद्धि के द्वार
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बरेली। इस वर्ष पितृपक्ष की अमावस्या तिथि पर मोक्ष अमावस्या का योग बन रहा है। शनिवार को जल तर्पण से पितृ न सिर्फ तृप्त होंगे अपितु उनके आशीर्वाद से सफलता और समृद्धि के द्वार भी खुलेंगे। यह संयोग सौ बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाला बताया जा रहा है।
पितृपक्ष में ऐसा शुभ संयोग करीब 20 साल बाद बना है। भाद्रपद की पूर्णिमा का एक दिन और अश्विन कृष्णपक्ष के 15 दिन को मिलाकर 16 दिन श्राद्ध के होते हैं। 28 सितंबर को शनिवार और सर्वपितृ अमावस्या का सुयोग इसे मोक्ष अमावस्या की श्रेणी प्रदान कर रहा है। उसी दिन धृति योग भी बन रहा है। धृति योग के स्वामी जल देवता हैं, इसलिए उस दिन पितरों का जल से तर्पण विशेष महत्व और प्रभाव वाला होगा। 1999 में यह संयोग बना था, जब सर्वपितृ अमावस्या शनिवार को पड़ी थी।
शास्त्रों के अनुसार पंचक के नक्षत्रों की गणना दोनों पक्षों, तिथि और दिवस के आधार पर की जाती है। यह नक्षत्र 100 प्रकार के कष्ट, बाधा और समस्या से मुक्ति दिलाता है। कहा जाता है की इस नक्षत्र में जो भी कार्य किये जाते हैं सभी शुभ फल देने वाले होते हैं। ज्योतिष के अनुसार तारका नक्षत्र पंचक का नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र को कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है। वहीं पंचक को पांच तत्वों से मिला नक्षत्र माना जाता है। जब यह विशेष पर्वकाल में शुक्ल पक्षीय हो या नक्षत्र के स्वामित्व पर शुभ ग्रहों की संयुक्त दृष्टि हो तब यह पंचक शुभ माना जाता है। इस बार पितृपक्ष में पितरों को जल से तृप्त किया जा सकता है।
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जिनकी तिथि याद न हो, उनके भी श्राद्ध आखिरी दिन कर सकते हैं। मोक्ष अमावस्या का ऐसा संयोग बीस साल बाद बना है।
- पंडित मुकेश मिश्रा, नव दुर्गा मंदिर, रोहिली टोला, पुराना शहर
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पितृपक्ष में ऐसा शुभ संयोग करीब 20 साल बाद बना है। भाद्रपद की पूर्णिमा का एक दिन और अश्विन कृष्णपक्ष के 15 दिन को मिलाकर 16 दिन श्राद्ध के होते हैं। 28 सितंबर को शनिवार और सर्वपितृ अमावस्या का सुयोग इसे मोक्ष अमावस्या की श्रेणी प्रदान कर रहा है। उसी दिन धृति योग भी बन रहा है। धृति योग के स्वामी जल देवता हैं, इसलिए उस दिन पितरों का जल से तर्पण विशेष महत्व और प्रभाव वाला होगा। 1999 में यह संयोग बना था, जब सर्वपितृ अमावस्या शनिवार को पड़ी थी।
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शास्त्रों के अनुसार पंचक के नक्षत्रों की गणना दोनों पक्षों, तिथि और दिवस के आधार पर की जाती है। यह नक्षत्र 100 प्रकार के कष्ट, बाधा और समस्या से मुक्ति दिलाता है। कहा जाता है की इस नक्षत्र में जो भी कार्य किये जाते हैं सभी शुभ फल देने वाले होते हैं। ज्योतिष के अनुसार तारका नक्षत्र पंचक का नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र को कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है। वहीं पंचक को पांच तत्वों से मिला नक्षत्र माना जाता है। जब यह विशेष पर्वकाल में शुक्ल पक्षीय हो या नक्षत्र के स्वामित्व पर शुभ ग्रहों की संयुक्त दृष्टि हो तब यह पंचक शुभ माना जाता है। इस बार पितृपक्ष में पितरों को जल से तृप्त किया जा सकता है।
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जिनकी तिथि याद न हो, उनके भी श्राद्ध आखिरी दिन कर सकते हैं। मोक्ष अमावस्या का ऐसा संयोग बीस साल बाद बना है।
- पंडित मुकेश मिश्रा, नव दुर्गा मंदिर, रोहिली टोला, पुराना शहर